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भाजपा में कार्यकर्ता ही सबकुछ, कांग्रेस एक परिवार की पार्टी
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बदायूं। जिले के निवासी बीएल वर्मा (बनवारी लाल वर्मा) भले ही सीधे तौर पर कोई चुनाव नहीं लड़े पर भाजपा के संगठन में शून्य से शिखर पर जाने का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण हैं। मुजरिया के गांव में जन्मे वर्मा ने एलआईसी अभिकर्ता बनकर रोजगार का रास्ता बनाया तो इसके समानांतर ही भाजपा में संगठन के लिए निचले स्तर से काम शुरू किया। अब वह मोदी मंत्रीमंडल में केंद्रीय राज्यमंत्री बने हैं। उनके कैबिनेट मंत्री खुद गृहमंत्री अमित शाह हैं जिनके साथ वह नए बने सहकारिता मंत्रालय व गृह विभाग के अधीन पूर्वोत्तर राज्यों के लिए बने मंत्रालय का काम देखेंगे। दिल्ली में बृहस्पतिवार को उन्होंने मंत्रालय का प्रभार ले लिया। इसके बाद अमर उजाला से खास बातचीत में उन्होंने कई सवालों के जवाब दिए।
सवाल: आपने सीधे चुनाव नहीं लड़ा। पहली बार राज्यसभा सांसद और फिर थोड़े ही दिन में केंद्र सरकार में मंत्री बन गए। कैसा महसूस कर रहे हैं?
जवाब: अच्छा लग रहा है। मैं भाजपा का साधारण कार्यकर्ता था। पार्टी आगे बढ़ाती रही। नई जिम्मेदारी मिलती रहीं, वही काम करता रहा। ये वास्तव में नहीं सोचा था कि एक दिन इतनी बड़ी जिम्मेदारी मिल जाएगी। अब जिम्मेदारी मिली है तो उसे शिद्दत से निभाऊंगा।
सवाल: साधारण कार्यकर्ता से केंद्रीय मंत्री तक का सफर कैसे तय किया। पार्टी और नेताओं ने कितना साथ दिया?
जवाब: भाजपा ही इकलौती ऐसी पार्टी है जहां सड़क पर काम करने वाला साधारण कार्यकर्ता केंद्रीय मंत्री और प्रधानमंत्री तक बन सकता है। पीएम मोदी इसके उदाहरण हैं। यहां कार्यकर्ता ही सबकुछ है। कांग्रेस जैसी पार्टियां एक परिवार की पार्टियां हैं जहां कार्यकर्ता का सम्मान नहीं होता। वहां व्यक्ति की तरक्की एक परिवार के प्रति उसकी श्रद्धा पर निर्भर करती है।
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सवाल: नए मंत्रालयों और तेजतर्रार कैबिनेट मंत्री अमित शाह के साथ कैसे तालमेल बैठाएंगे?
जवाब: मुझे पहले अहसास नहीं था पर मुझे लगता है कि वरिष्ठ लोग शायद काफी समय से मेरे काम को परख रहे थे। राज्यसभा सांसद बनाया जाना भी शायद इसी रणनीति का हिस्सा रहा। प्रधानमंत्री ने सहकारिता जैसा अलग मंत्रालय बनाया और उसकी जिम्मेदारी गृहमंत्री को दी। इसमें मुझे भी शामिल करना यकीनन यह साबित करता है कि उन लोगों को मेरे ऊपर काफी भरोसा है। इस भरोसे को बनाए रखना अब मेरे लिए चुनौती है। मैं पूरे मन से काम करूंगा। पूर्वोत्तर राज्यों में काम का अवसर मिलना भी मैं उपलब्धि मानता हूं।
सवाल: सहकारिता क्षेत्र की स्थिति खराब है। खासकर यूपी में सहकारी समितियां बदहाल हैं। कुछ बंद हैं तो कुछ कर्ज में डूबी हैं। आप इसमें क्या चमत्कार करेंगे?
जवाब: सहकारिता व्यापक कामकाज वाला क्षेत्र है। यह सीधे गांव और किसान से जुड़ा है। प्रधानमंत्री चाहते हैं कि सहकारिता के जरिए गांवों में खुशहाली आए। इसीलिए केंद्र स्तर पर इस मंत्रालय का गठन हुआ है। राज्य सरकारों से तालमेल करके इस क्षेत्र को लोक हितकारी बनाने का प्रयास करेंगे। इसके लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे।
सवाल: बदायूं वाले आपके मंत्री बनने से उत्साहित हैं, यहां कब आना होगा?
जवाब: बदायूं जिले के लोगों के प्यार की बदौलत यह मुकाम मिला है। यह दिल का रिश्ता है। जल्दी ही बदायूं आने का प्रयास करूंगा और लोगों से मिलूंगा। उससे पहले नए मंत्रालय का कामकाज समझना जरूरी है। इसलिए कुछ समय लग सकता है।
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सवाल: आपने सीधे चुनाव नहीं लड़ा। पहली बार राज्यसभा सांसद और फिर थोड़े ही दिन में केंद्र सरकार में मंत्री बन गए। कैसा महसूस कर रहे हैं?
जवाब: अच्छा लग रहा है। मैं भाजपा का साधारण कार्यकर्ता था। पार्टी आगे बढ़ाती रही। नई जिम्मेदारी मिलती रहीं, वही काम करता रहा। ये वास्तव में नहीं सोचा था कि एक दिन इतनी बड़ी जिम्मेदारी मिल जाएगी। अब जिम्मेदारी मिली है तो उसे शिद्दत से निभाऊंगा।
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सवाल: साधारण कार्यकर्ता से केंद्रीय मंत्री तक का सफर कैसे तय किया। पार्टी और नेताओं ने कितना साथ दिया?
जवाब: भाजपा ही इकलौती ऐसी पार्टी है जहां सड़क पर काम करने वाला साधारण कार्यकर्ता केंद्रीय मंत्री और प्रधानमंत्री तक बन सकता है। पीएम मोदी इसके उदाहरण हैं। यहां कार्यकर्ता ही सबकुछ है। कांग्रेस जैसी पार्टियां एक परिवार की पार्टियां हैं जहां कार्यकर्ता का सम्मान नहीं होता। वहां व्यक्ति की तरक्की एक परिवार के प्रति उसकी श्रद्धा पर निर्भर करती है।
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सवाल: नए मंत्रालयों और तेजतर्रार कैबिनेट मंत्री अमित शाह के साथ कैसे तालमेल बैठाएंगे?
जवाब: मुझे पहले अहसास नहीं था पर मुझे लगता है कि वरिष्ठ लोग शायद काफी समय से मेरे काम को परख रहे थे। राज्यसभा सांसद बनाया जाना भी शायद इसी रणनीति का हिस्सा रहा। प्रधानमंत्री ने सहकारिता जैसा अलग मंत्रालय बनाया और उसकी जिम्मेदारी गृहमंत्री को दी। इसमें मुझे भी शामिल करना यकीनन यह साबित करता है कि उन लोगों को मेरे ऊपर काफी भरोसा है। इस भरोसे को बनाए रखना अब मेरे लिए चुनौती है। मैं पूरे मन से काम करूंगा। पूर्वोत्तर राज्यों में काम का अवसर मिलना भी मैं उपलब्धि मानता हूं।
सवाल: सहकारिता क्षेत्र की स्थिति खराब है। खासकर यूपी में सहकारी समितियां बदहाल हैं। कुछ बंद हैं तो कुछ कर्ज में डूबी हैं। आप इसमें क्या चमत्कार करेंगे?
जवाब: सहकारिता व्यापक कामकाज वाला क्षेत्र है। यह सीधे गांव और किसान से जुड़ा है। प्रधानमंत्री चाहते हैं कि सहकारिता के जरिए गांवों में खुशहाली आए। इसीलिए केंद्र स्तर पर इस मंत्रालय का गठन हुआ है। राज्य सरकारों से तालमेल करके इस क्षेत्र को लोक हितकारी बनाने का प्रयास करेंगे। इसके लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे।
सवाल: बदायूं वाले आपके मंत्री बनने से उत्साहित हैं, यहां कब आना होगा?
जवाब: बदायूं जिले के लोगों के प्यार की बदौलत यह मुकाम मिला है। यह दिल का रिश्ता है। जल्दी ही बदायूं आने का प्रयास करूंगा और लोगों से मिलूंगा। उससे पहले नए मंत्रालय का कामकाज समझना जरूरी है। इसलिए कुछ समय लग सकता है।