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जिस पैसे से होनी थी मरम्मत और रंगाई पुताई....उसकी बस खत्म हुई %स्याही%

Sun, 04 Aug 2019 06:54 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 04 Aug 2019 06:54 PM IST
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school maintinance
बदायूं। जिले के 18 कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में बिल्डिंग मरम्मत, बिजली बकाया बिल जमा करने व रंगाई-पुताई के लिए शासन से 72 लाख रुपये विभाग को मिले थे, जो प्रत्येक विद्यालय को चार-चार लाख रुपये के हिसाब से वितरण किया गया। वार्डन और लेखाकर ने मिलकर धनराशि को खाते से पूरा निकल लिया, साथ ही केवल बिजली बिल का बकाया पेमेंट करते हुए अन्य खर्च दिखाना शुरू कर दिए। बाद में विद्यालय में कोई काम नहीं किया गया यानी जिस पैसे से मरम्मत और रंगाई पुताई होनी थी, उसको सिर्फ कागजों में साइन और घपला करके पूरा पैसा निकालकर अन्य खर्चों में दिखाकर बंदरबांट कर लिया। जब बीएसए को इसकी खबर लगी तो उन्होंने इस बाबत संबंधित को चेतावनी देते हुए निर्देशित किया है।
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कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में मेंटेनेंस के नाम पर शासन की ओर से मार्च में धनराशि का आवंटन किया गया था, ताकि उस धनराशि से विद्यालयों में मरम्मत का काम कराया जाए। उसके बाद में रंगाई, पुताई और अगर विद्यालय परिसर में अन्य छोटी-मोटी कमियां हैं, तो उनको भी दूर करते हुए विद्यालय को एक मॉडल की तरह स्कूल को विकसित किया जाए। इसके अलावा विद्यालयों पर जो विद्युत का बिल बकाया चल रहा है, उनका भी निस्तारण किया जाए। यह धनराशि मार्च 2019 के पहले हफ्ते में शासन से आई थी। ऐसे में कस्तूरबा गांधी विद्यालय के लेखाकारों ने अधिकारियों से वार्ता की कि विद्यालय में जो काम होने हैं, उसके सापेक्ष समय बेहद कम है। ऐसे में अगर पूरी धनराशि खातों से समय रहते नहीं निकाली गई, तो ये वापस शासन को चली जाएगी। उनके इस तर्क पर अधिकारी भी सहमत हो गए और उन्होंने शासन से मिली पूरी धनराशि को अभिलेखों पर काम दिखाकर निकाल लिया। बाद में अधिकारियों के दिशा निर्देशानुसार सभी विद्यालय के लेखाकारों की ओर से बिजली का बिल तो जमा कर दिया गया, लेकिन बाद में वार्डन की मिली भगत से विद्यालय में मरम्मत और रंगाई-पुताई का काम खानापूर्ति करके शेष धनराशि का बंदरबांट कर लिया गया।
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अधिकारियों की भी भूमिका संदिग्ध
- इस मामले में कस्तूरबा गांधी विद्यालय के लेखाकारों ने कुछ भी बोलने से कुछ भी इंकार कर दिया। हालांकि सूत्रों की मानें तो शासन से आई धनराशि को ठिकाने लगाने में अधिकारियों की भी भूमिका संदिग्ध है।
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ये हैं आंकड़े-
-जिले मेें है 18 कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय
-प्रत्येक विद्यालय को आए थे चार-चार लाख रुपये
-धनराशि से मरम्मत, रंगाई-पुताई, बिजली बिल जमा करना था
-सवा से डेढ़ लाख रुपये के बीच में था हर विद्यालय का बिजली बिल
- बाकी धनराशि मरम्मत और रंगाई-पुताई के काम पर होनी थी खर्च
ऊपर से चमक रहे विद्यालय
- अधिकांश कस्तूरबा विद्यालयों की हालत ऐसी है कि बाहर से तो वह चमक रहे हैं, लेकिन अंदर से उनकी हालत खस्ता है। कई ड़ रहा है तो कहीं रंगाई पुताई बेकार हो गई है। अंदर से हालत देखने पर ये विद्यालय लगते ही नहीं हैं। मगर छात्राओं की मजबूरी है कि वह यहां पढ़ने को मजबूर हैं।

-शासन से मार्च में कस्तूरबा विद्यालयों की मरम्मत, रंगाई-पुताई और बिजली बिल जमा करने के लिए धनराशि आई थी। इसके बाद में सभी विद्यालयों की ओर से बिजली का बिल तो जमा कर दिया, लेकिन कई विद्यालयों में अभी भी मानक के अनुरूप मरम्मत व रंगाई-पुताई का काम नहीं किया गया। इसको लेकर उन्हें चेतावनी देते हुए निर्देशित किया गया है।
-रामपाल सिंह राजपूत, बीएसए
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