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चीनी मिलों पर अभी भी किसानों का 107 करोड़ बकाया
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चीनी मिलों पर अभी भी किसानों का 107 करोड़ बकाया
बुलंदशहर। जनपद की चीनी मिलों में नए पेराई सत्र शुरू करने के आदेश जारी हो गए हैं। बावजूद इसके अभी तक विगत पेराई सत्र में खरीदे गए गन्ने का मिल अभी तक पूरा भुगतान नहीं कर सके हैं। अभी भी किसानों का 107 करोड़ रुपये का भुगतान बकाया है। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद गन्ना किसानों को भुगतान होने की उम्मीद बढ़ी।
बता दें कि विगत वर्ष जनपद की चार मिलों ने 650 करोड़ से अधिक का गन्ना खरीदा था। शासन ने जिस समय चीनी मिलों में पेराई सत्र शुरू हुआ था, उससे पहले आदेश जारी किया था कि किसानों को भुगतान 15 दिन के भीतर करना होगा। लेकिन, ऐसा नहीं हुआ और पेराई सत्र समाप्त होने के पांच माह बाद भी मिलों ने किसानों को बकाया भुगतान नहीं किया। जो भुगतान हुआ है उसे चीनी मिलों ने टुकड़ों में किया है। अब पेराई सत्र की तैयारी शुरू होने के बाद भी किसानों की107 करोड़ से अधिक की राशि का भुगतान होना बाकी है। भुगतान करने के मामले में सबसे फिसड्डी वेव चीनी मिल चल रही है। इस पर सबसे अधिक 41.26 करोड़ बकाया चल रहा है। इसी तरह अनामिका पर 31.26, अनूपशहर पर 14.25 और साबितगढ़ मिल पर 20.78 करोड़ रुपये का भुगतान बकाया है। इस मामले को अब हाईकोर्ट ने संज्ञान में लिया तो किसानों को आस बंध गई है।
जनपद के किसानों का आठ मिल खरीदती हैं गन्ना
बता दें कि जनपद में गन्ना उत्पादक किसानों की संख्या 1.12 लाख से अधिक है। इन किसानों को गन्ना आठ चीनी मिल खरीदती हैं। इनमें चार जनपद और चार दूसरे जिलों की मिल शामिल हैं। जनपद की मिलों में साबितगढ़, अनामिका, अनूपशहर और वेव शुगर मिल में जिले से ज्यादातर गन्ना जाता है। जबकि दूसरे जिलों की मिलों में हापुड़ की ब्रजनाथपुर और सांभली, अमरोहा और संभल की रजपुरा मिल शामिल हैं।
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मेरठ मंडल में बुलंदशहर भुगतान करने में पहले स्थान पर
चीनी मिल बेशक बकाया गन्ना भुगतान करने में फिसड्डी साबित हो रही हों। लेकिन मेरठ मंडल में बुलंदशहर जनपद भुगतान करने के मामले में पहले स्थान पर है। बुलंदशहर में अभी तक 83.45 फीसदी का भुगतान हो चुका है। जबकि मेरठ में 77.96, बागपत में 69.89, हापुड़ में 35.58 और गाजियाबाद में 22 फीसदी बकाया गन्ने का भुगतान हो सका है। जनपद की एक मात्र वेव शुगर मिल ही ऐसी है, जो भुगतान करने में फिसड्डी साबित हो रही है।
बोले, गन्ना किसान
वेव शुगर मिल भुगतान समय पर नहीं कर रही है, जबकि अन्य मिलों द्वारा भुगतान किया जा रहा है। समय पर बकाया गन्ना भुगतान न मिलने से किसानों को कई तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। - देवेंद्र सिंह।
किसानों को आस रहती है कि गन्ने का भुगतान एक साथ मिलेगा तो वह कोई भी काम कर सकते हैं। लेकिन इस आस को चीनी मिल पूरा नहीं होने देती और शासन के आदेश का भी पालन नहीं करती हैं। - चमन सिंह।
गन्ने की फसल एक ऐसी खेती है, जिससे एक मुश्त किसानों को राशि मिलने की संभावना रहती है। लेकिन चीनी मिलों की मनमानी के चलते किसानों को कर्ज पर राशि लेना भी मजबूरी बन जाता है। -बिजेंद्र सिंह।
हालांकि प्रशासन और शासन की ओर से चीनी मिलों को समय पर भुगतान के लिए कई बार आदेश हुए। बावजूद इसके इन आदेशों का पालन हीं होने से किसानों को परेशानी हुई। अब हाईकोर्ट के आदेश पर बकाया गन्ना भुगतान मिलने की आस बंध गई है। - ओमपाल सिंह।
कोट...
चीनी मिलों द्वारा समय पर भुगतान न करने पर कई बार नोटिस जारी किए गए। साथ ही सख्त आदेश दिए गए कि भुगतान जल्द से जल्द किया जाए। वेव शुगर मिल को छोड़कर तीन मिलों ने आदेशों का पालन भी किया। किसानों की एक-एक पाई का भुगतान करवाया जाएगा। - डीके सैनी, जिला गन्ना अधिकारी, बुलंदशहर
गन्ना क्रय केंद्र बदलने के विरोध में किसानों ने डीसीओ कार्यालय को घेरा
फोटो
- स्याना क्षेत्र के गन्ना किसानों ने अफसरों के खिलाफ किया जमकर हंगामा
माई सिटी रिपोर्टर
बुलंदशहर। स्याना क्षेत्र के किसानों ने गन्ना क्रय केंद्र बदलने के विरोध में बृहस्पतिवार को जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय का घेराव करते हुए अफसरों के खिलाफ जमकर हंगामा किया। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि क्रय केंद्र बदला गया तो बड़ा आंदोलन होगा।
सभी किसान आम आदमी पार्टी के जिला अध्यक्ष विकास शर्मा के नेतृत्व में जिला गन्ना अधिकारी के कार्यालय पहुंचे। यहां पर किसानों ने प्रदर्शन करते हुए कार्यालय का घेराव कर अफसरों के खिलाफ नारेबाजी की। किसानों ने बताया कि क्षेत्र के गांव चोढ़ेरा-बी पर गन्ना क्रय केंद्र संचालित होता है। इस पर शकरपुर, टयाना खुर्द, नित्यानंद नगली, कल्याणपुर आदि गांवों के किसान गन्ने की आपूर्ति करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि गन्ना अधिकारी इस क्रय केंद्र को इस बार बदलकर दूसरी जगह, जो करीब 10 किलोमीटर की दूरी पर है लगाना चाहता है। यदि ऐसा होता है तो किसानों को परेशानी होगी। किसान प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष सूर्यप्रताप सिंह ने कहा कि किसानों का शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिला सचिव शैलेंद्र सिंह ने कहा कि अधिकारियों की मनमानी नहीं चलने दी जाएगी। इस संबंध में किसानों ने डीसीओ को ज्ञापन दिया। डीसीओ डीके सैनी ने किसानों को आश्वासन दिया कि गन्ना क्रय केंद्र को नहीं बदला जाएगा। इसके लिए आदेश जारी किए जा चुके हैं। इस दौरान किसान महाराज सिंह, गजेंद्र सिंह, मनोज प्रधान, ओमदत्त शर्मा, सुनील कुमार, इंद्रराज सिंह, राजपाल सिंह और शिव कुमार राना आदि शामिल रहे।
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बुलंदशहर। जनपद की चीनी मिलों में नए पेराई सत्र शुरू करने के आदेश जारी हो गए हैं। बावजूद इसके अभी तक विगत पेराई सत्र में खरीदे गए गन्ने का मिल अभी तक पूरा भुगतान नहीं कर सके हैं। अभी भी किसानों का 107 करोड़ रुपये का भुगतान बकाया है। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद गन्ना किसानों को भुगतान होने की उम्मीद बढ़ी।
बता दें कि विगत वर्ष जनपद की चार मिलों ने 650 करोड़ से अधिक का गन्ना खरीदा था। शासन ने जिस समय चीनी मिलों में पेराई सत्र शुरू हुआ था, उससे पहले आदेश जारी किया था कि किसानों को भुगतान 15 दिन के भीतर करना होगा। लेकिन, ऐसा नहीं हुआ और पेराई सत्र समाप्त होने के पांच माह बाद भी मिलों ने किसानों को बकाया भुगतान नहीं किया। जो भुगतान हुआ है उसे चीनी मिलों ने टुकड़ों में किया है। अब पेराई सत्र की तैयारी शुरू होने के बाद भी किसानों की107 करोड़ से अधिक की राशि का भुगतान होना बाकी है। भुगतान करने के मामले में सबसे फिसड्डी वेव चीनी मिल चल रही है। इस पर सबसे अधिक 41.26 करोड़ बकाया चल रहा है। इसी तरह अनामिका पर 31.26, अनूपशहर पर 14.25 और साबितगढ़ मिल पर 20.78 करोड़ रुपये का भुगतान बकाया है। इस मामले को अब हाईकोर्ट ने संज्ञान में लिया तो किसानों को आस बंध गई है।
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जनपद के किसानों का आठ मिल खरीदती हैं गन्ना
बता दें कि जनपद में गन्ना उत्पादक किसानों की संख्या 1.12 लाख से अधिक है। इन किसानों को गन्ना आठ चीनी मिल खरीदती हैं। इनमें चार जनपद और चार दूसरे जिलों की मिल शामिल हैं। जनपद की मिलों में साबितगढ़, अनामिका, अनूपशहर और वेव शुगर मिल में जिले से ज्यादातर गन्ना जाता है। जबकि दूसरे जिलों की मिलों में हापुड़ की ब्रजनाथपुर और सांभली, अमरोहा और संभल की रजपुरा मिल शामिल हैं।
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मेरठ मंडल में बुलंदशहर भुगतान करने में पहले स्थान पर
चीनी मिल बेशक बकाया गन्ना भुगतान करने में फिसड्डी साबित हो रही हों। लेकिन मेरठ मंडल में बुलंदशहर जनपद भुगतान करने के मामले में पहले स्थान पर है। बुलंदशहर में अभी तक 83.45 फीसदी का भुगतान हो चुका है। जबकि मेरठ में 77.96, बागपत में 69.89, हापुड़ में 35.58 और गाजियाबाद में 22 फीसदी बकाया गन्ने का भुगतान हो सका है। जनपद की एक मात्र वेव शुगर मिल ही ऐसी है, जो भुगतान करने में फिसड्डी साबित हो रही है।
बोले, गन्ना किसान
वेव शुगर मिल भुगतान समय पर नहीं कर रही है, जबकि अन्य मिलों द्वारा भुगतान किया जा रहा है। समय पर बकाया गन्ना भुगतान न मिलने से किसानों को कई तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। - देवेंद्र सिंह।
किसानों को आस रहती है कि गन्ने का भुगतान एक साथ मिलेगा तो वह कोई भी काम कर सकते हैं। लेकिन इस आस को चीनी मिल पूरा नहीं होने देती और शासन के आदेश का भी पालन नहीं करती हैं। - चमन सिंह।
गन्ने की फसल एक ऐसी खेती है, जिससे एक मुश्त किसानों को राशि मिलने की संभावना रहती है। लेकिन चीनी मिलों की मनमानी के चलते किसानों को कर्ज पर राशि लेना भी मजबूरी बन जाता है। -बिजेंद्र सिंह।
हालांकि प्रशासन और शासन की ओर से चीनी मिलों को समय पर भुगतान के लिए कई बार आदेश हुए। बावजूद इसके इन आदेशों का पालन हीं होने से किसानों को परेशानी हुई। अब हाईकोर्ट के आदेश पर बकाया गन्ना भुगतान मिलने की आस बंध गई है। - ओमपाल सिंह।
कोट...
चीनी मिलों द्वारा समय पर भुगतान न करने पर कई बार नोटिस जारी किए गए। साथ ही सख्त आदेश दिए गए कि भुगतान जल्द से जल्द किया जाए। वेव शुगर मिल को छोड़कर तीन मिलों ने आदेशों का पालन भी किया। किसानों की एक-एक पाई का भुगतान करवाया जाएगा। - डीके सैनी, जिला गन्ना अधिकारी, बुलंदशहर
गन्ना क्रय केंद्र बदलने के विरोध में किसानों ने डीसीओ कार्यालय को घेरा
फोटो
- स्याना क्षेत्र के गन्ना किसानों ने अफसरों के खिलाफ किया जमकर हंगामा
माई सिटी रिपोर्टर
बुलंदशहर। स्याना क्षेत्र के किसानों ने गन्ना क्रय केंद्र बदलने के विरोध में बृहस्पतिवार को जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय का घेराव करते हुए अफसरों के खिलाफ जमकर हंगामा किया। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि क्रय केंद्र बदला गया तो बड़ा आंदोलन होगा।
सभी किसान आम आदमी पार्टी के जिला अध्यक्ष विकास शर्मा के नेतृत्व में जिला गन्ना अधिकारी के कार्यालय पहुंचे। यहां पर किसानों ने प्रदर्शन करते हुए कार्यालय का घेराव कर अफसरों के खिलाफ नारेबाजी की। किसानों ने बताया कि क्षेत्र के गांव चोढ़ेरा-बी पर गन्ना क्रय केंद्र संचालित होता है। इस पर शकरपुर, टयाना खुर्द, नित्यानंद नगली, कल्याणपुर आदि गांवों के किसान गन्ने की आपूर्ति करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि गन्ना अधिकारी इस क्रय केंद्र को इस बार बदलकर दूसरी जगह, जो करीब 10 किलोमीटर की दूरी पर है लगाना चाहता है। यदि ऐसा होता है तो किसानों को परेशानी होगी। किसान प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष सूर्यप्रताप सिंह ने कहा कि किसानों का शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिला सचिव शैलेंद्र सिंह ने कहा कि अधिकारियों की मनमानी नहीं चलने दी जाएगी। इस संबंध में किसानों ने डीसीओ को ज्ञापन दिया। डीसीओ डीके सैनी ने किसानों को आश्वासन दिया कि गन्ना क्रय केंद्र को नहीं बदला जाएगा। इसके लिए आदेश जारी किए जा चुके हैं। इस दौरान किसान महाराज सिंह, गजेंद्र सिंह, मनोज प्रधान, ओमदत्त शर्मा, सुनील कुमार, इंद्रराज सिंह, राजपाल सिंह और शिव कुमार राना आदि शामिल रहे।