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Budaun News: शुरू नहीं हुआ टेस्टिंग ट्रैक, अव्यवस्थाओं के बीच जारी हो रहे ड्राइविंग लाइसेंस
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एआरटीओ कार्यालय परिसर में अस्थाई बनाया गया ट्रैक । संवाद
बदायूं। ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने से पहले टेस्ट लेने के लिए बनाया गया ट्रैक शुरू नहीं हुआ है। ऐसे में लाइसेंस जारी करने के लिए केवल औपचारिकता ही जारी की जा रही है। ऐसे में दलाल हावी हैं और उनकी मिलीभगत से लाइसेंस जारी हो रहे हैं।
शहर से करीब सात किलोमीटर दूर निजी ड्राइविंग ट्रैक दो माह पहले बन गया। उसका संचालन अभी नहीं शुरू हो सका है। ऐसे में कार्यालय परिसर में ही प्लास्टिक के डिवाइडर लगवाकर सिर्फ कार चलवाई जाती है। बाइक का लाइसेंस बिना टेस्ट के ही जारी किया जा रहा है। तेजी से बढ़ते सड़क हादसों को लेकर सरकार बेहद गंभीर है। सड़क सुरक्षा के लिए लगातार अभियान चल रहे हैं, मगर ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने में कोई सतर्कता नहीं दिख रही। आलम यह है कि बिना ड्राइविंग टेस्ट लिए ही जिले में धड़ल्ले से दोपहिया, चार पहिया वाहनों के चालन का लाइसेंस जारी कर दिया जा रहा है। रोजाना 50 से अधिक परमानेंट व 100 से अधिक लर्निंग लाइसेंस जारी हो रहे हैं, लेकिन टेस्ट के नाम पर औपचारिकता ही की जा रहीं हैं।
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नहीं होता ड्राइविंग टेस्ट
यहां ऑनलाइन टेस्ट तो होता है, लेकिन जब ड्राइविंग टेस्ट की बारी आती है कार्यालय परिसर में ही सिर्फ चार पहिया वाहन चलवाकर औपचारिकता करा दी जाती है। अकुशल चालक को भी प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाता है। एआरटीओ कार्यालय के पास चार व दो पहिया वाहन चलाकर टेस्ट लेने के लिए ट्रैक तो बन गया है लेकिन उसका संचालन नहीं हो पा रहा है।
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परमानेंट लाइसेंस की फीस 1350 रुपये, दलाल लेते कई हजार
चार पहिया वाहन चलाने के लिए परमानेंट लाइसेंस बनवाना है तो लर्निंग के समय 350 और फिर परमानेंट के लिए 1000 हजार रुपये देने होते है। दो पहिया वाहनों के लिए 200 रुपये लर्निंग व 1000 रुपये परमानेंट लाइसेंस की सरकारी फीस है। इसके लिए परिवहन विभाग के सारथी एप पर ऑनलाइन आवेदन करना होता है। इसके बाद अभ्यर्थी को तिथि आवंटित होती है उस दिन उसका टेस्ट होता है। फिलहाल इतने में काम नहीं होता है और एआरटीओ आफिस में सक्रिय दलाल तीन से पांच हजार रुपये लेकर लाइसेंस बनवा रहे हैं।
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लर्निंग लाइसेंस के लिए देना पड़ा तीन हजार
चार पहिया वाहन के लिए ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने आए है। एक भैया यह काम करवा रहे हैं। लर्निंग लाइसेंस के लिए तीन हजार दिए है। इसके बाद 3500 रुपये और देना है। इसके बाद परमानेंट लाइसेंस बनेगा। - राजीव, निवासी पालपुर
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1500 रुपये में बना लर्निंग लाइसेंस
1500 रुपये देने पर बाइक चलाने का लर्निंग लाइसेंस बना दिया गया है। परमानेंट डीएल के लिए और पैसे देने पड़ेंगे। आफिस में बिना दलाल के काम नहीं होता है। - चंद्रभान, निवासी ग्राम नैथू
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1000 रुपये में बनवाया लर्निंग
- 1000 रुपया खर्च कर लर्निंग डीएल बना है। सरकारी फीस नहीं बताई गई है। दलालों का अपना रेट है। उनसे मिलने पर ही यहां के बाबू फाइल आगे बढ़ाते हैंं। परमानेंट बनवाने के लिए और पैसे देने होंगे। - देवदत्त, निवासी ग्राम सेमरिया
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बयान- ड्राइविंग ट्रैक न होने से दिक्कत होती है। फिर भी बिना टेस्ट लिए लाइसेंस जारी नहीं किया जाता है। एक स्थान पर निजी ड्राइविंग ट्रैक बन गया है। वहां से ही यह काम होगा। उसे शुरू कराने को उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा गया है। कार्यालय में दलाल न आने पाए, इसके लिए निगरानी की जाती है। - रामबचन गुप्ता, एआरटीओ, प्रशासन
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शहर से करीब सात किलोमीटर दूर निजी ड्राइविंग ट्रैक दो माह पहले बन गया। उसका संचालन अभी नहीं शुरू हो सका है। ऐसे में कार्यालय परिसर में ही प्लास्टिक के डिवाइडर लगवाकर सिर्फ कार चलवाई जाती है। बाइक का लाइसेंस बिना टेस्ट के ही जारी किया जा रहा है। तेजी से बढ़ते सड़क हादसों को लेकर सरकार बेहद गंभीर है। सड़क सुरक्षा के लिए लगातार अभियान चल रहे हैं, मगर ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने में कोई सतर्कता नहीं दिख रही। आलम यह है कि बिना ड्राइविंग टेस्ट लिए ही जिले में धड़ल्ले से दोपहिया, चार पहिया वाहनों के चालन का लाइसेंस जारी कर दिया जा रहा है। रोजाना 50 से अधिक परमानेंट व 100 से अधिक लर्निंग लाइसेंस जारी हो रहे हैं, लेकिन टेस्ट के नाम पर औपचारिकता ही की जा रहीं हैं।
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नहीं होता ड्राइविंग टेस्ट
यहां ऑनलाइन टेस्ट तो होता है, लेकिन जब ड्राइविंग टेस्ट की बारी आती है कार्यालय परिसर में ही सिर्फ चार पहिया वाहन चलवाकर औपचारिकता करा दी जाती है। अकुशल चालक को भी प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाता है। एआरटीओ कार्यालय के पास चार व दो पहिया वाहन चलाकर टेस्ट लेने के लिए ट्रैक तो बन गया है लेकिन उसका संचालन नहीं हो पा रहा है।
परमानेंट लाइसेंस की फीस 1350 रुपये, दलाल लेते कई हजार
चार पहिया वाहन चलाने के लिए परमानेंट लाइसेंस बनवाना है तो लर्निंग के समय 350 और फिर परमानेंट के लिए 1000 हजार रुपये देने होते है। दो पहिया वाहनों के लिए 200 रुपये लर्निंग व 1000 रुपये परमानेंट लाइसेंस की सरकारी फीस है। इसके लिए परिवहन विभाग के सारथी एप पर ऑनलाइन आवेदन करना होता है। इसके बाद अभ्यर्थी को तिथि आवंटित होती है उस दिन उसका टेस्ट होता है। फिलहाल इतने में काम नहीं होता है और एआरटीओ आफिस में सक्रिय दलाल तीन से पांच हजार रुपये लेकर लाइसेंस बनवा रहे हैं।
लर्निंग लाइसेंस के लिए देना पड़ा तीन हजार
चार पहिया वाहन के लिए ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने आए है। एक भैया यह काम करवा रहे हैं। लर्निंग लाइसेंस के लिए तीन हजार दिए है। इसके बाद 3500 रुपये और देना है। इसके बाद परमानेंट लाइसेंस बनेगा। - राजीव, निवासी पालपुर
1500 रुपये में बना लर्निंग लाइसेंस
1500 रुपये देने पर बाइक चलाने का लर्निंग लाइसेंस बना दिया गया है। परमानेंट डीएल के लिए और पैसे देने पड़ेंगे। आफिस में बिना दलाल के काम नहीं होता है। - चंद्रभान, निवासी ग्राम नैथू
1000 रुपये में बनवाया लर्निंग
- 1000 रुपया खर्च कर लर्निंग डीएल बना है। सरकारी फीस नहीं बताई गई है। दलालों का अपना रेट है। उनसे मिलने पर ही यहां के बाबू फाइल आगे बढ़ाते हैंं। परमानेंट बनवाने के लिए और पैसे देने होंगे। - देवदत्त, निवासी ग्राम सेमरिया
बयान- ड्राइविंग ट्रैक न होने से दिक्कत होती है। फिर भी बिना टेस्ट लिए लाइसेंस जारी नहीं किया जाता है। एक स्थान पर निजी ड्राइविंग ट्रैक बन गया है। वहां से ही यह काम होगा। उसे शुरू कराने को उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा गया है। कार्यालय में दलाल न आने पाए, इसके लिए निगरानी की जाती है। - रामबचन गुप्ता, एआरटीओ, प्रशासन

एआरटीओ कार्यालय परिसर में अस्थाई बनाया गया ट्रैक । संवाद

एआरटीओ कार्यालय परिसर में अस्थाई बनाया गया ट्रैक । संवाद

एआरटीओ कार्यालय परिसर में अस्थाई बनाया गया ट्रैक । संवाद

एआरटीओ कार्यालय परिसर में अस्थाई बनाया गया ट्रैक । संवाद

एआरटीओ कार्यालय परिसर में अस्थाई बनाया गया ट्रैक । संवाद