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Budaun News: यात्री डग्गामार के सहारे, नहीं चल रही कोई रोडवेज बस
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आसफपुर। तमाम प्रयासों के बाद भी आसफपुर को रोडवेज बस की सुविधा नहीं मिल सकी है। क्षेत्र के नुमाइंदों से लेकर बड़े अधिकारी भी इस मुद्दे को नजर अंदाज किए हुए हैं। कस्बा सहित क्षेत्र के लोगों को तहसील तथा जिला मुख्यालय पहुंचने के लिए निजी अथवा डग्गामार वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है।
आसफपुर-बिसौली मार्ग को स्टेट हाईवे का दर्जा मिला चुका है। बावजूद इसके यातायात के संसाधन न होने से क्षेत्र के लोग मुसीबत झेलने को मजबूर हैं। पिछले लोकसभा से लेकर विधानसभा के चुनावों में इस क्षेत्र के मतदाताओं में यही एक बड़ा मुद्दा छाया रहा था। विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रत्याशी कोरा आश्वासन देकर चले गए।
उपेक्षा पूर्ण रवैये के चलते ब्लॉक मुख्यालय के इस कस्बा और आसपास के क्षेत्र वालों को यातायात की सुविधा के रूप में रोडवेज बस की सुविधा नहीं मिल सकी। यहां ब्लॉक मुख्यालय से लगभग चार दर्जन गांव जुड़े हैं। जहां से आवागमन का कोई सुरक्षित साधन नहीं है, जबकि रोजाना सैकड़ों की संख्या में लोग निजी अथवा सरकारी कार्यों से बिसौली अथवा बदायूं आवागमन करते हैं।
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राजमार्ग घोषित हो चुका है, पर नहीं चल रही कोई रोडवेज बस
राजकीय राजमार्ग का दर्जा मिल जाने के बाद यह मार्ग अब कछला-बिल्सी-शाहबाद राजमार्ग के रूप में जाना जाता है। शाहबाद से सीधा रामपुर होते हुए उत्तराखंड तक जाने वाले इस मार्ग पर निजी अथवा डग्गामार वाहनों के सिवाय कोई भी साधन नहीं है।
एक वर्ष पूर्व केवल सर्वे कराके छोड़ा बस सेवा का कार्य
विगत वर्ष परिवहन निगम की टीम ने रोडवेज की बसों के संचालन के लिए एक सर्वे किया था। उस समय क्षेत्र के लोगो को आवागमन की समस्या से निजात मिलने की आशा जगी थी, लेकिन लंबा समय बीत जाने के बाद भी समस्या का निदान नहीं होने से क्षेत्र के लोग अब आगामी विधान सभा चुनाव का इंतजार कर रहे हैं। ताकि इसे बड़ा मुद्दा बनाया जा सके।
वास्तव में समस्या गंभीर है। इस संबंध में बदायूं के एआरएम से जल्द ही बात करेंगे। ब्लाॅक मुख्यालय पर रोडवेज बस सेवा जरूरी है। वहीं राजमार्ग पर भी रोडवेज बसों को संचालन कराया जाना चाहिए। -आशुतोष मौर्य, विधायक बिसौली
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आसफपुर-बिसौली मार्ग को स्टेट हाईवे का दर्जा मिला चुका है। बावजूद इसके यातायात के संसाधन न होने से क्षेत्र के लोग मुसीबत झेलने को मजबूर हैं। पिछले लोकसभा से लेकर विधानसभा के चुनावों में इस क्षेत्र के मतदाताओं में यही एक बड़ा मुद्दा छाया रहा था। विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रत्याशी कोरा आश्वासन देकर चले गए।
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उपेक्षा पूर्ण रवैये के चलते ब्लॉक मुख्यालय के इस कस्बा और आसपास के क्षेत्र वालों को यातायात की सुविधा के रूप में रोडवेज बस की सुविधा नहीं मिल सकी। यहां ब्लॉक मुख्यालय से लगभग चार दर्जन गांव जुड़े हैं। जहां से आवागमन का कोई सुरक्षित साधन नहीं है, जबकि रोजाना सैकड़ों की संख्या में लोग निजी अथवा सरकारी कार्यों से बिसौली अथवा बदायूं आवागमन करते हैं।
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राजमार्ग घोषित हो चुका है, पर नहीं चल रही कोई रोडवेज बस
राजकीय राजमार्ग का दर्जा मिल जाने के बाद यह मार्ग अब कछला-बिल्सी-शाहबाद राजमार्ग के रूप में जाना जाता है। शाहबाद से सीधा रामपुर होते हुए उत्तराखंड तक जाने वाले इस मार्ग पर निजी अथवा डग्गामार वाहनों के सिवाय कोई भी साधन नहीं है।
एक वर्ष पूर्व केवल सर्वे कराके छोड़ा बस सेवा का कार्य
विगत वर्ष परिवहन निगम की टीम ने रोडवेज की बसों के संचालन के लिए एक सर्वे किया था। उस समय क्षेत्र के लोगो को आवागमन की समस्या से निजात मिलने की आशा जगी थी, लेकिन लंबा समय बीत जाने के बाद भी समस्या का निदान नहीं होने से क्षेत्र के लोग अब आगामी विधान सभा चुनाव का इंतजार कर रहे हैं। ताकि इसे बड़ा मुद्दा बनाया जा सके।
वास्तव में समस्या गंभीर है। इस संबंध में बदायूं के एआरएम से जल्द ही बात करेंगे। ब्लाॅक मुख्यालय पर रोडवेज बस सेवा जरूरी है। वहीं राजमार्ग पर भी रोडवेज बसों को संचालन कराया जाना चाहिए। -आशुतोष मौर्य, विधायक बिसौली