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Budaun News: महावा नदी पर पुल बनने से 30 गांव के 45 हजार की आबादी को मिलेगा लाभ
Mon, 18 May 2026 12:48 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
Updated Mon, 18 May 2026 12:48 AM IST
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अजयपाल गौतम
बदायूं। सहसवान के बड़ेरिया घाट पर महावा नदी पर बन रहा पुल करीब 30 गांव की लगभग 45 हजार आबादी के लिए राहत की बड़ी उम्मीद बन गया है। वर्षों से पुल की मांग कर रहे ग्रामीणों को उम्मीद है कि निर्माण पूरा होने के बाद तहसील मुख्यालय, ब्लॉक, अस्पताल, बाजार और स्कूल-कॉलेज तक पहुंच आसान हो जाएगी। अभी लोगों को नदी पार करने या दूसरे रास्ते से जाने के लिए लंबा चक्कर लगाना पड़ता है। इससे करीब दस किलोमीटर की दूरी भी घटेगी।
सहसवान तहसील के गांव बड़ेरिया और जरीफपुर गढ़िया के बीच महावा नदी बहती है। सामान्य दिनों में नदी सूखी रहती है, लेकिन बारिश के मौसम में नदी उफान पर आ जाती है। कई बार बाढ़ जैसे हालात बन जाते हैं और दोनों तरफ बसे गांवों का संपर्क पूरी तरह टूट जाता है। यहां बनी पुरानी पुलिया पानी में डूब जाती है, जिससे लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। कई ग्रामीण जान जोखिम में डालकर नाव या पानी के बीच से निकलने को मजबूर होते हैं।
तिलक सिंह की लंबे समय से मांग के बाद शासन ने मार्च 2025 में बड़ेरिया घाट पर पुल निर्माण को मंजूरी दी थी। इसके बाद सेतु निगम ने निर्माण कार्य शुरू कराया। इस परियोजना पर 21 करोड़ 84 लाख 93 हजार रुपये खर्च किए जा रहे हैं। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, पुल का निर्माण मार्च 2027 तक पूरा किया जाना है। ग्रामीण अब चाहते हैं कि बरसात से पहले निर्माण में और तेजी लाई जाए।
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यह है पुल की लंबाई
-महावा नदी पर बनने वाले पुल की कुल लंबाई 120.68 मीटर होगी। इसके साथ 400 मीटर मुख्य पहुंच मार्ग बनाया जाएगा। इसके अलावा 2500 मीटर अतिरिक्त संपर्क मार्ग भी तैयार किया जाएगा। जिससे दूर-दराज गांवों को भी सीधा फायदा मिल सके। निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। अब तक पुल के चार बड़े गोले तैयार हो चुके हैं, जबकि पांचवें गोले के निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
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इन गांवों को मिलेगा सीधा लाभ
-पुल बनने से बड़ेरिया, नसीरपुर गौंसू, भीकमपुर, कुर्वानपुर, शुजातगंज बेला, अब्बूनगर, खिरकवारी, जरीफपुर गढ़िया, जखुपुर, सिरकी दम्मू, बक्सर, नरसैना, पालपुर, रोहानपुर, पतरचोआ, भमेड़ी, भूसेपुर, जगूपुरा, कोल्हाई, नबाबगंज बेला समेत करीब 30 गांव के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। इन गांवों के किसानों को अपनी उपज मंडी तक पहुंचाने में आसानी होगी। मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सकेगा और छात्रों को पढ़ाई के लिए कम दूरी तय करनी पड़ेगी।
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10 किलोमीटर का लंबा चक्कर होगा खत्म
वर्तमान में कछला से जरीफपुर गढ़िया जाने वाले लोगों को कछला से सहसवान होते हुए लगभग 34 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। इसमें समय और ईंधन दोनों अधिक खर्च होते हैं। पुल बनने के बाद लोग बड़ेरिया होकर सीधे जरीफपुर गढ़िया पहुंच सकेंगे, जिससे करीब 10 किलोमीटर की दूरी कम हो जाएगी। इससे व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
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क्या बोले ग्रामीण
फोटो-12
-बरसात के दिनों में खेतों तक जाना भी मुश्किल हो जाता है। कई बार ट्रैक्टर और गाड़ियां फंस जाती हैं। अगर पुल बन जाएगा तो किसानों की सबसे बड़ी परेशानी खत्म हो जाएगी। इस पुल को बनवाने के लिए काफी प्रयास किए हैं।
-तिलक सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता, तोफी नगला
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फोटो-11
-बरसात में बच्चों को स्कूल भेजना बहुत मुश्किल होता है। पानी बढ़ने पर डर बना रहता है। अगर घर में कोई बीमार हो जाए तो अस्पताल पहुंचाना और भी बड़ी समस्या बन जाता है।
-अजय माहेश्वरी, जरीफपुर गढ़िया
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फाेटो-10
-हम लोगों को सामान लाने और ले जाने के लिए लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। डीजल और समय दोनों ज्यादा खर्च होते हैं। पुल बनने के बाद व्यापार आसान होगा।
- अजयपाल, व्यापारी, नबाबगंज बेला
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फोटो-9
-कॉलेज और कोचिंग जाने में काफी समय लग जाता है। बरसात में कई बार रास्ता बंद हो जाता है, इससे पढ़ाई प्रभावित होती है। पुल बनने से छात्रों को सबसे ज्यादा फायदा होगा और समय भी बचेगा।
-उर्वेश कुमार, पालपुर
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वर्जन- अभी देंगे
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सहसवान तहसील के गांव बड़ेरिया और जरीफपुर गढ़िया के बीच महावा नदी बहती है। सामान्य दिनों में नदी सूखी रहती है, लेकिन बारिश के मौसम में नदी उफान पर आ जाती है। कई बार बाढ़ जैसे हालात बन जाते हैं और दोनों तरफ बसे गांवों का संपर्क पूरी तरह टूट जाता है। यहां बनी पुरानी पुलिया पानी में डूब जाती है, जिससे लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। कई ग्रामीण जान जोखिम में डालकर नाव या पानी के बीच से निकलने को मजबूर होते हैं।
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तिलक सिंह की लंबे समय से मांग के बाद शासन ने मार्च 2025 में बड़ेरिया घाट पर पुल निर्माण को मंजूरी दी थी। इसके बाद सेतु निगम ने निर्माण कार्य शुरू कराया। इस परियोजना पर 21 करोड़ 84 लाख 93 हजार रुपये खर्च किए जा रहे हैं। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, पुल का निर्माण मार्च 2027 तक पूरा किया जाना है। ग्रामीण अब चाहते हैं कि बरसात से पहले निर्माण में और तेजी लाई जाए।
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यह है पुल की लंबाई
-महावा नदी पर बनने वाले पुल की कुल लंबाई 120.68 मीटर होगी। इसके साथ 400 मीटर मुख्य पहुंच मार्ग बनाया जाएगा। इसके अलावा 2500 मीटर अतिरिक्त संपर्क मार्ग भी तैयार किया जाएगा। जिससे दूर-दराज गांवों को भी सीधा फायदा मिल सके। निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। अब तक पुल के चार बड़े गोले तैयार हो चुके हैं, जबकि पांचवें गोले के निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
इन गांवों को मिलेगा सीधा लाभ
-पुल बनने से बड़ेरिया, नसीरपुर गौंसू, भीकमपुर, कुर्वानपुर, शुजातगंज बेला, अब्बूनगर, खिरकवारी, जरीफपुर गढ़िया, जखुपुर, सिरकी दम्मू, बक्सर, नरसैना, पालपुर, रोहानपुर, पतरचोआ, भमेड़ी, भूसेपुर, जगूपुरा, कोल्हाई, नबाबगंज बेला समेत करीब 30 गांव के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। इन गांवों के किसानों को अपनी उपज मंडी तक पहुंचाने में आसानी होगी। मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सकेगा और छात्रों को पढ़ाई के लिए कम दूरी तय करनी पड़ेगी।
10 किलोमीटर का लंबा चक्कर होगा खत्म
वर्तमान में कछला से जरीफपुर गढ़िया जाने वाले लोगों को कछला से सहसवान होते हुए लगभग 34 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। इसमें समय और ईंधन दोनों अधिक खर्च होते हैं। पुल बनने के बाद लोग बड़ेरिया होकर सीधे जरीफपुर गढ़िया पहुंच सकेंगे, जिससे करीब 10 किलोमीटर की दूरी कम हो जाएगी। इससे व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
क्या बोले ग्रामीण
फोटो-12
-बरसात के दिनों में खेतों तक जाना भी मुश्किल हो जाता है। कई बार ट्रैक्टर और गाड़ियां फंस जाती हैं। अगर पुल बन जाएगा तो किसानों की सबसे बड़ी परेशानी खत्म हो जाएगी। इस पुल को बनवाने के लिए काफी प्रयास किए हैं।
-तिलक सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता, तोफी नगला
फोटो-11
-बरसात में बच्चों को स्कूल भेजना बहुत मुश्किल होता है। पानी बढ़ने पर डर बना रहता है। अगर घर में कोई बीमार हो जाए तो अस्पताल पहुंचाना और भी बड़ी समस्या बन जाता है।
-अजय माहेश्वरी, जरीफपुर गढ़िया
फाेटो-10
-हम लोगों को सामान लाने और ले जाने के लिए लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। डीजल और समय दोनों ज्यादा खर्च होते हैं। पुल बनने के बाद व्यापार आसान होगा।
- अजयपाल, व्यापारी, नबाबगंज बेला
फोटो-9
-कॉलेज और कोचिंग जाने में काफी समय लग जाता है। बरसात में कई बार रास्ता बंद हो जाता है, इससे पढ़ाई प्रभावित होती है। पुल बनने से छात्रों को सबसे ज्यादा फायदा होगा और समय भी बचेगा।
-उर्वेश कुमार, पालपुर
वर्जन- अभी देंगे

अजयपाल गौतम

अजयपाल गौतम

अजयपाल गौतम

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