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Budaun News: जीएसटी पंजीकरण में हो रहा खेल, जिसके नाम फर्म उसे पता ही नहीं
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बदायूं। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के नाम पर जिले में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आ रहा है। व्यापारिक पंजीकरण के नाम पर कुछ असामाजिक तत्व ऐसे लोगों के नाम पर फर्में रजिस्टर कर रहे हैं, जिन्हें खुद इस बात की जानकारी तक नहीं होती। इन फर्जी रजिस्ट्रेशन के जरिये लाखों का कारोबार और टैक्स इनपुट का खेल चल रहा है। जिले में बीते आठ साल में ऐसे आठ मामले सामने आ चुके हैं।
ताजा मामला बुधवार को सामने आया, जब उसावां ब्लॉक के अभिगांव निवासी लेबर ठेकेदारी करने वाले सुमित कुमार ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से शिकायत की कि उसके नाम पर दिल्ली में जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराया गया है, जबकि उसने कभी किसी फर्म का पंजीकरण नहीं कराया है। युवक को यह बात तब पता चली जब उसे विभागीय ई-मेल व नोटिस मिला।
आठ साल में आठ मामले, पर अब भी नहीं टूटा नेटवर्क
जानकारी के अनुसार, पिछले आठ वर्षों में जिले से जुड़े ऐसे आठ से अधिक मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जीएसटी रजिस्ट्रेशन कर कारोबार किया गया। इन मामलों में कुछ ने पुलिस में तहरीर दी तो कुछ ने सीधे जीएसटी विभाग में जाकर शिकायत की। विभागीय सूत्रों का कहना है कि यह फर्जीवाड़ा बड़े स्तर पर कुछ संगठित नेटवर्क द्वारा किया जा रहा है, जो पहचान पत्र, पैन कार्ड, बैंक पासबुक की स्कैन कॉपी लेकर अनजान व्यक्तियों के नाम पर जीएसटी पोर्टल पर पंजीकरण करा ले रहे हैं।
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कर चोरी और इनपुट टैक्स क्रेडिट का खेल
आरोप है कि इन फर्जी फर्मों का इस्तेमाल इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के फर्जी दावों और टैक्स चोरी के लिए किया जाता है। जब विभाग जांच करता है तो नाम सामने आने पर असली व्यक्ति परेशानी में पड़ जाता है। विभाग से जुड़े एक कर विशेषज्ञ के अनुसार, यह पूरा खेल जीएसटी पोर्टल की कमियों और दस्तावेज़ के सीमित सत्यापन के कारण संभव हो पा रहा है। यदि आधार व पैन लिंकिंग के साथ बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य कर दिया जाए तो ऐसे फर्जीवाड़े पर काफी हद तक रोक लग सकती है।
जिले में 15 हजार पंजीकृत व्यापारी
वर्तमान में बदायूं जिले में करीब 15 हजार व्यापारी जीएसटी प्रणाली में पंजीकृत हैं। इनमें छोटे दुकानदारों से लेकर ट्रांसपोर्ट, निर्माण और कृषि उपकरण कारोबारियों शामिल हैं।
अक्सर दूसरे प्रदेशों के फर्जी जीएसटी पंजीकरण के मामले सामने आते रहते हैं, हालांकि संख्या बेहद कम है। फिर भी जहां पंजीकरण होता है, केस का निस्तारण भी वहीं किया जाता है। कोई मामला जिले का नहीं हैं। यदि मेरे संज्ञान में कोई मामला आएगा तो उचित कार्रवाई की जाएगी। -विजय कुमार सैनी, उपायुक्त राज्यकर
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ताजा मामला बुधवार को सामने आया, जब उसावां ब्लॉक के अभिगांव निवासी लेबर ठेकेदारी करने वाले सुमित कुमार ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से शिकायत की कि उसके नाम पर दिल्ली में जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराया गया है, जबकि उसने कभी किसी फर्म का पंजीकरण नहीं कराया है। युवक को यह बात तब पता चली जब उसे विभागीय ई-मेल व नोटिस मिला।
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आठ साल में आठ मामले, पर अब भी नहीं टूटा नेटवर्क
जानकारी के अनुसार, पिछले आठ वर्षों में जिले से जुड़े ऐसे आठ से अधिक मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जीएसटी रजिस्ट्रेशन कर कारोबार किया गया। इन मामलों में कुछ ने पुलिस में तहरीर दी तो कुछ ने सीधे जीएसटी विभाग में जाकर शिकायत की। विभागीय सूत्रों का कहना है कि यह फर्जीवाड़ा बड़े स्तर पर कुछ संगठित नेटवर्क द्वारा किया जा रहा है, जो पहचान पत्र, पैन कार्ड, बैंक पासबुक की स्कैन कॉपी लेकर अनजान व्यक्तियों के नाम पर जीएसटी पोर्टल पर पंजीकरण करा ले रहे हैं।
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कर चोरी और इनपुट टैक्स क्रेडिट का खेल
आरोप है कि इन फर्जी फर्मों का इस्तेमाल इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के फर्जी दावों और टैक्स चोरी के लिए किया जाता है। जब विभाग जांच करता है तो नाम सामने आने पर असली व्यक्ति परेशानी में पड़ जाता है। विभाग से जुड़े एक कर विशेषज्ञ के अनुसार, यह पूरा खेल जीएसटी पोर्टल की कमियों और दस्तावेज़ के सीमित सत्यापन के कारण संभव हो पा रहा है। यदि आधार व पैन लिंकिंग के साथ बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य कर दिया जाए तो ऐसे फर्जीवाड़े पर काफी हद तक रोक लग सकती है।
जिले में 15 हजार पंजीकृत व्यापारी
वर्तमान में बदायूं जिले में करीब 15 हजार व्यापारी जीएसटी प्रणाली में पंजीकृत हैं। इनमें छोटे दुकानदारों से लेकर ट्रांसपोर्ट, निर्माण और कृषि उपकरण कारोबारियों शामिल हैं।
अक्सर दूसरे प्रदेशों के फर्जी जीएसटी पंजीकरण के मामले सामने आते रहते हैं, हालांकि संख्या बेहद कम है। फिर भी जहां पंजीकरण होता है, केस का निस्तारण भी वहीं किया जाता है। कोई मामला जिले का नहीं हैं। यदि मेरे संज्ञान में कोई मामला आएगा तो उचित कार्रवाई की जाएगी। -विजय कुमार सैनी, उपायुक्त राज्यकर