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अब थाना स्तर पर जुटाए जाने लगे विसरा के रिकॉर्ड
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बदायूं। किस थाने में कितने विसरा रखे हैं, कितने प्रयोगशाला भेजे गए हैं, कितने को कोर्ट की अनुमति के बाद नष्ट कर दिया गया और कितनों की रिपोर्ट प्रयोगशाला से आना बाकी है। थानों में इसका रिकॉर्ड ढूंढना मुश्किल है। लापरवाही का आलम यह है कि पोस्टमार्टम हाउस में भी विसरा प्रिजर्व किए जाने का कोई रिकॉर्ड नहीं है। लेकिन अमर उजाला ने पिछले दिनों विसरा की दुर्दशा पर खबर प्रकाशित की तो अब थाना स्तर पर रिकार्ड जुटाने की कवायद शुरू कर दी गई है। सूत्रों के अनुसार पुलिस जिला मुख्यालय ने विसरा से संबंधित रिपोर्ट मांगी है।
आधुनिक पोस्टमार्टम हाउस वर्ष 2014 में हैंड ओवर हो चुका है। इसके बाद से ही पोस्टमार्टम यहां होते हैं। विसरा सुरक्षित रखे जाने की यहां कोई व्यवस्था नहीं है। गौर करें तो जनवरी से अब तक करीब 960 पोस्टमार्टम हो चुके हैं। इस दौरान कितने शवों का विसरा प्रिजर्व किया गया इसका कोई रिकार्ड नहीं है। संबंधित थाना पुलिस को इसे जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजना होता है। कितने विसरा प्रिजर्व किए गए और इस दौरान कितनों को प्रयोगशाला भेजा गया इस पर भी स्थिति साफ नहीं है। दरअसल, विसरा को जांच के लिए प्रयोशाला भेजना जरूरी है या नहीं यह भी विवेचना पर निर्भर रहता है। संबंधित मामले में अगर समय रहते मौत का कारण साफ हो जाए और संबंधित मामले का खुलासा हो जाए तो विसरा को कोर्ट से अनुमति लेने के बाद नष्ट कर दिया जाता है। जिले में 2012 तक के के विसरा नष्ट किए जा चुके हैं। 2012 से अब तक के प्रिजर्व विसरा को थाना स्तर से रिकार्ड जुटाना पुलिस अधिकारियों के लिए टेड़ी खीर साबित हो रहा है। पिछले दिनों अमर उजाला ने विसरा की दुर्दशा को लेकर खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद से अब थाना स्तर पर इसका रिकार्ड जुटाने का काम शुरू कर दिया गया है। एक प्रभारी निरीक्षक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जिला मुख्यालय से विसरा के संबंध में रिपोर्ट मांगी गई है।
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आधुनिक पोस्टमार्टम हाउस वर्ष 2014 में हैंड ओवर हो चुका है। इसके बाद से ही पोस्टमार्टम यहां होते हैं। विसरा सुरक्षित रखे जाने की यहां कोई व्यवस्था नहीं है। गौर करें तो जनवरी से अब तक करीब 960 पोस्टमार्टम हो चुके हैं। इस दौरान कितने शवों का विसरा प्रिजर्व किया गया इसका कोई रिकार्ड नहीं है। संबंधित थाना पुलिस को इसे जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजना होता है। कितने विसरा प्रिजर्व किए गए और इस दौरान कितनों को प्रयोगशाला भेजा गया इस पर भी स्थिति साफ नहीं है। दरअसल, विसरा को जांच के लिए प्रयोशाला भेजना जरूरी है या नहीं यह भी विवेचना पर निर्भर रहता है। संबंधित मामले में अगर समय रहते मौत का कारण साफ हो जाए और संबंधित मामले का खुलासा हो जाए तो विसरा को कोर्ट से अनुमति लेने के बाद नष्ट कर दिया जाता है। जिले में 2012 तक के के विसरा नष्ट किए जा चुके हैं। 2012 से अब तक के प्रिजर्व विसरा को थाना स्तर से रिकार्ड जुटाना पुलिस अधिकारियों के लिए टेड़ी खीर साबित हो रहा है। पिछले दिनों अमर उजाला ने विसरा की दुर्दशा को लेकर खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद से अब थाना स्तर पर इसका रिकार्ड जुटाने का काम शुरू कर दिया गया है। एक प्रभारी निरीक्षक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जिला मुख्यालय से विसरा के संबंध में रिपोर्ट मांगी गई है।
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