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आपसी सुलह से सुलझेगा ‘रिश्तों का मांझा’
अमर उजाला ब्यूरो, बदायूं
Updated Thu, 03 Dec 2015 06:44 PM IST
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12 दिसंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत में होगी समझौता कराकर लंबित केसों के निस्तारण की कोशिश
40 से अधिक प्रकार के केसों का सुलह से ढूंढा जाएगा समाधान
अपर जिला जज/नोडल अधिकारी राष्ट्रीय लोक अदालत वीके पांडेय के अनुसार कानूनी जटिलताओं से परे 12 दिसंबर को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत में सुलह-समझौते के योग्य फौजदारी, दीवानी, भरण पोषण, वैवाहिक, पारिवारिक, स्टांप, मोटर अधिनियम, चकबंदी, श्रम, उपभोक्ता फोरम, भूमि अधिग्रहण, वाट-माप, ऋण वसूली, किराएदारी, चेक बाउंस, उत्तराधिकार प्रमाण पत्र, बिजली चोरी, नगर पालिका से संबंधित वाद, सेवा नियुक्ति, मनोरंजन, धारा 446, अंतिम रिपोर्ट, एफआर, दांडिक अपील, धारा 258ए वन अधिनियम, पुलिस अधिनियम, दुकान एवं वाणिज्य अधिनियम, रेलवे दावा, मनरेगा प्रकरण, वीपीएल राशन कार्ड, आय प्रमाण पत्र, जनहित गारंटी, स्थानीय लोक अदालत के संबंधित वादों का राष्ट्रीय लोक अदालत में बिना किसी शुल्क के समाधान किया जाएगा। उन्होंने कहा है कि राष्ट्रीय लोक अदालत में किसी भी न्यायालय अथवा विभाग से सम्बंधित मामले को आपसी समझौते के आधार पर निस्तारण के लिए आवेदन पत्र देकर अंतिम आदेश का निर्णय प्राप्त कर सदैव के लिए लंबित प्रकारण से छुटकारा पाया जा सकता है।
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40 से अधिक प्रकार के केसों का सुलह से ढूंढा जाएगा समाधान
अपर जिला जज/नोडल अधिकारी राष्ट्रीय लोक अदालत वीके पांडेय के अनुसार कानूनी जटिलताओं से परे 12 दिसंबर को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत में सुलह-समझौते के योग्य फौजदारी, दीवानी, भरण पोषण, वैवाहिक, पारिवारिक, स्टांप, मोटर अधिनियम, चकबंदी, श्रम, उपभोक्ता फोरम, भूमि अधिग्रहण, वाट-माप, ऋण वसूली, किराएदारी, चेक बाउंस, उत्तराधिकार प्रमाण पत्र, बिजली चोरी, नगर पालिका से संबंधित वाद, सेवा नियुक्ति, मनोरंजन, धारा 446, अंतिम रिपोर्ट, एफआर, दांडिक अपील, धारा 258ए वन अधिनियम, पुलिस अधिनियम, दुकान एवं वाणिज्य अधिनियम, रेलवे दावा, मनरेगा प्रकरण, वीपीएल राशन कार्ड, आय प्रमाण पत्र, जनहित गारंटी, स्थानीय लोक अदालत के संबंधित वादों का राष्ट्रीय लोक अदालत में बिना किसी शुल्क के समाधान किया जाएगा। उन्होंने कहा है कि राष्ट्रीय लोक अदालत में किसी भी न्यायालय अथवा विभाग से सम्बंधित मामले को आपसी समझौते के आधार पर निस्तारण के लिए आवेदन पत्र देकर अंतिम आदेश का निर्णय प्राप्त कर सदैव के लिए लंबित प्रकारण से छुटकारा पाया जा सकता है।