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Budaun News: तपस्या से प्रसन्न होकर ध्रुव को दी अटल पदवी
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सोही आश्रम हनुमान मंदिर में भागवत कथा का पाठ करते आचार्य मणीश्वर भारद्वाज। संवाद
वजीरगंज। सोही आश्रम हनुमान मंदिर परिसर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन ध्रुव चरित्र ने भक्तों को भाव विभोर कर दिया।
कथा व्यास मणीश्वर भारद्वाज ने बताया कि राजा उत्तानपाद की दो पत्नियों में एक सुनीति और दूसरी सुरुचि थीं। सुरुचि के कहने पर उत्तानपाद ने सुनीति को जंगल में भेज दिया था। एक दिन सुनीति का पुत्र खेलते-खेलते राज दरबार जा पहुंचा और उत्तानपाद की गोेदी में बैठ गया, सुरुचि ने उसे फटकारते हुए गोद से उतारकर भगा दिया।
बालक ध्रुव ने यह सब अपनी मां को जाकर बताया तो उनकी आंखों में आंसू आ गए। वह ध्रुव को भगवान की शरण में जाने को कहती हैं। पांच वर्ष का बालक ध्रुव राज्य छोड़कर वन में तपस्या के लिए चला जाता है। नारद जी रास्ते में मिलते हैं और ध्रुव को समझाते हैं कि मैं तुम्हें पिता की गोद में बैठाऊंगा, लेकिन ध्रुव ने कहा कि पिता की नहीं, अब परम पिता की गोद में बैठना है।
तपस्या देख भगवान ध्रुव के सामने प्रकट हुए और उन्हें ब्रह्मांड में अटल पदवी दी। आज भी ध्रुव तारा अपने स्थान पर अटल रहते हुए चमक बिखेरता है। इस अवसर पर मंदिर के महंत फूलबाबा, देवानंद महाराज, रामौतार शास्त्री, करुणा सरण महाराज, धर्मदास महाराज, पवन कुमार वार्ष्णेय, रामदास शास्त्री आदि मौजूद रहे।
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कथा व्यास मणीश्वर भारद्वाज ने बताया कि राजा उत्तानपाद की दो पत्नियों में एक सुनीति और दूसरी सुरुचि थीं। सुरुचि के कहने पर उत्तानपाद ने सुनीति को जंगल में भेज दिया था। एक दिन सुनीति का पुत्र खेलते-खेलते राज दरबार जा पहुंचा और उत्तानपाद की गोेदी में बैठ गया, सुरुचि ने उसे फटकारते हुए गोद से उतारकर भगा दिया।
बालक ध्रुव ने यह सब अपनी मां को जाकर बताया तो उनकी आंखों में आंसू आ गए। वह ध्रुव को भगवान की शरण में जाने को कहती हैं। पांच वर्ष का बालक ध्रुव राज्य छोड़कर वन में तपस्या के लिए चला जाता है। नारद जी रास्ते में मिलते हैं और ध्रुव को समझाते हैं कि मैं तुम्हें पिता की गोद में बैठाऊंगा, लेकिन ध्रुव ने कहा कि पिता की नहीं, अब परम पिता की गोद में बैठना है।
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तपस्या देख भगवान ध्रुव के सामने प्रकट हुए और उन्हें ब्रह्मांड में अटल पदवी दी। आज भी ध्रुव तारा अपने स्थान पर अटल रहते हुए चमक बिखेरता है। इस अवसर पर मंदिर के महंत फूलबाबा, देवानंद महाराज, रामौतार शास्त्री, करुणा सरण महाराज, धर्मदास महाराज, पवन कुमार वार्ष्णेय, रामदास शास्त्री आदि मौजूद रहे।
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