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Budaun News: सबसे ज्यादा मुसीबत बन रहे सांड़, रखने के इंतजाम भी नहीं
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(06 बीडीएन-13आर)सड़क पर घूमते छुट्टा सांड ।संवाद
बदायूं। जिले में छुट्टा पशुओं को संरक्षित करने के तमाम दावे किए जा रहे हैं लेकिन प्रशासन का सांड़ पर कोई ध्यान नहीं है, जबकि सबसे ज्यादा मुसीबत सांड़ बन रहे हैं। वह लोगों की हमले करके जान ले रहे हैं और लोगों की फसलें बर्बाद कर रहे हैं। आज भी सबसे ज्यादा सांड़ सड़क पर घूम रहे हैं। उन्हें गोशाला में रखने के कोई इंतजाम नहीं हैं।
डीएम मनोज कुमार के आदेश पर पिछले एक माह से विशेष अभियान चलाया जा रहा है। अब गोशालाओं की संख्या बढ़कर 253 तक पहुंच गई है। इसके बावजूद 35 नई गोशालाओं की जगह चिह्नित कर ली गई। कई और गोशालाएं बनाने का काम शुरू कर दिया है। दावा यह है कि अब तक जिले में 28 हजार से ज्यादा छुट्टा पशुओं को संरक्षित किया जा चुका है लेकिन सड़कों पर घूमते सांड़ जिला प्रशासन के दावे को फेल करते नजर आ रहे हैं।
सांड़ केवल शहर ही में नहीं, ग्रामीण क्षेत्र में भी इनकी संख्या ज्यादा है। और तो और ग्रामीण क्षेत्र में जो गोशालाएं बनाई गईं हैं। वहां केवल छुट्टा गायों को रखा जा रहा है। तमाम गांव के लोग सांड़ों को बंद करने की मांग कर चुके हैं लेकिन उन्हें केवल गाय बंद करने का नियम बता दिया जाता है।
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सांड़ बंद करने की कहीं भी कोशिश नहीं की गई। परिणाम यह हैं कि किसानों को अब भी कोई राहत नहीं है। उनकी फसलें पहले की तरह बर्बाद हो रही हैं। साथ ही उनकी जान को खतरा भी बना हुआ है। पिछले साल एक दर्जन से ज्यादा लोग इन सांड़ों के कारण ही काल के गाल में समा चुके हैं। इसके बावजूद जिला प्रशासन इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा। किसानों के सामने आज भी खतरा बना हुआ है। उनका नुकसान हो रहा है वह अलग।
- जिले में गोशाला बनाने का काम तेजी से चल रहा है। सांड़ के लिए एक गोशाला बनाने का प्रस्ताव गया हुआ है। कई गोशालाओं में सांड़ों को बंद भी रखा गया है। अभियान लगातार चल रहा है।
- डॉ. निरंकार सिंह मलिक, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी
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डीएम मनोज कुमार के आदेश पर पिछले एक माह से विशेष अभियान चलाया जा रहा है। अब गोशालाओं की संख्या बढ़कर 253 तक पहुंच गई है। इसके बावजूद 35 नई गोशालाओं की जगह चिह्नित कर ली गई। कई और गोशालाएं बनाने का काम शुरू कर दिया है। दावा यह है कि अब तक जिले में 28 हजार से ज्यादा छुट्टा पशुओं को संरक्षित किया जा चुका है लेकिन सड़कों पर घूमते सांड़ जिला प्रशासन के दावे को फेल करते नजर आ रहे हैं।
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सांड़ केवल शहर ही में नहीं, ग्रामीण क्षेत्र में भी इनकी संख्या ज्यादा है। और तो और ग्रामीण क्षेत्र में जो गोशालाएं बनाई गईं हैं। वहां केवल छुट्टा गायों को रखा जा रहा है। तमाम गांव के लोग सांड़ों को बंद करने की मांग कर चुके हैं लेकिन उन्हें केवल गाय बंद करने का नियम बता दिया जाता है।
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सांड़ बंद करने की कहीं भी कोशिश नहीं की गई। परिणाम यह हैं कि किसानों को अब भी कोई राहत नहीं है। उनकी फसलें पहले की तरह बर्बाद हो रही हैं। साथ ही उनकी जान को खतरा भी बना हुआ है। पिछले साल एक दर्जन से ज्यादा लोग इन सांड़ों के कारण ही काल के गाल में समा चुके हैं। इसके बावजूद जिला प्रशासन इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा। किसानों के सामने आज भी खतरा बना हुआ है। उनका नुकसान हो रहा है वह अलग।
- जिले में गोशाला बनाने का काम तेजी से चल रहा है। सांड़ के लिए एक गोशाला बनाने का प्रस्ताव गया हुआ है। कई गोशालाओं में सांड़ों को बंद भी रखा गया है। अभियान लगातार चल रहा है।
- डॉ. निरंकार सिंह मलिक, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी