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पुलिस का दावा, युवा जागे तो सुधर जाएगी यातायात व्यवस्था
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आंबेडकर पार्क के नजदीक युवकों को यातायात नियम बताते यातायात प्रभारी अब्दुल सत्तार खां। संवाद
- फोटो : BADAUN
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बदायूं। यातायात पुलिस यातायात माह के तहत जिले के स्कूलों और शहर के तिराहों-चौराहों पर जाकर नौजवानों को यातायात के नियम समझा रही है। पुलिस का मानना है कि नौजवान अगर पहल करें और यातायात नियमों को अपनाएं तो व्यवस्था सुधरने में समय नहीं लगेगा। उन्हें देखकर अन्य लोग भी यातायात नियम अपनाएंगे।
जिले में अधिकतर लोग हेलमेट और सीट बेल्ट का प्रयोग नहीं करते हैं। लंबे समय से लोग इसी ढर्रे पर चले आ रहे हैं। हालांकि पुलिस विभाग हर साल यातायात माह मनाता आ रहा है। इसमें यातायात नियमों के तहत जानकारियां दी जाती हैं। पिछले समय में ट्रांसफर हो चुके तमाम अधिकारियों ने अभियान चलाकर सीट बेल्ट और हेलमेट चेकिंग कराई है। तत्कालीन एसएसपी अशोक कुमार शर्मा ने जिले भर में यह अभियान चलाया था। यहां तक कि बाइक सवार लोगों को मुफ्त में हेलमेट बंटवाए थे। उस दौरान हेलमेट और सीट बेल्ट लगाने वालों का आंकड़ा करीब 50 प्रतिशत से ज्यादा पहुंच गया था। उनके कार्यकाल में पुलिस कर्मियों तक के चालान किए गए। कुछ पुलिस कर्मियों के उन्होंने स्वयं चेकिंग के दौरान चालान कराए। इससे जिले की जनता में पुलिस का भय हो गया। लोग सीट बेल्ट और हेलमेट लगाने लगे लेकिन इस समय हेलमेट और सीट बेल्ट लगाने वालों का आंकड़ा 10 प्रतिशत भी नहीं है।
इन अव्यवस्थाओं को देखते हुए यातायात प्रभारी अब्दुल सत्तार खां ने एक पहल शुरू की है। वह स्कूल कॉलेजों, तिराहों-चौराहों पर जाकर खासकर युवाओं को जागरूक कर रहे हैं। उनका कहना है कि युवा ही देश का भविष्य हैं। अगर युवा जागरूक होंगे तो अव्यवस्थाएं अपने आप सुधरती चली जाएंगी। युवा वर्ग दूसरे लोगों को जाकर जागरूक करेगा तो अन्य लोग भी यातायात नियम अपनाएंगे।
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मजबूरी बताना बंद करें, अपनाएं नियम
रविवार दोपहर यातायात प्रभारी अब्दुल सत्तार खां आंबेडकर पार्क के नजदीक वाहनों की चेकिंग कर रहे थे। इस दौरान एक बाइक पर तीन सवारी आती दिखीं। उनके पास हेलमेट था लेकिन उन्होंने उसे बाइक में लटका रखा था। यातायात प्रभारी ने उन्हें रोक लिया। बाइक सवार लोगों ने समझा कि उनका चालान जरूर हो जाएगा तो उन्होंने अपनी मजूबरी बताना शुरू कर दी। बोले हमारे एक व्यक्ति को डेंगू हो गया है। वह उसे दवा दिलाने जा रहे हैं। यातायात प्रभारी ने कहा कि मजबूरी बताना बंद करें। कम से कम हेलमेट तो लगाएं। संवाद
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जिले में अधिकतर लोग हेलमेट और सीट बेल्ट का प्रयोग नहीं करते हैं। लंबे समय से लोग इसी ढर्रे पर चले आ रहे हैं। हालांकि पुलिस विभाग हर साल यातायात माह मनाता आ रहा है। इसमें यातायात नियमों के तहत जानकारियां दी जाती हैं। पिछले समय में ट्रांसफर हो चुके तमाम अधिकारियों ने अभियान चलाकर सीट बेल्ट और हेलमेट चेकिंग कराई है। तत्कालीन एसएसपी अशोक कुमार शर्मा ने जिले भर में यह अभियान चलाया था। यहां तक कि बाइक सवार लोगों को मुफ्त में हेलमेट बंटवाए थे। उस दौरान हेलमेट और सीट बेल्ट लगाने वालों का आंकड़ा करीब 50 प्रतिशत से ज्यादा पहुंच गया था। उनके कार्यकाल में पुलिस कर्मियों तक के चालान किए गए। कुछ पुलिस कर्मियों के उन्होंने स्वयं चेकिंग के दौरान चालान कराए। इससे जिले की जनता में पुलिस का भय हो गया। लोग सीट बेल्ट और हेलमेट लगाने लगे लेकिन इस समय हेलमेट और सीट बेल्ट लगाने वालों का आंकड़ा 10 प्रतिशत भी नहीं है।
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इन अव्यवस्थाओं को देखते हुए यातायात प्रभारी अब्दुल सत्तार खां ने एक पहल शुरू की है। वह स्कूल कॉलेजों, तिराहों-चौराहों पर जाकर खासकर युवाओं को जागरूक कर रहे हैं। उनका कहना है कि युवा ही देश का भविष्य हैं। अगर युवा जागरूक होंगे तो अव्यवस्थाएं अपने आप सुधरती चली जाएंगी। युवा वर्ग दूसरे लोगों को जाकर जागरूक करेगा तो अन्य लोग भी यातायात नियम अपनाएंगे।
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मजबूरी बताना बंद करें, अपनाएं नियम
रविवार दोपहर यातायात प्रभारी अब्दुल सत्तार खां आंबेडकर पार्क के नजदीक वाहनों की चेकिंग कर रहे थे। इस दौरान एक बाइक पर तीन सवारी आती दिखीं। उनके पास हेलमेट था लेकिन उन्होंने उसे बाइक में लटका रखा था। यातायात प्रभारी ने उन्हें रोक लिया। बाइक सवार लोगों ने समझा कि उनका चालान जरूर हो जाएगा तो उन्होंने अपनी मजूबरी बताना शुरू कर दी। बोले हमारे एक व्यक्ति को डेंगू हो गया है। वह उसे दवा दिलाने जा रहे हैं। यातायात प्रभारी ने कहा कि मजबूरी बताना बंद करें। कम से कम हेलमेट तो लगाएं। संवाद