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उत्तर प्रदेश परिवर्तन लिखी बस टीएसआई ने सीज की
अमर उजाला ब्यूरो बदायूं।
Updated Wed, 05 Jul 2017 11:39 PM IST
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सीज
- फोटो : अमर उजाला
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रोडवेज की तरह दिखने वाली उत्तर प्रदेश परिवर्तन लिखी निजी बस सीज कर टीएसआई राममिलन ने सिविल लाइंस थाने में खड़ी करा दी है। बस चालक के पास कोई कागजात नहीं मिला है। बताया गया है कि यह बस रोजाना दिल्ली से बदायूं होते हुए बरेली जाती थी। करीब 10 दिन पहले भी उझानी में एआरटीओ ने इसी तरह की बस को सीज किया था।
टीएसआई राममिलन बुधवार दोपहर एक बजे कचहरी तिराहा पर कावाड़ियों के जत्थे निकालने की व्यवस्था कर रहे थे। अचानक उनकी नजर यात्रियों से भरी निजी बस पर पड़ी, जिस पर उत्तर प्रदेश परिवर्तन लिखा था। रोकने पर चालक ने बस भगाने की कोशिश की लेकिन भीड़ होने पर वह सफल नहीं हो सका। चालक की ओर से कोई भी कागज न दिखाने पर बस को सीज कर सिविल लाइंस थाने में खड़ा करा दिया गया। पूछताछ में चालक ने अपना नाम रामवीर निवासी बुलंदशहर बताया है।
किसकी मेहरबानी से चल रहीं है ये बसें
रोडवेज स्टैंड से सवारी लेकर निकलने वाली निजी बसें प्रतिदिन राजस्व को लाखों का चूना लगा रही हैं। इन बसों पर किसकी मेहरबानी है, जवाब किसी के पास नहीं है। स्थानीय लोग बताते हैं कि दिन में ट्रैफिक पुलिस की मौजूदगी में स्टैंड से निजी बसों का संचालन कम होता है लेकिन शाम सात बजे के बजे रोडवेज की तरह दिखने वाली मिनी बसों का संचालन बढ़ जाता है। पुलिस के सिपाहियों की वसूली के चक्कर में यात्री भी निगम की बस समझकर इनमें बैठ जाते हैं।
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टीएसआई राममिलन बुधवार दोपहर एक बजे कचहरी तिराहा पर कावाड़ियों के जत्थे निकालने की व्यवस्था कर रहे थे। अचानक उनकी नजर यात्रियों से भरी निजी बस पर पड़ी, जिस पर उत्तर प्रदेश परिवर्तन लिखा था। रोकने पर चालक ने बस भगाने की कोशिश की लेकिन भीड़ होने पर वह सफल नहीं हो सका। चालक की ओर से कोई भी कागज न दिखाने पर बस को सीज कर सिविल लाइंस थाने में खड़ा करा दिया गया। पूछताछ में चालक ने अपना नाम रामवीर निवासी बुलंदशहर बताया है।
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किसकी मेहरबानी से चल रहीं है ये बसें
रोडवेज स्टैंड से सवारी लेकर निकलने वाली निजी बसें प्रतिदिन राजस्व को लाखों का चूना लगा रही हैं। इन बसों पर किसकी मेहरबानी है, जवाब किसी के पास नहीं है। स्थानीय लोग बताते हैं कि दिन में ट्रैफिक पुलिस की मौजूदगी में स्टैंड से निजी बसों का संचालन कम होता है लेकिन शाम सात बजे के बजे रोडवेज की तरह दिखने वाली मिनी बसों का संचालन बढ़ जाता है। पुलिस के सिपाहियों की वसूली के चक्कर में यात्री भी निगम की बस समझकर इनमें बैठ जाते हैं।
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