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जिला अस्पताल में हर काम का दाम तय

Sun, 10 Dec 2017 12:07 AM IST
बदायूं।
बदायूं। Updated Sun, 10 Dec 2017 12:07 AM IST
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The cost of every work in the district hospital
doctor
जिला अस्पताल में हर काम का दाम तय
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बिना सुविधा शुल्क नहीं हो रहा कोई काम, रोज हो रहे लफड़े

बदायूं। 
जिला अस्पताल में उगाही की शिकायत कोई नई नहीं है पर अब तो स्टाफ ने हद ही पार कर दी है। कायदे का कोई भी काम यहां बिना दाम नहीं हो रहा। शनिवार को ऐसे ही दो मामले सामने आए, जिनमें उगाही के आरोप लगे। आंख का ऑपरेशन कराने आए लोगों से वसूली हुई तो बेरोजगारों को भी नहीं बख्शा गया। उन्होंने तो परिसर में प्रदर्शन भी किया। 
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मेडिकल को आए बेरोजगारों ने किया प्रदर्शन 
बदायूं। आईटीआई में ग्रेटर नोएडा से आई डेंसो इंडिया लिमिटेड ने शुक्रवार को कैंपस प्लेसमेंट किया था। यहां कंपनी ने विभिन्न पदों के लिए करीब 60 बेरोजगार युवकों का चयन किया। कंपनी की पॉलिसी के अनुसार सभी चयनित आवेदकों को सोमवार को अपनी मेडिकल फिटनेस का प्रमाणपत्र दाखिल करना है। इसमें आंख, ईसीजी, एक्सरे, ब्लड शुगर आदि की जांच शामिल थीं। शनिवार को युवक प्रमाणपत्र बनवाने जिला अस्पताल आए तो उनसे हर टेबल पर सुविधा शुल्क की मांग की गई। आरोप है कि किसी ने 50 रुपये देकर एक्सरे रिपोर्ट बनवाई तो किसी को फाइनल मेडिकल प्रमाणपत्र बनवाने के लिए बाबू को 200 रुपये थमाने पड़े। कई ऐसे भी थे जो दिन भर भटकने के बाद भी प्रमाणपत्र नहीं बनवा सके। जिला अस्पताल के गेट पर ऐसे युवकों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने नारेबाजी करते हुए अस्पताल प्रशासन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। गुस्सा जताया कि अस्पताल स्टाफ की वजह से उन्हें कहीं अपनी नौकरी से हाथ न धोना पड़ जाए। प्रदर्शन करने वालों में बदायूं निवासी अवनीश कुमार, कछला निवासी यशपाल यादव और आशीष, दलेलनगर के श्रीनिवास, सहसवान के जोगेंद्र सिंह यादव आदि शामिल थे। 
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आंख के ऑपरेशन में भी हो गई वसूली 
बदायूं। जिला अस्पताल में शुक्रवार और शनिवार को करीब 35 मरीजों की आंख का ऑपरेशन किया गया। अधिकतर मरीज राजकीय मेडिकल कॉलेज से रेफर होकर यहां आए थे। इनमें जरीफनगर के केरई सेरई गांव निवासी मोहर सिंह, अब्दुल्लागंज के हरिशंकर, रामसेवक और कादरचौक के बाकरपुर निवासी धर्मलता पत्नी रामेश्वर आदि शामिल थे। उन्होंने बताया
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कि यह लोग मेडिकल कॉलेज में आंखें दिखाने गए थे। वहीं के डॉक्टर ने आंख में मोतियाबिंद की पुष्टि करके ऑपरेशन की सलाह दी। कहा कि यहां ओटी नहीं है, जिला अस्पताल में ही ऑपरेशन करेंगे। उन्हीं ने सभी को टेंपो में बैठाकर यहां भेजा और उन्हीं ने आकर स्थानीय स्टाफ की मदद से ऑपरेशन किया। बताया कि उनसे लेंस की क्वालिटी के हिसाब से रकम देने को कहा गया था। आरोप है कि किसी से हजार, किसी से डेढ़ हजार तो किसी से ढाई हजार रुपये मांगे गए। उन लोगों ने अपनी सुविधा अनुसार रुपये दिए भी। आंख का मामला था, इसमें रिस्क नहीं लिया जा सकता।
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मेडिकल कॉलेज में तो ऑपरेशन होता नहीं है। यहां के रोगियों के जिला अस्पताल ले जाकर ऑपरेशन किए गए, इसकी मुझे जानकारी नहीं नहीं है। इसमें भी भ्रष्टाचार के आरोप की शिकायत है तो गंभीर मामला है। मैं इस प्रकरण की अपने स्तर से जांच कराऊंगा, जो दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। 

- डॉ. एनसी प्रजापति, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज 
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जिला अस्पताल में 267 रुपये की रसीद देकर आंख का ऑपरेशन किया जाता है। कोई इससे ज्यादा फीस ले रहा है तो यह गलत है। मरीज भी बिना शिकायत किए रुपये दे देते हैं। इस मामले की जांच कराएंगे। इसके साथ ही बेरोजगार युवक भी उनके पास नहीं आए। किसने रकम ली, यह तो पता लगे, कार्रवाई की जाए। उनके प्रमाणपत्र भी प्राथमिकता से बनवाए जाएंगे। 
- डॉ. आरएस यादव, सीएमएस जिला अस्पताल
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