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घर से दूर रहे, संक्रमित हुए पर सेवा करने से पीछे नही हटे

Thu, 12 May 2022 12:51 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 12 May 2022 12:51 AM IST
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narsing Day
बदायूं। निजी अस्पताल हों या सरकारी। स्वास्थ्य सेवाओं में नर्स की अहम भूमिका होती है। कोरोना महामारी के दौरान नर्सिंग सेवाएं देने वाले स्टाफ ने जान जोखिम में डालकर घर से चौबीस घंटे दूर रहते हुए कोरोना संक्रमितों को सेवाएं दीं। कई तो ड्यूटी के दौरान संक्रमण का शिकार भी हो गईं। इसके बाद भी अपनी ड्यूटी पूरी निष्ठा से की। अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस पर उनकी सेवाओं को याद करना जरूरी है।
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माता-पिता, बहनों को डेंगू हुआ, मगर सेवाएं देती रहीं मरियम
सीएचसी सैदपुर में तैनात स्टाफ नर्स मरियम बी ने कोरोना संक्रमण के समय अपनी ड्यूटी को पूरी निष्ठा के साथ निभाया। इस दौरान उनके माता-पिता और दो बहनों को डेंगू भी हो गया, इसके बाद भी मरियम बी अपनी सेवाएं देती रहीं। दो बार अवार्ड कायाकल्प हासिल करने में उनकी बड़ी भूमिका रही। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए कई बार मरियम बी को पुरस्कृत भी किया जा चुका है। मरियम ने कोरोना की दूसरी और तीसरी लहर के दौरान भी बेहतर सेवाएं दीं।
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पहली लहर में संक्रमित होने के बाद भी पीछे नहीं हटे हरिओम
राजकीय मेडिकल में तैनात हरिओम वर्मा पुरुष स्टाफ नर्स हैं। कोरोना संक्रमण काल में राजकीय मेडिकल कॉलेज को कोविड-19 अस्पताल में तब्दील कर दिया गया था। हरिओम वर्मा को भी संक्रमितों की सेवा का मौका मिला। पहली लहर के दौरान ही वह खुद भी संक्रमित हो गए लेकिन स्वस्थ होने के बाद फिर से सेवास्थ्य सेवाओं में जुट गए। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान जिले में 100 से ज्यादा लोगों की मौत हुई लेकिन हरिओम जान जोखिम में डालने से पीछे नहीं हटे।
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कई दिन घर नहीं पहुंचीं, संक्रमित हुईं मगर पीछे नहीं हटीं रजनेश
राजकीय मेडिकल कॉलेज में तैनात स्टाफ नर्स रजनेश यादव कई दिन घर न पहुंचकर मेडिकल कॉलेज में संक्रमितों की सेवा करती रहीं। दूसरी लहर के दौरान संक्रमितों की सेवा में लगीं रजनेश भी संक्रमण का शिकार हो गईं। दूसरी लहर का व्यापक असर था। इस दौरान उनके परिवार के लोग भी डर गए। कुछ ही दिन में रजनेश स्वस्थ हो गईं और फिर से कोरोना संक्रमितों की सेवा करने लगीं। उनकी ड्यूटी लगातार संक्रमितों की सेवा में रही।
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