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Budaun News: तीन आरोपी दोषमुक्त किए, झूठे साक्ष्य देने पर मृतका के मां-बाप व भाई पर दर्ज होगा वाद

Fri, 17 Jul 2026 01:44 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 17 Jul 2026 01:44 AM IST
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Three accused acquitted; case to be registered against the deceased's parents and brother for giving false evidence.
बदायूंं। अपर सत्र न्यायाधीश ऋषि कुमार की कोर्ट ने महिला की मौत होने के मामले में आत्महत्या के लिए उकसाने और उत्पीड़न करने के केस में सुनवाई करते हुए मृतका के पति वीरेंद्र, सास विद्या और देवर भूरे को दोषमुक्त कर दिया है। कोर्ट ने जानबूझकर झूठे साक्ष्य देने के आरोप में मृतका के मां-बाप और भाई के विरुद्ध वाद दर्ज कर सम्मन जारी करने का आदेश दिया है।
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थाना बिल्सी के ग्राम सिरसौल पट्टी सीताराम निवासी विचित्र पाल पुत्र मोहन लाल ने 26 नवंबर 2024 को थाना उझानी में दर्ज कराई रिपोर्ट में कहा था कि 12 वर्ष पहले पुत्री रिंकी का विवाह वीरेंद्र पुत्र वीरशाह निवासी ग्राम रनऊ, थाना उझानी के साथ किया था। शादी के कई वर्ष बाद भी रिंकी के कोई संतान नहीं हुई, जिसके कारण ससुराली उसके साथ मारपीट और विभिन्न तरह से उत्पीड़न किया करते थे।
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24 नवंबर 2024 की रात 8 बजे रिंकी ने पिता विचित्र पाल को फोन कर बताया था कि उसका पति वीरेंद्र, सास, देवर उसके साथ मारपीट कर रहे हैं। रात्रि में उसकी हत्या भी कर सकते हैं। 25 नवंबर की सुबह 6:30 बजे उसके पुत्र गौतम के मोबाइल पर वीरेंद्र ने फोन कर सूचना दी कि रिंकी की मौत हो गई है।
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सूचना पर वह रिंकी की ससुराल पहुंचे तो वहां पर कोई नहीं मिला। मालूम हुआ कि रिंकी को बदायूं में जिला अस्पताल लेकर गए हैं। वह अस्पताल पहुंचे तो वहां रिंकी का शव मिला। रिपोर्ट में कहा गया था कि आरोपियों के उत्पीड़न से परेशान होकर रिंकी आत्महत्या करने के लिए विवश हो गई।
पुलिस ने रिंकी के पति वीरेंद्र सहित अन्य के विरुद्ध आत्महत्या के लिए उकसाने सहित अन्य आरोपों में रिपोर्ट दर्ज कर ली थी। पुलिस ने विवेचना कर कोर्ट में आरोपपत्र दाखिल किया। आरोपपत्र के मुताबिक, रिंकी के पिता विचित्र पाल, मां शांति देवी और भाई गौतम ने अपने बयान में कहा था कि रिंकी की मौत की सूचना मिलने पर जब वह ससुराल पहुंचे तो वहां रिंकी को मृत अवस्था में देखा। रिंकी के पति वीरेंद्र सहित अन्य ससुराली वहां उपस्थित मिले। इन लोगों ने बताया कि रिंकी ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी। रिंकी को कोई संतान नहीं थी। इस कारण वह मानसिक रूप से अवसाद में रहती थी।
रिंकी की मृत्यु या फांसी लगाने की घटना में ससुराल पक्ष का कोई हाथ नहीं था। रिश्तेदारों और ग्रामीणों के कहने पर रिंकी के पति वीरेंद्र और अन्य ससुराल वालों पर रिपोर्ट दर्ज करा दी थी। रिंकी ने कभी यह नहीं बताया था कि ससुराल वाले दहेज मांगते थे। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुना।
कोर्ट ने कहा कि साक्षियों ने पूर्व बयान से भिन्न एवं अभियोजन के प्रतिकूल साक्ष्य दिए हैं। इससे यह प्रतीत होता है कि साक्षियों ने जानबूझकर झूठे साक्ष्य दिए। इस पर कोर्ट ने आरोपी वीरेंद्र, विद्या और भूरे को दोषमुक्त कर दिया। साथ ही कोर्ट ने वादी मुकदमा रिंकी के पिता विचित्र पाल, मां शांति देवी और भाई गौतम के विरुद्ध भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 379 के अंतर्गत अलग से वाद दर्ज करने और साक्षीगणों के विरुद्ध हाजिरी के लिए सम्मन जारी करने का आदेश दिया। कोर्ट ने अलग की गई पत्रावली को 29 जुलाई को पेश करने का भी आदेश दिया है।


नाबालिग को ले जाने के केस में मामा



को 20 वर्ष की कैद, 50 हजार जुर्माना



- अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो कोर्ट) ने सुनाई सजा



संवाद न्यूज एजेंसी



बदायूं। अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो कोर्ट) नीरज कुमार गर्ग की कोर्ट ने नाबालिग सगी भांजी को बहलाकर ले जाने के मामले में सुनवाई कर आरोपी आकाश को दोषी करार दिया। कोर्ट ने दोषी को बीस वर्ष की सजा सुनाने के साथ 50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा भी सुनाई।



थाना कुंवरगाव में दर्ज कराई रिपोर्ट में एक व्यक्ति ने कहा था कि 26 अक्टूबर 2024 की रात उसकी 16 वर्षीय पुत्री घर में सो रही थी। जब सुबह उठे तो पुत्री नहीं मिली। मालूम हुआ कि अज्ञात व्यक्ति उसे अपने साथ ले गया है। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की और आकाश कुमार के विरुद्ध विभिन्न धाराओं में आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया।




कोर्ट ने केस की सुनवाई करते हुए दोनों पक्षों को सुना। पत्रावलियों का अवलोकन कर गवाहों को सुना। कोर्ट ने माना है कि आरोपी का अपराध गंभीर प्रवृत्ति का है। आरोपी अपनी सगी भांजी को बदनीयती से ले गया था। कोर्ट ने दोषसिद्ध होने पर आरोपी को विभिन्न धाराओं में सजा सुनाई। कोर्ट ने आदेश में कहा है कि अर्थदंड अदा न करने पर अभियुक्त को 4 वर्ष का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। आरोपित अर्थदंड की पूर्ण धनराशि पीड़िता को बतौर क्षतिपूर्ति अदा की जाएगी।
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