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Budaun News: अब एक स्कैन से खुलेगा जीवन बचाने का रास्ता

Fri, 17 Jul 2026 01:41 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 17 Jul 2026 01:41 AM IST
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Now, a single scan will pave the way to saving lives.
बदायूं। हाईवे पर सड़क हादसे के बाद सबसे बड़ी चुनौती घायल को समय पर अस्पताल पहुंचाने की होती है। कई बार राहगीरों को यह तक पता नहीं होता है कि सबसे नजदीकी अस्पताल कौन-सा है या एंबुलेंस के लिए किस नंबर पर संपर्क करें। इसी समस्या को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। जिले से गुजरने वाले गंगा एक्सप्रेस-वे और प्रमुख राष्ट्रीय व राज्य राजमार्गों के टोल प्लाजा पर क्यूआर कोड लगाए जाएंगे।
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हाईवे पर स्थित टोल पर लगे क्यूआर कोड मोबाइल से स्कैन करते ही नजदीकी अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 108 एंबुलेंस सेवा, स्वास्थ्य विभाग के नोडल अधिकारी और संबंधित चिकित्सा प्रभारी के मोबाइल नंबर स्क्रीन पर दिखाई देंगे। साथ ही अस्पताल की दूरी और वहां तक पहुंचने का मार्ग भी उपलब्ध होगा।
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स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सड़क दुर्घटनाओं में पहला एक घंटा यानी गोल्डन ऑवर सबसे महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान घायल को उपचार मिल जाए तो उसकी जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है, लेकिन जानकारी के अभाव में कई बार लोग अस्पताल तलाशने में समय गंवा देते हैं।
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नई व्यवस्था के तहत टोल प्लाजा पर लगाए जाने वाले क्यूआर कोड में केवल नंबर ही नहीं, बल्कि जीपीएस आधारित लोकेशन भी जोड़ी जाएगी। इससे बाहरी राज्यों या दूसरे जिलों से गुजरने वाले वाहन चालक भी आसानी से नजदीकी अस्पताल तक पहुंच सकेंगे। स्वास्थ्य विभाग ने टोल प्रबंधन के साथ समन्वय शुरू कर दिया है। पहले चरण में जिले के प्रमुख टोल प्लाजा और हाईवे पर यह सुविधा शुरू होगी। इसके बाद आवश्यकता के अनुसार अन्य संवेदनशील स्थानों पर भी क्यूआर कोड लगाए जाएंगे। (संवाद)


क्यों जरूरी है यह व्यवस्था
- हादसे के बाद अस्पताल खोजने में लग जाता है समय।
- बाहरी जिलों के लोगों को नहीं होती स्थानीय जानकारी।
- समय पर इलाज न मिलने से बढ़ जाता है मौत का खतरा।
- गोल्डन ऑवर में इलाज मिलने पर बच सकती है घायल की जान

जिले से गंगा एक्सप्रेस-वे समेत कई हाईवे गुजर रहे हैं। इस पर अगर कोई दुर्घटना होती है, तो घायल को तत्काल इलाज उपलब्ध हो सके, इसको ध्यान में रखते हुए क्यूआर कोड लगाए जाएंगे। इससे आपातकालीन स्थिति में कोई भी व्यक्ति मोबाइल से स्कैन करके पास के अस्पताल का पता और वहां पर तैनात चिकित्साधिकारी का नंबर पा सकेगा, जिससे वह बात भी कर सकेगा। - डॉ. विकास शर्मा, सीएमओ
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