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बारिश, ओलों से सरसों को नुकसान, गेहूं को फायदा

Mon, 12 Feb 2018 06:46 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बदायूं
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बदायूं Updated Mon, 12 Feb 2018 06:46 PM IST
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Wheat crop flourishes with rain
रविवार शाम शुरू हुई बूंदाबांदी ने सोमवार तड़के किसानों को परेशानी में डाल दिया। ओलों की हल्की बौछार ने सबसे ज्यादा सरसों की फसल को नुकसान पहुंचाया। इस कारण पकने के मुहाने पर खड़ी सरसों के दाने झड़ गए। इधर, बूंदाबांदी के साथ मौसम में नमी की वजह से गेहूं को संजीवनी मिल गई है।  
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ओलों की बौछार से सर्वाधिक प्रभावित इलाका कटरी के आसपास का रहा। हल्की सी बौछार यूं तो जिले में कई स्थानों पर पड़ी लेकिन कटरी में लहलहाती सरसों की फसल को ज्यादा प्रभावित किया। तापमान में वृद्धि के साथ लगने लगा था कि 15 दिन के अंदर सरसों पक जाएगी लेकिन ओले पढ़ते ही सरसों की फलियां तहस-नहस हो गईं। कुछेक स्थानों पर बूंदाबांदी के दौरान तेज हवा के झोंकों की वजह से फसल जमीन पर गिर गई। दलहन में मसूर को भी नुकसान की आशंका के बीच ग्रामीणों का कहना है कि ओले फिर पड़े तो सरसों और मसूर का उत्पादन आधे से कम रह जाएगा। 
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इधर, गेहूं की फसल के लिए मुफीद बूंदाबांदी ने उत्पादकों के चेहरों पर रंगत ला दी है। गेहूं के पौधे ज्यादा बढे़ नहीं होने से ओलों की बौछार बेअसर साबित हुई। 
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क्या कहते हैं किसान
सरौता निवासी प्रधान देवेंद्र सिंह ने बताया कि बूंदाबांदी से नुकसान नहीं बल्कि फायदा हुआ है। तड़के पड़ी ओलों की बौछार ने किसानों को मुसीबत में डाल दिया है। पिछले सालों में भी किसानों को काफी नुकसान हुआ था। अब तक उसकी भरपाई भी नहीं हो पाई है। 

इलाके के प्रगतिशील किसानों में बरामालदेव निवासी गिरीशपाल सिंह सिसोदिया का कहना है कि ओलावृष्टि आपदा है। वह भी ऐसे समय में जब फसलें पकने के कगार पर हों। आंधी-तूफान हो या फिर कुदरत का कोई कहर, नुकसान में तो अन्नदाता ही रहता है। इस पर किसी का जोर नहीं चलता। 


मामूली रूप से पड़ी ओलों की बौछार ने किसानों को संकट में डाल दिया है। वैसे, किसी भी फसल को नुकसान नहीं हुआ है लेकिन गेहूं को फायदा होगा। बरसात तेज भी होती है तो भी गेहूं सुरक्षित रहेगा।
-डॉ. अर्जुन सिंह, कृषि वैज्ञानिक
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