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Budaun News: घर तक सीमित न रहकर समूह से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रहीं महिलाएं
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बदायूं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत जिले में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की मुहिम तेजी पकड़ रही है। अब महिलाएं भी घरेलू कामकाज तक सीमित नहीं रही हैं। वह भी आत्मनिर्भर बनने के समूह से जुड़ रही हैं। सितंबर में ही करीब 24 हजार महिलाएं स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं।
जिले में कुल 2115 समूह हैं। मिशन के तहत जुड़ी महिलाओं को स्वरोजगार शुरू करने के लिए सीएलएफ (क्लस्टर लेवल फेडरेशन) के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। महिलाएं इस ऋण से सिलाई-कढ़ाई, पशुपालन, किराना दुकान, मसाला व अचार निर्माण जैसे कार्य शुरू कर रही हैं।
जिला मिशन प्रबंधक सुरेश कुमार ने बताया कि ब्लॉक मिशन प्रबंधकों और उनकी टीमें गांव-गांव जाकर महिलाओं को सरकार की योजनाओं के बारे में जागरूक कर रही हैं। टीम महिलाओं को समूह के फायदे और आत्मनिर्भर बनने के लिए मिलने वाली मदद के बारे में समझा रही हैं। उन्होंने बताया कि समूह से जुड़ने के बाद महिलाओं को न केवल आर्थिक मदद मिल रही है, बल्कि बैंक लिंकेज, प्रशिक्षण और बाजार उपलब्ध कराने में भी सहायता दी जा रही है।
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इससे ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं अब घर की चाहरदीवारी से बाहर निकलकर अपनी अलग पहचान बना रही हैं। विभाग का लक्ष्य है कि हर गरीब परिवार की महिला को समूह से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाए। सितंबर में हुई प्रगति से इस लक्ष्य को और गति मिली है।
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जिले में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए समूह से जोड़ा जा रहा है, महिलाएं भी आय अर्जित करने के लिए समूह से जुड़ रही हैं। समूह से जुड़कर महिलाओं को उनके सपने साकार करने में मदद मिल रही है। - रवि प्रकाश सिंह, डीसी एनआरएलम
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जिले में कुल 2115 समूह हैं। मिशन के तहत जुड़ी महिलाओं को स्वरोजगार शुरू करने के लिए सीएलएफ (क्लस्टर लेवल फेडरेशन) के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। महिलाएं इस ऋण से सिलाई-कढ़ाई, पशुपालन, किराना दुकान, मसाला व अचार निर्माण जैसे कार्य शुरू कर रही हैं।
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जिला मिशन प्रबंधक सुरेश कुमार ने बताया कि ब्लॉक मिशन प्रबंधकों और उनकी टीमें गांव-गांव जाकर महिलाओं को सरकार की योजनाओं के बारे में जागरूक कर रही हैं। टीम महिलाओं को समूह के फायदे और आत्मनिर्भर बनने के लिए मिलने वाली मदद के बारे में समझा रही हैं। उन्होंने बताया कि समूह से जुड़ने के बाद महिलाओं को न केवल आर्थिक मदद मिल रही है, बल्कि बैंक लिंकेज, प्रशिक्षण और बाजार उपलब्ध कराने में भी सहायता दी जा रही है।
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इससे ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं अब घर की चाहरदीवारी से बाहर निकलकर अपनी अलग पहचान बना रही हैं। विभाग का लक्ष्य है कि हर गरीब परिवार की महिला को समूह से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाए। सितंबर में हुई प्रगति से इस लक्ष्य को और गति मिली है।
जिले में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए समूह से जोड़ा जा रहा है, महिलाएं भी आय अर्जित करने के लिए समूह से जुड़ रही हैं। समूह से जुड़कर महिलाओं को उनके सपने साकार करने में मदद मिल रही है। - रवि प्रकाश सिंह, डीसी एनआरएलम