{"_id":"5af72c5c4f1c1bd0408b4bf5","slug":"152614818513-bulandshahr-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्कूल बंद होने का आया समय, नहीं हुए गरीब बच्चों का प्रवेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्कूल बंद होने का आया समय, नहीं हुए गरीब बच्चों का प्रवेश
Updated Sat, 12 May 2018 11:33 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
स्कूल बंद होने का आया समय, नहीं हुए गरीब बच्चों के प्रवेश
- शिक्षा के अधिकार के तहत निजी स्कूलों में कराना था प्रवेश
- विभागीय अफसर और कर्मचारियों की सुस्ती के चलते प्रवेश दिलवाने को भटक रहे अभिभावक
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर। शिक्षण संस्थानों में ग्रीष्मकालीन अवकाश के तहत बंद होने का समय नजदीक है, लेकिन अधिकतर गरीब बच्चों के निजी स्कूलों में प्रवेश नहीं हुए हैं। वहीं, विभागीय अफसर और कर्मचारियों की सुस्ती के चलते प्रवेश दिलवाने के लिए बच्चों के अभिभावक भटक रहे हैं।
शिक्षा के अधिकार के तहत निजी स्कूलों में 25 फीसदी सीटों पर गरीब बच्चों का प्रवेश जरूरी होता है। इन सीटों पर प्रवेश करवाने का काम बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों का होता है। इस बार करीब 400 बच्चों ने निजी स्कूल में प्रवेश के लिए आनलाइन आवेदन किया। शासन और बेसिक शिक्षा विभाग का आदेश था कि यह काम 15 मई तक पूरा कर लिया जाए, लेकिन अभी तक मात्र एक ही बार ड्रा के माध्यम से 100 से अधिक बच्चों के नाम की सूची जारी की गई। इस सूची को जारी हुए लगभग एक माह पूरा हो गया। इसके बाद विभागीय अफसर और कर्मचारियों ने एक तो बच्चों की प्रवेश के लिए दूसरी लिस्ट जारी नहीं की। इतना ही नहीं पहली लिस्ट में जिन बच्चों के नाम शामिल थे। उनके अभिभावक अभी तक अपने बच्चों का प्रवेश दिलवाने के लिए भटक रहे हैं। उनका आरोप है कि जिन निजी स्कूलों को प्रवेश के लिए चिन्हित किया गया था। वह प्रवेश देने में आनाकानी कर रहे हैं, जबकि अब ग्रीष्मकालीन अवकाश के तहत स्कूल बंद होने का समय नजदीक आ गया है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अंबरीष कुमार सिंह यादव का कहना है कि जो निजी स्कूल बच्चों का प्रवेश नहीं कर रहे हैं उनसे समय-समय पर संपर्क कर बच्चों का प्रवेश दिलवाया जा रहा है। इस कार्य में किसी तरह की शिथिलता नहीं बरती जा रही है, अगर संबंधित अफसर और कर्मचारियों की शिथिलता सामने आई तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
- शिक्षा के अधिकार के तहत निजी स्कूलों में कराना था प्रवेश
- विभागीय अफसर और कर्मचारियों की सुस्ती के चलते प्रवेश दिलवाने को भटक रहे अभिभावक
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर। शिक्षण संस्थानों में ग्रीष्मकालीन अवकाश के तहत बंद होने का समय नजदीक है, लेकिन अधिकतर गरीब बच्चों के निजी स्कूलों में प्रवेश नहीं हुए हैं। वहीं, विभागीय अफसर और कर्मचारियों की सुस्ती के चलते प्रवेश दिलवाने के लिए बच्चों के अभिभावक भटक रहे हैं।
शिक्षा के अधिकार के तहत निजी स्कूलों में 25 फीसदी सीटों पर गरीब बच्चों का प्रवेश जरूरी होता है। इन सीटों पर प्रवेश करवाने का काम बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों का होता है। इस बार करीब 400 बच्चों ने निजी स्कूल में प्रवेश के लिए आनलाइन आवेदन किया। शासन और बेसिक शिक्षा विभाग का आदेश था कि यह काम 15 मई तक पूरा कर लिया जाए, लेकिन अभी तक मात्र एक ही बार ड्रा के माध्यम से 100 से अधिक बच्चों के नाम की सूची जारी की गई। इस सूची को जारी हुए लगभग एक माह पूरा हो गया। इसके बाद विभागीय अफसर और कर्मचारियों ने एक तो बच्चों की प्रवेश के लिए दूसरी लिस्ट जारी नहीं की। इतना ही नहीं पहली लिस्ट में जिन बच्चों के नाम शामिल थे। उनके अभिभावक अभी तक अपने बच्चों का प्रवेश दिलवाने के लिए भटक रहे हैं। उनका आरोप है कि जिन निजी स्कूलों को प्रवेश के लिए चिन्हित किया गया था। वह प्रवेश देने में आनाकानी कर रहे हैं, जबकि अब ग्रीष्मकालीन अवकाश के तहत स्कूल बंद होने का समय नजदीक आ गया है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अंबरीष कुमार सिंह यादव का कहना है कि जो निजी स्कूल बच्चों का प्रवेश नहीं कर रहे हैं उनसे समय-समय पर संपर्क कर बच्चों का प्रवेश दिलवाया जा रहा है। इस कार्य में किसी तरह की शिथिलता नहीं बरती जा रही है, अगर संबंधित अफसर और कर्मचारियों की शिथिलता सामने आई तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन