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Budaun News: घाट पर नहीं थे सुरक्षा के इंतजाम, डेढ़ घंटे बाद पहुंचे गोताखोर

Sun, 30 Apr 2023 01:16 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं Updated Sun, 30 Apr 2023 01:16 AM IST
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There were no security arrangements at the ghat, divers arrived after one and a half hours
29बीडीएन04-घटना स्थल पर जुटी लोगों की भीड़।संवाद
बदायूं। शनिवार को जिस जगह हादसा हुआ, वहां रामगंगा घाट पर सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं थे। घाट पर न तो खतरे का निशान लगा था और न ही वहां कोई गोताखोर था। इस घाट पर उस क्षेत्र के लोग अंत्येष्टि करने आते हैं और बड़ी संख्या में यहां लोग स्नान पर्व पर डुबकी लगाते हैं।
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हादसे के बाद नदी में मछली पकड़ रहे मछुआरे ही बिना संसाधन उनको बचाने का प्रयास करते रहे, लेकिन उनका प्रयास सफल नहीं हुआ। एसडीएम धर्मेंद्र कुमार जब दातागंज से वहां पहुंचे तो गोताखोर बुलाए गए थे। लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। गोताखोर पहुंचे तब जाकर तीनों को बाहर निकाला गया, इस दौरान सोहित की सांसें थम चुकी थीं, लेकिन उसके भाई भूपेंद्र और रोहित में सांस थी। इसी उम्मीद के साथ उनको एंबुलेंस से म्याऊं पीएचसी भेजा गया, मगर रास्ते में ही उन दोनों की भी सांसें थम गईं। तीनों सगे भाई जब नदी में डूब रहे थे तो उनसे कुछ ही दूरी पर स्नान कर रहा उनका तहेरा भाई भोले भी उनको बचाने के लिए पहुंचा। उनको बचाने के प्रयास में वह भी डूबने लगा, पर उसको समय रहते लोगों ने बचा लिया। भोलू ने बताया कि उसकी मां की अंत्येष्टि थी, इसलिए उसके चचेरे भाई भी इसमें शामिल होने आए थे।
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जहां डूबे वहां से 500 मीटर दूर मिले थे तीनों
ताई की अंत्येष्टि के बाद तीनों सगे भाई रामगंगा नदी में स्नान करने गए तो वह आगे बढ़ते चले गए। इस दौरान वह पिलर के नीचे एक गहरे गड्ढे में चले गए। एक-दूसरे को बचाने के चक्कर में तीनों ही उस गड्ढे में डूब गए। उनके साथ परिवार और गांव के अन्य लोग भी स्नान करने गए थे। वह लोग घाट के करीब ही स्नान कर रहे थे, तीनों भाइयों ने डूबते हुए शोर मचाया तो वह लोग वहां तक पहुंच गए। मगर, वहां पानी ज्यादा होने की वजह से वह उन्हें नहीं बचा पाए। गोताखोरों ने जब उनकी तलाश की तो वहां से पांच सौ मीटर दूर तीनों मिले थे।
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रात को चलाते थे, ई-रिक्शा दिन में करते थे पढ़ाई
रोहित और भूपेंद्र दोनों दिल्ली में रहते थे। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी न होने की वजह से वह बीच में ही पढ़ाई छोड़कर दिल्ली चले गए थे। दिल्ली जाकर दोनों भाइयों ने वहीं के सरकारी स्कूल में एडमिशन ले लिया था। भूपेंद्र दसवीं और रोहित नौवीं कक्षा में था। दोनों भाई रात को ई-रिक्शा चलाकर अपनी पढ़ाई के खर्च के अलावा परिवार के लिए भी खर्चा भेजते थे। दिन में वह स्कूल जाते थे। दोनों का पढ़ लिखकर कामयाब होने का सपना था।

तीन बेटों की मौत होने से टूट गया परिवार
दातागंज। दिनेश के चार बेटों में अब आठ वर्षीय पुत्र कुश बचा है। एक पुत्री वैश्नवी महज छह साल की है। उसके हंसते-खेलते परिवार पर न जाने किसकी नजर लगी कि अब परिवार पूरी तरह से टूट गया। तीनों बड़े बेटों की मौत के बाद सभी का रो-रोकर बुरा हाल है। रोहित और भूपेंद्र दिल्ली में रहकर अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे रहे थे। आठ दिन पहले पड़ोसी गांव चंगासी में मेला लगा था। दोनों भाई मेला देखने के लिए घर आए थे। यहां आने के बाद पता चला कि उनकी ताई बीमार है और उनकी हालत काफी गंभीर है, इस वजह से वह दोनों यहां रुक गए। किसी को क्या पता था कि ताई के साथ-साथ वह भी इस दुनिया से विदा हो जाएंगे। संवाद


खनन माफिया नदी में बना रहे मौत के कुंड
रामगंगा में जगह-जगह कई बड़े गड्ढे बन चुके हैं। यहां खनन कराने वाले माफिया मौत के कुंड खोद चुके हैं। नदी में लंबे समय से चल रहे अवैध खनन की वजह से लोगों के डूबने की घटनाएं यहां सामने आती रही हैं। इसके बाद भी प्रशासनिक अमला इस दिशा में कार्रवाई नहीं कर रहा है।

29बीडीएन04-घटना स्थल पर जुटी लोगों की भीड़।संवाद

29बीडीएन04-घटना स्थल पर जुटी लोगों की भीड़।संवाद

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