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लॉकडाउन में तरबूज-खरबूज पर मार... उत्पादक घाटे में अब की बार

Sun, 31 May 2020 11:15 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 31 May 2020 11:15 PM IST
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Watermelon-melon hit in lockdown ... now in productive losses
उझानी/ दातागंज/ कादरचौक। कोरोना संक्रमण को लेकर लॉकडाउन में जायद की पालेज फसलें उत्पादकों के लिए घाटे का सौदा बन गईं। किसानों ने तरबूज-खरबूज ही नहीं, पालेज फसलों से अच्छे दिनों के जो सपने संजोए, वह भी परवान नहीं चढ़ पाए। न तो दिल्ली-मुंबई और पंजाब में इन फसलों को उनके कद्रदानों तक पहुंचाया जा सका और न ही आसपास की मंडियों तक ही ठीक से इन फसलों को व्यापारी पहुंचा सके। इलाके में पालेज फसलें बिकीं जरूर लेकिन पहले के मुकाबले आधा दाम भी नहीं मिल पाया। अब माल बाहर भेजने को मौका मिला है तो खेतों में 20 फीसदी भी पालेज नहीं बची है।
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बदायूं जिले में गंगा की तलहटी से जुड़े इलाकों में दहगवां, उझानी, कादरचौक, उसहैत तो रामगंगा किनारे के इलाकों में दातागंज क्षेत्र में पालेज फसलों की भरमार रहती है। हर साल ही दिल्ली, मुंबई समेत पंजाब के साथ गुजरात और हरियाणा से तरबूज-खरबूज खरीदने के लिए यहां पहुंचते रहे हैं। यहां उगाए जाने वाले देसी और हाइब्रिड प्रजातियों के तरबूज, खरबूज, खीरा और ककड़ी गैर प्रदेशों में पसंद किया जाता है। इस बार पालेज फसलें पककर तैयार हुईं तो कोरोना संक्रमण के चलते लॉकडाउन लग गया। मई महीना तरबूज और खरबूज की बिक्री का पीक टाइम माना जाता है। लेकिन लॉकडाउन की वजह से दूसरे प्रदेशों से थोक व्यापारी इस दौरान जिले में पहुुंच ही नहीं पाए। स्थानीय व्यापारियों ने वाहन परमिट हासिल कर दिल्ली और हरियाणा की मंडियों में फसलें भेजी तो वहां खरीददार नहीं मिले। ऐसे में किसानों की मेहनत तो छोड़िए, लागत की रकम भी नहीं निकल पाई है। हालांकि एक जून से माल बाहर भेजने की सशर्त इजाजत मिली है लेकिन खेतों में करीब 80 फीसदी फसल अब बर्बाद हो चुकी है।
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इस बार पालेज फसलों में तरबूज और खरबूज की पैदावार अच्छी हुई है। फसल को कोई रोग भी नहीं लगा। रेट कम रहने से माल आसपास के प्रदेशों तक नहीं पहुंचा है। किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। - डॉ. संजय कुमार, कृषि वैज्ञानिक।
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पालेज फसलों के भाव-जिन्स थोक फुटकर
तरबूज - तीन से चार रुपये सात-आठ रुपये किलो
खरबूज- आठ से दस रुपये 15- 20 रुपये किलो
तोरई - दो से तीन रुपये पांच-छह रुपये किलो
लौकी - दो से तीन रुपये सात- आठ रुपये किलो
खीरा- चार से पांच रुपये आठ- दस रुपये किलोो
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किसानों की बात
फोटो-8
पालेज फसल मई के पहले सप्ताह से ही बाजार में आने लगती है। शुरूआत में कीमतें अच्छी होती हैं। दूसरे जिलों और राज्यों में कीमतें और भी अच्छी होती हैं। इस बार लॉकडाउन की वजह से फसलों की सप्लाई दूसरे जिलों को नहीं हो सकी।
- राजू, पालेजी किसान
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फोटो-9
पालेज खेती कटरी के किसानों की एक साल की कमाई छह महीने में ही करा देती हैं। बशर्तें फसल को समय से बाजार मिल जाए। इस बार लॉकडाउन की वजह से बाजार मिल ही नहीं पाया। फसल अब खत्म होने की ओर है। मंडी में भाव ही नहीं मिल रहा।
- राम निवास, पालेजी किसान
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फोटो-10
ज्यादातर फसलों को जिले में ही खपाना पड़ा। ऐसे में किसानों को सही भाव नहीं मिल सका। किसानों को नुकसान हुआ है। हालात यह हैं कि जमा भी नहीं निकल पा रही। ऐसे में किसान बहुत ज्यादा परेशान हो चुका है। लेकिन करें तो क्या करें।

सत्तार, किसान
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फोटो-11
लॉकडाउन के कारण तरबूज के व्यापारी नहीं आए। आसपास के गांव में ही जाकर तरबूज को बेचा गया। इस बार समय से पहले गंगा का पानी बढ़ने लगा है। इससे किसान की तलहटी की फसल नष्ट हो गई। इससे किसान पर दो तरफा मार पड़ रही है।
राशिद, किसान
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