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Budaun News: गंगा में मौत का भंवर है... नहीं लगाया संकेतक और बैरिकेडिंग

Tue, 20 May 2025 12:45 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 20 May 2025 12:45 AM IST
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There is a whirlpool of death in the Ganges... No signs and barricades were installed
उझानी। कछला गंगाघाट पर श्रद्धालुओं की जान का जोखिम कम नहीं हो रही है। सोमवार को राजस्थान के भरतपुर से आए श्रद्धालु मुक्तिधाम के पास बह गए। कुछ दिन पहले तक यह सुरक्षित घाट माना जाता था। लेकिन अब वहां पर एक भंवर है। उस भंवर के आसपास प्रशासन ने न तो संकेतक लगाए और न ही बैरिकेडिंग कराई है।
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गंगाघाट पर सबसे खतरनाक प्वाइंट रेलवे पुल की पश्चिमी दिशा में करीब चार-पांच सौ मीटर की दूरी पर हैं। वहीं पर डेढ़ महीने के बीच तीन- चार हादसे हो चुके हैं। बुद्ध पूर्णिमा से पहले डीएम और एसएसपी को नाविकों ने इसकी जानकारी दी। तब पुल के पिलर में चेतावनी लिखवा दी गई थी, लेकिन गंगा में कासगंज की तरफ वाले घाट मुक्तिधाम अब खतरनाक हो गया है।
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गंगा किनारे के दुकानदारों ने बताया कि मुक्तिधाम के पास पांच-छह दिनों से भंवर नजर आ रही है। उसके आसपास न तो कोई संकेतक लगा है और न ही नगर पंचायत व राजस्व विभाग की ओर से बैरिकेडिंग कराई गई है। राजस्थान के श्रद्धालुओं को उसके खतरे का अहसास हुआ। अगर कोई संकेतक या बैरिकेडिंग होती तो वह उधर नहीं जाते।
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पहले भी डूब चुके कई लोग
डेढ़ महीने में यहां पर डूबने की चार घटनाएं हुईं। पांच अप्रैल को मथुरा के छटीकरा निवासी मयंक (17) पुत्र इंद्रभन शर्मा, आठ अप्रैल को राजस्थान के धौलपुर जिले के बहेड़िया गांव निवासी रमेश (12) पुत्र महेश, करन (23) पुत्र दिनेश डूब गए थे। 12 मई को हाथरस जिले में मुरसान क्षेत्र के गांव नगला अन्नी निवासी विनय (24) पुत्र चंद्रवीर और सौरभ (28) पुत्र राजू की डूबने से मौत हो चुकी है। 27 अप्रैल को गंगा स्नान के दौरान राजस्थान में धौलपुर निवासी भूरे शर्मा की नौ वर्षीय पुत्री परी लापता हो गई थी। उसका अब तक पता नहीं लगा है।

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एसडीएम और सीओ ने नाविकों से समझे खतरनाक प्वाइंट
कछला घाट पर हादसे के बाद एसडीएम मोहित और सीओ शक्ति सिंह ने नाविकों और गोताखोरों से घाट के खतरनाक प्वाइंट की जानकारी की। नाविकों ने उन्हें बताया कि गंगा में जहां पर गहरा गड्ढा होता है, उसके पास भंवर बन जाता है। भंवर में फंस जाने पर तैराक को भी सुरक्षित बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। इसकी असल वजह यह है कि भंवर में पानी घुमावदार होता है। उसके नीचे गड्ढा गहरा हो जाता है।
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