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Budaun News: रामलहर मे थे सबसे अधिक 13 उम्मीदवार, जीते थे स्वामी चिन्मयानंद
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बदायूं। बदायूं लोकसभा क्षेत्र में 1991 में राम लहर के वक्त सबसे ज्यादा 13 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे पर सबसे कम तीन-तीन उम्मीदवार 2019, 1977, 1957 और 1952 में रहे। दो उम्मीदवार कभी नहीं रहे।
लोकसभा अब तक 17 बार चुनाव हुए कुल 116 लोगों ने किस्मत आजमाई पर दस लोग ही सांसद बन सके क्योंकि पांच बार अकेले सलीम इकबाल शेरवानी ही सांसद चुने गए। बदायूं लोकसभा क्षेत्र में अगर सबसे ज्यादा बार चुनाव जीतने का रिकार्ड देखा जाए तो सलीम इकबाल शेरवानी का नाम है। दूसरा स्थान तीन बार जीते ओंकार सिंह का है। तीसरे स्थान पर लगातार दो बार चुनाव जीते सपा धर्मेंद्र चुनाव हैं। अन्य भी नेता बदायूं से दोबारा नहीं जीत सका।दिग्गज नेताओं में बदन सिंह, रघुवीर सहाय, करण सिंह यादव, मोहम्मद असरार अहमद, शरद यादव, स्वामी चिन्मयानंद व संघमित्रा मौर्य एक-एक बार सांसद रहे। संघ मित्रा मौजूदा सांसद हैं। दोबारा उन्हें भाजपा चुनाव मैदान में उतारेगी या नहीं? अभी स्थिति साफ नहीं है।
कब कितने रहे उम्मीदवार
2019-03
2014-05
2009-06
2004-07
1999-09
1998-08
1996-12
1991-13
1989-09
1984-11
1980-05
1977-03
1971-07
1967-07
1962-05
1957-03
1952- 03
थे कभी आमने-सामने फिर लड़े साथ साथ
कहानी शरद यादव और भगवान सिंह शाक्य
बात 1984 के लोकसभा चुनाव की करें तो केंद्रीय मंत्री रहे शरद यादव और उत्तर सरकार में मंत्री रहे भगवान सिंह शाक्य आममे-सामने थे। भगवान सिंह शाक्य भाजपा और शरद यादव लोकदल से चुनाव लड़े थे पर दोनों दिग्गज चुनाव हार गए थे। सलीम शेरवानी कांग्रेस से जीत गए। हार से सबक लेकर दोनों ने मिलकर लड़ने का फैसला लिया। भगवान सिंह शाक्य भाजपा छोड़कर जनता दल में आ गए। शरद यादव जनता दल में ही थे। बदायूं लोकसभा सीट से 1989 के चुनाव में मिलकर लड़े तो शरद यादव जनता दल से जीत गए और लोकसभा चुनाव के तीन महीने बाद विधानसभा चुनाव हुए तब भगवान सिंह शाक्य उसैहत से विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीते। ब्यूरो
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लोकसभा अब तक 17 बार चुनाव हुए कुल 116 लोगों ने किस्मत आजमाई पर दस लोग ही सांसद बन सके क्योंकि पांच बार अकेले सलीम इकबाल शेरवानी ही सांसद चुने गए। बदायूं लोकसभा क्षेत्र में अगर सबसे ज्यादा बार चुनाव जीतने का रिकार्ड देखा जाए तो सलीम इकबाल शेरवानी का नाम है। दूसरा स्थान तीन बार जीते ओंकार सिंह का है। तीसरे स्थान पर लगातार दो बार चुनाव जीते सपा धर्मेंद्र चुनाव हैं। अन्य भी नेता बदायूं से दोबारा नहीं जीत सका।दिग्गज नेताओं में बदन सिंह, रघुवीर सहाय, करण सिंह यादव, मोहम्मद असरार अहमद, शरद यादव, स्वामी चिन्मयानंद व संघमित्रा मौर्य एक-एक बार सांसद रहे। संघ मित्रा मौजूदा सांसद हैं। दोबारा उन्हें भाजपा चुनाव मैदान में उतारेगी या नहीं? अभी स्थिति साफ नहीं है।
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कब कितने रहे उम्मीदवार
2019-03
2014-05
2009-06
2004-07
1999-09
1998-08
1996-12
1991-13
1989-09
1984-11
1980-05
1977-03
1971-07
1967-07
1962-05
1957-03
1952- 03
थे कभी आमने-सामने फिर लड़े साथ साथ
कहानी शरद यादव और भगवान सिंह शाक्य
बात 1984 के लोकसभा चुनाव की करें तो केंद्रीय मंत्री रहे शरद यादव और उत्तर सरकार में मंत्री रहे भगवान सिंह शाक्य आममे-सामने थे। भगवान सिंह शाक्य भाजपा और शरद यादव लोकदल से चुनाव लड़े थे पर दोनों दिग्गज चुनाव हार गए थे। सलीम शेरवानी कांग्रेस से जीत गए। हार से सबक लेकर दोनों ने मिलकर लड़ने का फैसला लिया। भगवान सिंह शाक्य भाजपा छोड़कर जनता दल में आ गए। शरद यादव जनता दल में ही थे। बदायूं लोकसभा सीट से 1989 के चुनाव में मिलकर लड़े तो शरद यादव जनता दल से जीत गए और लोकसभा चुनाव के तीन महीने बाद विधानसभा चुनाव हुए तब भगवान सिंह शाक्य उसैहत से विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीते। ब्यूरो
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