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शिक्षक नहीं पढ़ा पाए बच्चों को गणित, डीएम ने पढ़ाया पाठ
बदायूं, ब्यूरो
Updated Wed, 01 Mar 2017 12:03 AM IST
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शिक्षक नहीं पढ़ा पाए बच्चों को गणित, डीएम ने पढ़ाया पाठ
- फोटो : अमर उजाला
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वजीरगंज के जूनियर हाईस्कूल में किया निरीक्षण
जिलाधिकारी पवन कुमार ने मंगलवार को बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में पढ़ाई-लिखाई का हाल जाना। एडीएम प्रशासन अजय कुमार श्रीवास्तव, बीएसए के साथ वजीरगंज के पूर्व माध्यमिक विद्यालय में निरीक्षण को पहुंचे डीएम ने जब शिक्षकों से बच्चों को गणित पढ़ाने के लिए कहा तो शिक्षक सकपका गए। इस पर डीएम ने खुद ही बच्चों को गणित के सवाल पढ़ाए।
डीएम ने एक-एक बच्चे को बुलाकर उनका वर्क चेक किया। उन्होंने कहा कि इंग्लिश मीडियम स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे ही नहीं बल्कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा ग्रहण करने वाले बच्चे भी होशियार होते हैं। बच्चे का दिमाग कोरी स्लेट के समान होता है उस पर जो लिख दिया जाए वहीं नजर आता है। इसी प्रकार यदि बच्चों को गंभीरता के साथ जो सिखाया जाएगा और उसका अभ्यास कराया जाएगा तो उसको बच्चे कभी नहीं भूल सकते। डीएम ने स्कूल के शिक्षकों को शिक्षण कार्य पर विशेष ध्यान देने की हिदायत दी। कहा कि ऐसे प्रयास किए जाएं कि निजी स्कूलों के बच्चों के साथ यदि सरकारी स्कूलों के बच्चों की शैक्षिक प्रतियोगिता कराई जाए तो वह उनसे पीछे न रहें। यह सब शिक्षण कार्य पर ही निर्भर करता है। वहीं, बीएसए प्रेमचंद्र यादव ने ब्लैक बोर्ड पर बच्चों को गणित के अंतर्गत त्रिभुज की परिभाषा, प्रकार और पहचान के संबंध में बताया। विद्यालय में शिक्षक और स्थानीय चिकित्सक तथा स्वास्थ्यकर्मी राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के अवसर पर स्कूली बच्चों को एल्बेंडॉजोल की गोली खिलाई लेकिन बच्चों की कम उपस्थिति पर डीएम नाराज हुए। उन्होंने दवा वितरण के बाद भी बच्चों की कम उपस्थिति के बारे में पूछा तो शिक्षकों ने बताया कि बच्चों को एक दिन पहले दवा खिलाए जाने के संबंध में बता दिया गया था, इस कारण कुछ बच्चे इंजेक्शन लगने के डर से स्कूल में नहीं आए।
जिलाधिकारी पवन कुमार ने मंगलवार को बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में पढ़ाई-लिखाई का हाल जाना। एडीएम प्रशासन अजय कुमार श्रीवास्तव, बीएसए के साथ वजीरगंज के पूर्व माध्यमिक विद्यालय में निरीक्षण को पहुंचे डीएम ने जब शिक्षकों से बच्चों को गणित पढ़ाने के लिए कहा तो शिक्षक सकपका गए। इस पर डीएम ने खुद ही बच्चों को गणित के सवाल पढ़ाए।
डीएम ने एक-एक बच्चे को बुलाकर उनका वर्क चेक किया। उन्होंने कहा कि इंग्लिश मीडियम स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे ही नहीं बल्कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा ग्रहण करने वाले बच्चे भी होशियार होते हैं। बच्चे का दिमाग कोरी स्लेट के समान होता है उस पर जो लिख दिया जाए वहीं नजर आता है। इसी प्रकार यदि बच्चों को गंभीरता के साथ जो सिखाया जाएगा और उसका अभ्यास कराया जाएगा तो उसको बच्चे कभी नहीं भूल सकते। डीएम ने स्कूल के शिक्षकों को शिक्षण कार्य पर विशेष ध्यान देने की हिदायत दी। कहा कि ऐसे प्रयास किए जाएं कि निजी स्कूलों के बच्चों के साथ यदि सरकारी स्कूलों के बच्चों की शैक्षिक प्रतियोगिता कराई जाए तो वह उनसे पीछे न रहें। यह सब शिक्षण कार्य पर ही निर्भर करता है। वहीं, बीएसए प्रेमचंद्र यादव ने ब्लैक बोर्ड पर बच्चों को गणित के अंतर्गत त्रिभुज की परिभाषा, प्रकार और पहचान के संबंध में बताया। विद्यालय में शिक्षक और स्थानीय चिकित्सक तथा स्वास्थ्यकर्मी राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के अवसर पर स्कूली बच्चों को एल्बेंडॉजोल की गोली खिलाई लेकिन बच्चों की कम उपस्थिति पर डीएम नाराज हुए। उन्होंने दवा वितरण के बाद भी बच्चों की कम उपस्थिति के बारे में पूछा तो शिक्षकों ने बताया कि बच्चों को एक दिन पहले दवा खिलाए जाने के संबंध में बता दिया गया था, इस कारण कुछ बच्चे इंजेक्शन लगने के डर से स्कूल में नहीं आए।
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