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खुली रहीं दुकानें, ग्राहक नहीं आए...बाजारों में पसरा रहा सन्नाटा
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बदायूं। कृषि बिलों के विरोध में किसान संगठनों तथा विपक्षी दलों का भारत बंद जिले में लगभग बेअसर रहा। शहर समेत पूरे जिले में बाजार रोजाना की तरह ही खुले, फर्क था तो बस इतना कि दुकानों से ग्राहक नदारद थे, जिसकी वजह से बाजारों में सन्नाटा रहा। दोपहर बाद दुकानों पर ग्राहक पहुंचना शुरू हुए लेकिन उनकी भी संख्या ज्यादा नहीं रही। कुछ दुकानदारों ने अपनी दुकानें सुबह देर से खोली, लेकिन वह भी पूरे दिन हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे।
कृषि कानूनों का विरोध जिले के किसान नेता भी कर रहे हैं। उनके अनुसार कृषि कानून से वे पूंजीपतियों के गुलाम हो जाएंगे। कुछ विपक्षी दल भी किसान संगठनों का लगातार समर्थन कर रहे हैं। इन संगठनों ने मंगलवार को भारत बंद का आवाहन किया था। इससे पहले सोमवार को सपा ने भी कृषि कानून के विरोध में यात्रा निकालने का प्रयास किया था लेकिन पुलिस ने अधिकतर नेताओं को पहले ही नजरबंद कर लिया। पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव समेत कुछ सपा नेताओं को धरने के समय हिरासत में ले लिया गया। पुलिस की पूरी नजर मंगलवार को होने वाले बंद पर थी, जिसके लिए अधिकारियों ने पहले ही तैयारी कर ली थी। मंगलवार को सुबह 10 बजे से दुकानें खुलनी शुरू हो गईं। इसके बाद रोजाना की तरह दुकानें खुलने लगीं। कुछ दुकानदारों ने अपने शटर खोले लेकिन सामान निकालकर बाहर नहीं रखा। वहीं कुछ दुकानदारों ने अपना सामान बाहर सजा लिया। दोपहर 12 बजे तक शहर के सभी बाजार पूरी तरह खुले नजर आए।
पहले दूसरों का जायजा लिया, फिर खोली दुकानें
- बंद के मद्देनजर ज्यादातर दुकानदारों ने अपनी दुकानें खोल ली थीं, लेकिन कुछ दुकानदार ऐसे भी थे जो अपनी दुकानों के बाहर खड़े होकर पहले इस बात का जायजा लेते रहे कि दूसरे लोग अपनी दुकानें खोल रहे हैं या नहीं। दूसरे की दुकानें खुलती देख उन्होंने भी अपनी दुकान खोल लीं।
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भीड़ से भरी रहने वाली सड़कें रहीं सूनी
- शहर का बड़ा बाजार, घंटाघर, सब्जी मंडी मार्केट, चूना मंडी आदि वह बाजार हैं जहां सुबह दुकानें खुलने के बाद भीड़ बढ़ने लगती है और दोपहर होने तक इन बाजारों में पैर रखने की जगह तक नहीं बचती। दुकानदारों द्वारा अपना सामान दुकानों के बाहर सजाने के बाद सड़कें भी संकरी हो जाती हैं, जिससे भीड़ और ज्यादा लगती है। रही सही कसर बाजारों में घुसने वाले ई रिक्शा और टेंपो वाले कर देते हैं, लेकिन मंगलवार को इन सभी बाजारों की सड़के सूनी दिखाई दीं। दुकानदार भी ग्राहकों का इंतजार करते दिखायी दिए।
इंडियन बैंक वाली रोड पर भी रहा सन्नाटा
-छह सड़का से गांधी ग्राउंड शिव मंदिर को जाने वाली सड़क पर दिन में काफी भीड़ रहती है। इस सड़क पर दिन में कई बार जाम लगता है लेकिन मंगलवार को इस रोड पर भी सन्नाटा छाया रहा। सुबह से लेकर शाम तक यह रोड खाली पड़ी रही। इस रोड पर स्थित इंडियन बैंक में भी रोजाना से कम ही ग्राहक आए। मढ़ई चौक समेत हलवाई चौक पर भी दुकानदार खाली बैठे रहे। शहर के गिने चुने ग्राहक ही दुकानों पर खरीदारी करने को पहुंचे।
घरों से नहीं निकले गांवों के ग्राहक
- शहर में बंद के दौरान भीड़ न होने का कारण देहात क्षेत्रों से लोगों का घरों से न निकलना भी रहा। दरअसल, शहर में कम से कम 70 प्रतिशत गांवों से आने वाले लोग ही खरीदार के रूप में शहर आते हैं। शहर के लोग काफी कम होते हैं। चूंकि भारत बंद का आवाहन कुछ दिनों पहले से किया गया था और लोगों को इसके बारे में पता था, इसलिए देहात क्षेत्रों से लोगों ने शहर की तरफ रुख नहीं किया, जिस कारण बाजारों में रोजाना की अपेक्षा भीड़ नहीं दिखी।
देहात क्षेत्रों में भी नहीं दिखा बंद का असर, रोजाना की तरह खुले बाजार
बदायूं। केवल शहर ही नहीं तहसील व अन्य देहात क्षेत्रों में भी बंद का कोई असर नहीं दिखाई दिया। सभी जगहों पर रोजाना की तरह दुकानें खुली रहीं। दातागंज, बिल्सी, सहसवान, बिसौली समेत अलापुर, उसांवा, उसहैत, दबतोरी, ओरछी, उघैती आदि स्थानों पर पूर्व की तरह दुकानें खुली रहीं और लोग खरीदारी करते हुए दिखाई दिए। सुरक्षा के मद्देनजर प्रमुख स्थानों पर पुलिस की तैनाती रही। कई जगहों पर पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों ने घूम कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा भी लिया।
बदायूं। किसानों के आंदोलन को देखते हुए डीएम कुमार प्रशांत ने एसएसपी संकल्प शर्मा के साथ मंडी चौराहा, भामाशाह चौक, लावेला चौक, गांधी ग्राउंड चौराहा, दातागंज तिराहा, नवादा, बाईपास होते हुए नौशेरा एवं लालपुल सहित जनपद के विभिन्न स्थानों पर जाकर स्थलीय निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। सभी चौराहों पर पर्याप्त पुलिस बल मौजूद रहा। डीएम ने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था के दृष्टिगत पूरे जनपद में एसडीएम और सीओ घूमते रहे। शहर के एप्रोच रोड पर बैरियर लगाए गए तथा सभी जगह मजिस्ट्रेट और पुलिस की ड्यूटी लगाई गई। कई जगहों पर ड्रोन कैमरे से भी निगरानी की गई।
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कृषि कानूनों का विरोध जिले के किसान नेता भी कर रहे हैं। उनके अनुसार कृषि कानून से वे पूंजीपतियों के गुलाम हो जाएंगे। कुछ विपक्षी दल भी किसान संगठनों का लगातार समर्थन कर रहे हैं। इन संगठनों ने मंगलवार को भारत बंद का आवाहन किया था। इससे पहले सोमवार को सपा ने भी कृषि कानून के विरोध में यात्रा निकालने का प्रयास किया था लेकिन पुलिस ने अधिकतर नेताओं को पहले ही नजरबंद कर लिया। पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव समेत कुछ सपा नेताओं को धरने के समय हिरासत में ले लिया गया। पुलिस की पूरी नजर मंगलवार को होने वाले बंद पर थी, जिसके लिए अधिकारियों ने पहले ही तैयारी कर ली थी। मंगलवार को सुबह 10 बजे से दुकानें खुलनी शुरू हो गईं। इसके बाद रोजाना की तरह दुकानें खुलने लगीं। कुछ दुकानदारों ने अपने शटर खोले लेकिन सामान निकालकर बाहर नहीं रखा। वहीं कुछ दुकानदारों ने अपना सामान बाहर सजा लिया। दोपहर 12 बजे तक शहर के सभी बाजार पूरी तरह खुले नजर आए।
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पहले दूसरों का जायजा लिया, फिर खोली दुकानें
- बंद के मद्देनजर ज्यादातर दुकानदारों ने अपनी दुकानें खोल ली थीं, लेकिन कुछ दुकानदार ऐसे भी थे जो अपनी दुकानों के बाहर खड़े होकर पहले इस बात का जायजा लेते रहे कि दूसरे लोग अपनी दुकानें खोल रहे हैं या नहीं। दूसरे की दुकानें खुलती देख उन्होंने भी अपनी दुकान खोल लीं।
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भीड़ से भरी रहने वाली सड़कें रहीं सूनी
- शहर का बड़ा बाजार, घंटाघर, सब्जी मंडी मार्केट, चूना मंडी आदि वह बाजार हैं जहां सुबह दुकानें खुलने के बाद भीड़ बढ़ने लगती है और दोपहर होने तक इन बाजारों में पैर रखने की जगह तक नहीं बचती। दुकानदारों द्वारा अपना सामान दुकानों के बाहर सजाने के बाद सड़कें भी संकरी हो जाती हैं, जिससे भीड़ और ज्यादा लगती है। रही सही कसर बाजारों में घुसने वाले ई रिक्शा और टेंपो वाले कर देते हैं, लेकिन मंगलवार को इन सभी बाजारों की सड़के सूनी दिखाई दीं। दुकानदार भी ग्राहकों का इंतजार करते दिखायी दिए।
इंडियन बैंक वाली रोड पर भी रहा सन्नाटा
-छह सड़का से गांधी ग्राउंड शिव मंदिर को जाने वाली सड़क पर दिन में काफी भीड़ रहती है। इस सड़क पर दिन में कई बार जाम लगता है लेकिन मंगलवार को इस रोड पर भी सन्नाटा छाया रहा। सुबह से लेकर शाम तक यह रोड खाली पड़ी रही। इस रोड पर स्थित इंडियन बैंक में भी रोजाना से कम ही ग्राहक आए। मढ़ई चौक समेत हलवाई चौक पर भी दुकानदार खाली बैठे रहे। शहर के गिने चुने ग्राहक ही दुकानों पर खरीदारी करने को पहुंचे।
घरों से नहीं निकले गांवों के ग्राहक
- शहर में बंद के दौरान भीड़ न होने का कारण देहात क्षेत्रों से लोगों का घरों से न निकलना भी रहा। दरअसल, शहर में कम से कम 70 प्रतिशत गांवों से आने वाले लोग ही खरीदार के रूप में शहर आते हैं। शहर के लोग काफी कम होते हैं। चूंकि भारत बंद का आवाहन कुछ दिनों पहले से किया गया था और लोगों को इसके बारे में पता था, इसलिए देहात क्षेत्रों से लोगों ने शहर की तरफ रुख नहीं किया, जिस कारण बाजारों में रोजाना की अपेक्षा भीड़ नहीं दिखी।
देहात क्षेत्रों में भी नहीं दिखा बंद का असर, रोजाना की तरह खुले बाजार
बदायूं। केवल शहर ही नहीं तहसील व अन्य देहात क्षेत्रों में भी बंद का कोई असर नहीं दिखाई दिया। सभी जगहों पर रोजाना की तरह दुकानें खुली रहीं। दातागंज, बिल्सी, सहसवान, बिसौली समेत अलापुर, उसांवा, उसहैत, दबतोरी, ओरछी, उघैती आदि स्थानों पर पूर्व की तरह दुकानें खुली रहीं और लोग खरीदारी करते हुए दिखाई दिए। सुरक्षा के मद्देनजर प्रमुख स्थानों पर पुलिस की तैनाती रही। कई जगहों पर पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों ने घूम कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा भी लिया।
बदायूं। किसानों के आंदोलन को देखते हुए डीएम कुमार प्रशांत ने एसएसपी संकल्प शर्मा के साथ मंडी चौराहा, भामाशाह चौक, लावेला चौक, गांधी ग्राउंड चौराहा, दातागंज तिराहा, नवादा, बाईपास होते हुए नौशेरा एवं लालपुल सहित जनपद के विभिन्न स्थानों पर जाकर स्थलीय निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। सभी चौराहों पर पर्याप्त पुलिस बल मौजूद रहा। डीएम ने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था के दृष्टिगत पूरे जनपद में एसडीएम और सीओ घूमते रहे। शहर के एप्रोच रोड पर बैरियर लगाए गए तथा सभी जगह मजिस्ट्रेट और पुलिस की ड्यूटी लगाई गई। कई जगहों पर ड्रोन कैमरे से भी निगरानी की गई।