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जिले में अब तक बन जाता विश्वविद्यालय, अफसर लगा गए अड़ंगा

Fri, 13 Jul 2018 11:24 PM IST
Updated Fri, 13 Jul 2018 11:24 PM IST
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जिले में अब तक बन जाता विश्वविद्यालय, अफसर लगा गए अड़ंगा
अफसरों की ढील से अटका विश्वविद्यालय
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- मुमरेजपुर में 80 बीघा जमीन पर केंद्र व राज्य सरकार से दो बार चुके थे आदेश, राशि भी हो चुकी थी जारी
- संत रविदास विवि के लिए मुमरेजपुर के ग्रामीण 1989 से लगातार कर रहे प्रयास
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर। यदि जिला प्रशासन थोड़ा भी सजग होता और पहल करता तो जिले को अब तक विश्वविद्यालय की सौगात मिल गई होती। दरअसल, केंद्र व राज्य सरकार से विश्वविद्यालय के लिए दो बार आदेश जारी हो गए थे और करोड़ों की राशि भी जारी कर दी गई थी, मगर जिला प्रशासन की ढील का ही नतीजा रहा कि यह सौगात आज तक पूरी नहीं हो पाई। इसके लिए डिबाई तहसील के गांव मुमरेजपुर के ग्रामीण 1989 से आज तक लगातार प्रयासरत हैं।
गांव मुमरेजपुर में करीब 80 बीघा जमीन ग्राम समाज की थी। वर्ष 1989 में ग्रामीणों ने इस भूमि में संत रविदास विश्वविद्यालय बनवाने का निर्णय लिया। इसके लिए ग्रामीणाें ने संत रविदास शिक्षा संस्थान मुमरेजपुर का गठन किया। इसके बाद विश्वविद्यालय बनवाने के लिए पहल शुरू की। विश्वविद्यालय बनवाने के लिए सभी कागजात आदि एकत्रित किए और केंद्र व राज्य सरकार से जिला प्रशासन के माध्यम से मांग की गई। इसके बाद 13 मार्च 1995 में उच्च शिक्षा विभाग लखनऊ को पत्र के माध्यम से मांग की गई। इसका नतीजा यह रहा कि विभाग की ओर से आदेश जारी हुआ था कि इस जमीन पर पहले महाविद्यालय बनाया जाए और उसके बनने के बाद डीम्म विश्वविद्यालय यानी संत रविदास विश्वविद्यालय बनाने की कार्रवाई की जाएगी। उस समय शासन से करीब 10 करोड़ जारी कर जिला प्रशासन को महाविद्यालय बनाने के आदेश जारी किए थे। मगर, तत्कालीन डीएम डिंपल वर्मा ने समिति और संस्थान के मध्य विवाद बताकर उचित नहीं समझा और शासन को महाविद्यालय न बनाने का पत्र भेज दिया था। इसके बाद संत रविदास शिक्षा संस्थान मुमरेजपुर ने एक बार फिर विश्वविद्यालय की मांग को उठाया। वर्ष 2012 में इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च संस्थान नई दिल्ली से केंद्रीय व्यवसायिक एवं कृषि प्रसार प्रचार विश्वविद्यालय बनाने की मांग की गई थी। उस समय विश्वविद्यालय बनाने के लिए 25 करोड़ की राशि जारी होने वाली थी कि तत्कालीन डीएम बी चंद्रकला ने विश्वविद्यालय के लिए चिन्हित की गई भूमि को निरस्त कर दिया था, जिसके चलते यह मांग फिर खटाई में पड़ गई।
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समिति के अध्यक्ष सर्मेश कुमार, महासचिव भूपेंद्र सिंह, सदस्य रविकरन सिंह, जयकिशन, बाल किशन और ग्राम प्रधान कांती देवी का कहना है कि इस मांग को वह लगातार केंद्र व राज्य सरकार से कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई बात नहीं बन पाई है। यदि दो बार केंद्र व राज्य सरकार से हुए आदेश को लेकर प्रशासनिक अधिकारी सजग होेते तो आज जिले में संत रविदास विश्वविद्यालय बन चुका होता।
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