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एक्यूआई 317, हवा की सेहत खराब, आंखों में हो रही जलन
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एक्यूआई 317, हवा की सेहत खराब, आंखों में हो रही जलन
बुलंदशहर। दिवाली पर प्रतिबंध के बावजूद खूब आतिशबाजी होने से पिछले कई दिनों से प्रदूषण का स्तर लाल श्रेणी को पार कर चुका है। शहर की वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) लगातार दूसरे दिन 300 से अधिक रहा। 317 एक्यूआई होने पर बुलंदशहर देश के सबसे प्रदूषित शहरों में 14वें नंबर पर रहा। वहीं, स्वच्छ हवा न मिलने पर अब लोगों की आंखों में जलन होने लगी है। शुक्रवार को जिला अस्पताल समेत निजी अस्पताल में 200 से अधिक मरीज आंखों की जांच कराने पहुंचे।
दिवाली पर जिले में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़कर 300 से अधिक पहुंच गया था और देश का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर रहा। इसके बाद अगले दिन वायु प्रदूषण के स्तर में सुधार देखने को मिला। लेकिन जिम्मेदारों के जागरूक न होने की वजह से जिले के हालत फिर बिगड़ने लगे हैं। नगर समेत जिलेभर में अभी भी जहां कूड़े के ढेर से धुआं उठता नजर आता रहता है तो सड़कों पर भी सुबह से शाम तक धूल उड़ती रहती है। वहीं, निर्माण कार्य सामग्री भी खुले में पड़ी हुई है। साथ ही आतिशबाजी भी अभी तक छोड़ी जा रही है। जिससे शहर का एक्यूआई लगातार बढ़ रहा है। वहीं, एक्यूआई बढ़ने से बच्चों को नींद नहीं आने और आंखों में जलन की समस्या होने लगी है। आंखों में जलन, खुजली, लालिमा और पानी आने की शिकायत लेकर मरीज नेत्र रोग विशेषज्ञ के पास पहुंच रहे हैं। अधिकांश को कंकड़ चुभने जैसी परेशानी महसूस हो रही है। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अखिलेश अग्रवाल ने बताया कि प्रदूषण से एलर्जिक कंजेक्टिवाइटिस के मरीज बढ़े हैं। वायु प्रदूषण बढ़ने से आंखों में जलन, खुजली, लालिमा और पानी आने की समस्या आ रही है। आंखों में जलन का मुख्य कारण प्रदूषण है। एक्यूआई बढ़ने से न केवल असुविधा होती है बल्कि नजर भी कमजोर हो जाती है। इसके अलावा आंखों में इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।
ऐसे करें आंखों की देखभाल
- आंखों को गंदे हाथ या कपड़े से न छूएं।
- बाहर निकलते समय चश्मा जरूर पहनें।
- समय-समय पर आंखों को साफ पानी से धोएं।
- कॉन्टेक्ट लेंस वाले लोग जीरो नंबर का चश्मा लगाएं।
- चिकित्सक से परामर्श के बाद ही आई ड्रॉप का इस्तेमाल करें।
वायु प्रदूषण के लिए विभाग भी हैं जिम्मेदार
निकाय द्वारा जहां नियमित पानी का छिड़काव कराने के साथ कूड़ा जलाने वालों पर अंकुश लगाना चाहिए। वहीं, प्रदूषण विभाग द्वारा रात के समय कारखानों की चिमनी से निकलने वाले काले धुएं को रोकने के लिए पेट्रोलिंग नहीं की जा रही है, जबकि स्याना रोड पर गांव कुदैना में प्रतिदिन एक फैक्टरी से रात के समय धुएं का गुबार उठता रहता है। यातायात विभाग द्वारा भी प्रमुख चौराहों पर आए दिन लगने वाले जाम की समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा। साथ ही पूर्ति विभाग व खाद्य विभाग द्वारा ढाबा, होटल और रेस्टोरेंट आदि में ईंधन के रूप में प्रयुक्त लकड़ी व कोयले के प्रयोग पर रोक नहीं लगाई जा रही। वहीं, शहर के गली-कूचों में संचालित क्लीनिक और नर्सिंग होम से निकलने वाले बायो मेडिकल वेस्ट का उचित निस्तारण नहीं किया जा रहा। कृषि विभाग द्वारा पराली जलाने के मामलों में भी सेटेलाइट पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
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ये बरतें एहतियात
- बाहर निकलने पर मास्क का प्रयोग अवश्य करें।
- सुबह की सैर के लिए न निकलें। बीमार, बुजुर्ग और बच्चों को सुबह-शाम बाहर न घूमने दें। घर में ही योगाभ्यास और प्राणायाम करें।
- खुले में व्यायाम न करें। खुले में जल्दी-जल्दी सांस लेने से प्रदूषण के तत्कव फेफड़ों में अधिक मात्रा में चले जाते हैं। इसलिए घर या जिम में व्यायाम करें।
- पीने के लिए नियमित रूप से गुनगुना पानी लें। खानपान सादा रखें और समय से भोजन लें।
एक्यूआई बुलंदशहर का ही नहीं सभी शहरों का बढ़ रहा है, जो हवा रुकने के कारण अधिक प्रभाव दिखा रहा है। यमुनापुरम में लगातार पानी का छिड़काव कराया जा रहा है। साथ ही कुछ लोगों को नोटिस भी जारी किए गए हैं। - सपना श्रीवास्तव, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारी
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बुलंदशहर। दिवाली पर प्रतिबंध के बावजूद खूब आतिशबाजी होने से पिछले कई दिनों से प्रदूषण का स्तर लाल श्रेणी को पार कर चुका है। शहर की वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) लगातार दूसरे दिन 300 से अधिक रहा। 317 एक्यूआई होने पर बुलंदशहर देश के सबसे प्रदूषित शहरों में 14वें नंबर पर रहा। वहीं, स्वच्छ हवा न मिलने पर अब लोगों की आंखों में जलन होने लगी है। शुक्रवार को जिला अस्पताल समेत निजी अस्पताल में 200 से अधिक मरीज आंखों की जांच कराने पहुंचे।
दिवाली पर जिले में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़कर 300 से अधिक पहुंच गया था और देश का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर रहा। इसके बाद अगले दिन वायु प्रदूषण के स्तर में सुधार देखने को मिला। लेकिन जिम्मेदारों के जागरूक न होने की वजह से जिले के हालत फिर बिगड़ने लगे हैं। नगर समेत जिलेभर में अभी भी जहां कूड़े के ढेर से धुआं उठता नजर आता रहता है तो सड़कों पर भी सुबह से शाम तक धूल उड़ती रहती है। वहीं, निर्माण कार्य सामग्री भी खुले में पड़ी हुई है। साथ ही आतिशबाजी भी अभी तक छोड़ी जा रही है। जिससे शहर का एक्यूआई लगातार बढ़ रहा है। वहीं, एक्यूआई बढ़ने से बच्चों को नींद नहीं आने और आंखों में जलन की समस्या होने लगी है। आंखों में जलन, खुजली, लालिमा और पानी आने की शिकायत लेकर मरीज नेत्र रोग विशेषज्ञ के पास पहुंच रहे हैं। अधिकांश को कंकड़ चुभने जैसी परेशानी महसूस हो रही है। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अखिलेश अग्रवाल ने बताया कि प्रदूषण से एलर्जिक कंजेक्टिवाइटिस के मरीज बढ़े हैं। वायु प्रदूषण बढ़ने से आंखों में जलन, खुजली, लालिमा और पानी आने की समस्या आ रही है। आंखों में जलन का मुख्य कारण प्रदूषण है। एक्यूआई बढ़ने से न केवल असुविधा होती है बल्कि नजर भी कमजोर हो जाती है। इसके अलावा आंखों में इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।
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ऐसे करें आंखों की देखभाल
- आंखों को गंदे हाथ या कपड़े से न छूएं।
- बाहर निकलते समय चश्मा जरूर पहनें।
- समय-समय पर आंखों को साफ पानी से धोएं।
- कॉन्टेक्ट लेंस वाले लोग जीरो नंबर का चश्मा लगाएं।
- चिकित्सक से परामर्श के बाद ही आई ड्रॉप का इस्तेमाल करें।
वायु प्रदूषण के लिए विभाग भी हैं जिम्मेदार
निकाय द्वारा जहां नियमित पानी का छिड़काव कराने के साथ कूड़ा जलाने वालों पर अंकुश लगाना चाहिए। वहीं, प्रदूषण विभाग द्वारा रात के समय कारखानों की चिमनी से निकलने वाले काले धुएं को रोकने के लिए पेट्रोलिंग नहीं की जा रही है, जबकि स्याना रोड पर गांव कुदैना में प्रतिदिन एक फैक्टरी से रात के समय धुएं का गुबार उठता रहता है। यातायात विभाग द्वारा भी प्रमुख चौराहों पर आए दिन लगने वाले जाम की समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा। साथ ही पूर्ति विभाग व खाद्य विभाग द्वारा ढाबा, होटल और रेस्टोरेंट आदि में ईंधन के रूप में प्रयुक्त लकड़ी व कोयले के प्रयोग पर रोक नहीं लगाई जा रही। वहीं, शहर के गली-कूचों में संचालित क्लीनिक और नर्सिंग होम से निकलने वाले बायो मेडिकल वेस्ट का उचित निस्तारण नहीं किया जा रहा। कृषि विभाग द्वारा पराली जलाने के मामलों में भी सेटेलाइट पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
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ये बरतें एहतियात
- बाहर निकलने पर मास्क का प्रयोग अवश्य करें।
- सुबह की सैर के लिए न निकलें। बीमार, बुजुर्ग और बच्चों को सुबह-शाम बाहर न घूमने दें। घर में ही योगाभ्यास और प्राणायाम करें।
- खुले में व्यायाम न करें। खुले में जल्दी-जल्दी सांस लेने से प्रदूषण के तत्कव फेफड़ों में अधिक मात्रा में चले जाते हैं। इसलिए घर या जिम में व्यायाम करें।
- पीने के लिए नियमित रूप से गुनगुना पानी लें। खानपान सादा रखें और समय से भोजन लें।
एक्यूआई बुलंदशहर का ही नहीं सभी शहरों का बढ़ रहा है, जो हवा रुकने के कारण अधिक प्रभाव दिखा रहा है। यमुनापुरम में लगातार पानी का छिड़काव कराया जा रहा है। साथ ही कुछ लोगों को नोटिस भी जारी किए गए हैं। - सपना श्रीवास्तव, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारी