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राजनीतिक लाभ पाने को थोप रहे तीन तलाक विरोधी कानून: डॉ. उस्मानी

Sun, 17 Dec 2017 12:32 AM IST
बदायूं।
बदायूं। Updated Sun, 17 Dec 2017 12:32 AM IST
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Three anti-divorce legislation imposing political gains: Dr. Usmani
पर्सनल लॉ बोर्ड के कार्यकारी सदस्य डॉ यासीन अली उस्मानी। - फोटो : अमर उजाला
राजनीतिक लाभ पाने को थोप रहे तीन तलाक विरोधी कानून: डॉ. उस्मानी
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एकतरफा फैसला लेने से पहले नहीं लिया मुस्लिम समाज को विश्वास में 
आज दिल्ली में होगी पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक 
संजय श्रीवास्तव

बदायूं। भाजपा सरकार को मुस्लिम समाज की महिलाओं का हित नहीं, बल्कि अपना राजनीतिक लाभ दिख रहा है। इसलिए पूरे समाज को दरकिनार कर सरकार ने तीन तलाक पर नए कानून का बिल पास कर दिया। यह एकतरफा और मुस्लिम समाज पर थोपने वाला फैसला है। मोदी सरकार यदि मुस्लिम महिलाओं की हितैषी है तो उनकी बेहतरी के लिए शिक्षा और आर्थिक सुधार पर काम करती। यह कहना है ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के कार्यकारी सदस्य डॉ. यासीन अली उस्मानी का। उन्होंने बताया कि तीन तलाक के मुद्दे पर रविवार को दिल्ली में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की अहम बैठक होगी।
डॉ. यासीन ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में कहा कि भाजपा 2019 के चुनाव में राजनीतिक लाभ पाने के लिए तीन तलाक विरोधी बिल लेकर आई है। हकीकत यह है कि एक बार में तीन तलाक यानी तलाक-ए-बिद्दत के बारे में ज्यादातर लोगों को जानकारी ही नहीं है। उन्होंने कहा कि तीन तलाक और हलाला जायज है, लेकिन यह अल्लाह को नापसंद है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, धर्मगुरु और मुस्लिम संगठन तलाक-ए-बिद्दत के खिलाफ हैं। इसमें सुधार को विचार भी कर रहे हैं।
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इतना बड़ा फैसला करने से पहले मोदी सरकार ने मुस्लिम कम्युनिटी के लोगों से बात करना चाहिए। इससे साफ है कि सरकार ने संविधान में दिए गए अधिकारों की अनदेखी की है। निश्चित तौर पर सरकार ने देश में रहने वाले करोड़ों मुस्लिमों के साथ विश्वासघात किया है। एक सवाल के जबाव में डॉ. उस्मानी ने कहा कि देश में तीन तलाक के मामले दो-ढाई फीसदी तक सामने आए हैं। 
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डॉ. उस्मानी ने कहा कि सरकार सिर्फ इस कम्युनिटी को दबाने का काम कर रही है। देश के अंदर मुस्लिम दलितों से भी ज्यादा कमजोर है। सरकार वास्तव में मुस्लिमों की हितैषी होती तो सच्चर कमेटी को लागू करती। सच्चर कमेटी में मुस्लिमों के आर्थिक, सामाजिक और शैक्षिक स्तर को ऊंचा उठाने की सिफारिश की गई है। मगर इस पर कभी चर्चा तक नहीं की गई। 
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