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दो डॉक्टरों के जिम्मे इलाज का दारोमदार

Sat, 20 Jun 2015 07:07 PM IST
Ujani
Ujani Updated Sat, 20 Jun 2015 07:07 PM IST
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प्रथम संदर्भन इकाई की सुविधा वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इन दिनों डॉक्टरों की किल्लत से जूझ रहा है। तैनाती छह डॉक्टरों की है लेकिन बाल रोग विशेषज्ञ तो करीब एक साल और सर्जन विकास मिश्रा ने भी पांच-छह माह से अस्पताल की ओर रुख नहीं किया। चिकित्साधीक्षक के भी कम आने से सारा दारोमदार दो डॉक्टरों पर आ गया है।

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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर डॉक्टरों की किल्लत करीब एक साल से बनी हुई है। शुरूआत बाल रोग एके अवस्थी के करीब एक साल पहले अचानक चले जाने की वजह से हुई। अवस्थी ने वीआरएस को आवेदन किया था। वीआरएस मंजूर हुआ है या नहीं, इसे लेकर स्थानीय स्तर पर अभी भी पसोपेश बरकरार है। सूत्रों की मानें तो सर्जन विकास मिश्रा ने करीब छह महीना पहले उसी दिन अस्पताल नहीं लौटने का मन बना लिया था जब चिकित्साधीक्षक पद पर तैनाती का आदेश प्राप्त हो जाने के बाद भी उन्हें कार्यभार ग्रहण नहीं कराया गया था। मामला कोर्ट में भी पहुंचा लेकिन सब कुछ आपस में ही निपट गया।
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इस वक्त डॉ. निरंजन सिंह और डॉ. राजकुमार गंगवार पर मरीजों के इलाज की जिम्मेदारी है लेकिन दोनों से किसी एक को रोजाना इमरजेंसी ड्यूटी और पुलिस केस के मेडिकल का भी कामकाज निपटाना पड़ता है। चिकित्साधीक्षक विश्वास कुमार के पिता का करीब तीन माह पूर्व निधन हो गया था। उसी वक्त से वह नियमित अस्पताल नहीं आ पाते। डॉ. वीरेश कुमार भी सीनियर की गैरहाजिरी का फायदा उठाने से क्यों चूकें। उन्होंने भी अब कभी-कभार आना शुरू कर दिया है। बता दें कि सीएचसी पर रोजाना दो-ढाई की संख्या में नए मरीजों के पर्चे बनते हैं। एक-दो डॉक्टर तो इलाज के नाम पर महज औपचारिकता ही निभा सकते हैं।
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सीएचसी का एक दिन रहा डेंटल के नाम
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर डॉक्टरों की किल्लत का अंदाजा इस बात से भी लगा सकते हैं कि पिछले दिनों निरंजन सिंह और राजकुमार गंगवार घरेलू कारणों से अवकाश पर गए तो कोई और डॉक्टर अस्पताल नहीं पहुंचा। डेंटल कार्तिकेय वर्मा को ही प्रत्येक बीमारी के रोगियों के पर्चों पर पुरानी दवाएं दोहरा कर काम चलाना पड़ा था।

वर्जन
जिले में पहले से ही डाक्टर्स की कमी चल रही है। इस संबंध में शासन को लिखा जा चुका है। मौजूदा संसाधनों में कैसे बेहतर सेवाएं मिलें, इस पर जोर दिया जा रहा है। उझानी में जो समस्याएं हैं, उनको दूर कराया जाएगा।
डॉ. नरेंद्र कुमार, प्रभारी सीएमओ

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