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उघैती के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में सुविधाओं का टोटा
बदायूं, ब्यूरो
Updated Tue, 13 Sep 2016 11:51 PM IST
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अस्सी लाख खर्च करने के बाद सात साल पहले बना नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र आज उपेक्षा का दंश झेल रहा है। स्थिति यह है कि आवारा जानवर और अराजक तत्व यहां डेरा जमाए रखते हैं। चहारदीवारी, खिड़की, दरवाजे क्षतिग्रस्त पड़े हैं। चिकित्सकों की कमी के चलते मरीज दर-दर भटक रहे हैं।
वर्ष 1988 में कस्बा उघैती में नवीन पीएचसी की स्थापना हुई तो लोगों ने राहत की सांस ली। उन्हें उम्मीद थी कि अब बेहतर इलाज मिल सकेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। 20 वर्षों तक निजी भवन में संचालित किए जाने के बाद इसे वर्ष 2009 में बने नवीन भवन में शिफ्ट कर दिया गया। लेकिन स्वास्थ्य विभाग अनदेखी बनी रही। आज तक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से लेकर नर्स, पैथॉलाजी स्टाफ, चिकित्सकों को उपलब्धता नहीं कराई गई। ग्रामीणों की माने तो यहां पहले चोरी भी हो चुकी है। यहीं कारण है कि मरीज झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज कराने को मजबूर हैं।
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एक फार्मासिस्ट के भरोसे 20 गांव के लोग
उघैती। ग्रामीणों का कहना है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के भरोसे 20 गांव लोग हैं। बावजूद इसके सुविधाओं को किनारा किया हुआ है। मरीज दिन-भर भटकते रहते हैं। इससे जनता में रोष व्याप्त है।
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वर्ष 1988 में कस्बा उघैती में नवीन पीएचसी की स्थापना हुई तो लोगों ने राहत की सांस ली। उन्हें उम्मीद थी कि अब बेहतर इलाज मिल सकेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। 20 वर्षों तक निजी भवन में संचालित किए जाने के बाद इसे वर्ष 2009 में बने नवीन भवन में शिफ्ट कर दिया गया। लेकिन स्वास्थ्य विभाग अनदेखी बनी रही। आज तक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से लेकर नर्स, पैथॉलाजी स्टाफ, चिकित्सकों को उपलब्धता नहीं कराई गई। ग्रामीणों की माने तो यहां पहले चोरी भी हो चुकी है। यहीं कारण है कि मरीज झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज कराने को मजबूर हैं।
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एक फार्मासिस्ट के भरोसे 20 गांव के लोग
उघैती। ग्रामीणों का कहना है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के भरोसे 20 गांव लोग हैं। बावजूद इसके सुविधाओं को किनारा किया हुआ है। मरीज दिन-भर भटकते रहते हैं। इससे जनता में रोष व्याप्त है।
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