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मिलों पर भुगतान फंसा, कहीं शादी तो कहीं इलाज रुका
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बदायूं। चार चीनी मिलों पर जिले के गन्ना किसानों का भुगतान फंसा हुआ है। भुगतान न मिलने के कारण किसानों की बेटियों की शादी और परिवार में इलाज तक प्रभावित हो रहा है। शासन स्तर से यदु शुगर मिल के खिलाफ आरसी जारी होने के बाद किसानों को उम्मीद जगी है कि अन्य मिलों भी अब उनको भुगतान करेंगी। हालांकि, यदु शुगर मिल के खिलाफ पहले भी तीन बार आरसी जारी हो चुकी है।
वैसे तो जिले में दो सहकारी क्षेत्र की शेखूपुर और निजी क्षेत्र की बिसौली स्थित यदु शुगर मिल है। इन दोनों चीनी मिलों के अलावा जिले के किसान डीसीएम चीनी मिल गुन्नौर, नगरिया चीनी मिल कासगंज, राणा शुगर मिल समेत छह चीनी मिलों को गन्ना सप्लाई करते हैं। बीते पेराई सत्र में दि किसान सहकारी चीनी मिल ने 20 नवंबर से गन्ना खरीद शुरू की थी। गन्ना खरीद अप्रैल 2021 तक जारी रही। वहीं यदु शुगर मिल मार्च 2021 के अंतिम सप्ताह में बंद हुई थी। यहीं हाल निजी क्षेत्र की अन्य जिलों की चीनी मिलों का था। इस दौरान चीनी मिलों द्वारा जिले के किसानों से 60.29 लाख क्विंटल गन्ना खरीदा गया। इसके बदले मिलों को गन्ना किसानों के एक अरब 93 करोड़ 64 लाख से अधिक का भुगतान करना था। अभी तक 97 करोड़ 91 लाख रुपये का ही पेमेंट किया गया है और 95 करोड़ से अधिक का बकाया है। ऐसे मेें गन्ना किसान दर-दर की ठोकरें खाने पर मजबूर हैं।
गन्ना किसानों को भुगतान न मिलने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति खराब हो रही है। बेटियों की शादी के साथ परिवार के लोगों का इलाज भी टालना हो रहा है। शासन स्तर से यदु शुगर मिल के खिलाफ आरसी जारी होने के बाद किसानों को उम्मीद जगी है कि अब शासन अनन्य मिलें भी उनको भुगतान कर दें।
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गन्ना को किसान नकदी फसल मानता है, लेकिन मिलों को गन्ना देने के बाद समय से भुगतान ही नहीं मिलता। कभी बेटी की शादी की तारीख आगे बढ़ानी होती है तो कभी इलाज में आर्थिक समस्या आगे आती है। अब उम्मीद है कि किसानों को भुगतान मिलेगा।-ग्रीश सिंह, गन्ना किसान
किसान पहले से ही परेशान है। गन्ना के बदले भुगतान न होने से आगे का कृषि कार्य तो प्रभावित होता ही है। कई बार परिवार में आर्थिक समस्या के कारण किसान खुद को ठगा सा महसूस करता है। मिलें समय से भुगतान करें तो गन्ना किसानों की दशा इतनी खराब न हो।-ओमकार सिंह, गन्ना किसान
- जिले के गन्ना किसानों का चीनी मिलों पर लगभग 95 करोड़ रुपये बकाया है। सबसे ज्यादा बकाया वाली यदु शुगर मिल के खिलाफ आरसी जारी की गई है। किसानों को सभी मिलें समय से भुगतान करें, इसका पूरा ध्यान रखा जा रहा है।- रामकिशन, जिला गन्ना अधिकारी
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वैसे तो जिले में दो सहकारी क्षेत्र की शेखूपुर और निजी क्षेत्र की बिसौली स्थित यदु शुगर मिल है। इन दोनों चीनी मिलों के अलावा जिले के किसान डीसीएम चीनी मिल गुन्नौर, नगरिया चीनी मिल कासगंज, राणा शुगर मिल समेत छह चीनी मिलों को गन्ना सप्लाई करते हैं। बीते पेराई सत्र में दि किसान सहकारी चीनी मिल ने 20 नवंबर से गन्ना खरीद शुरू की थी। गन्ना खरीद अप्रैल 2021 तक जारी रही। वहीं यदु शुगर मिल मार्च 2021 के अंतिम सप्ताह में बंद हुई थी। यहीं हाल निजी क्षेत्र की अन्य जिलों की चीनी मिलों का था। इस दौरान चीनी मिलों द्वारा जिले के किसानों से 60.29 लाख क्विंटल गन्ना खरीदा गया। इसके बदले मिलों को गन्ना किसानों के एक अरब 93 करोड़ 64 लाख से अधिक का भुगतान करना था। अभी तक 97 करोड़ 91 लाख रुपये का ही पेमेंट किया गया है और 95 करोड़ से अधिक का बकाया है। ऐसे मेें गन्ना किसान दर-दर की ठोकरें खाने पर मजबूर हैं।
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गन्ना किसानों को भुगतान न मिलने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति खराब हो रही है। बेटियों की शादी के साथ परिवार के लोगों का इलाज भी टालना हो रहा है। शासन स्तर से यदु शुगर मिल के खिलाफ आरसी जारी होने के बाद किसानों को उम्मीद जगी है कि अब शासन अनन्य मिलें भी उनको भुगतान कर दें।
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गन्ना को किसान नकदी फसल मानता है, लेकिन मिलों को गन्ना देने के बाद समय से भुगतान ही नहीं मिलता। कभी बेटी की शादी की तारीख आगे बढ़ानी होती है तो कभी इलाज में आर्थिक समस्या आगे आती है। अब उम्मीद है कि किसानों को भुगतान मिलेगा।-ग्रीश सिंह, गन्ना किसान
किसान पहले से ही परेशान है। गन्ना के बदले भुगतान न होने से आगे का कृषि कार्य तो प्रभावित होता ही है। कई बार परिवार में आर्थिक समस्या के कारण किसान खुद को ठगा सा महसूस करता है। मिलें समय से भुगतान करें तो गन्ना किसानों की दशा इतनी खराब न हो।-ओमकार सिंह, गन्ना किसान
- जिले के गन्ना किसानों का चीनी मिलों पर लगभग 95 करोड़ रुपये बकाया है। सबसे ज्यादा बकाया वाली यदु शुगर मिल के खिलाफ आरसी जारी की गई है। किसानों को सभी मिलें समय से भुगतान करें, इसका पूरा ध्यान रखा जा रहा है।- रामकिशन, जिला गन्ना अधिकारी