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एक करोड़ बकाया, बार-बार गुल हो रही मेडिकल कॉलेज में बिजली
सार
राजकीय मेडिकल कॉलेज पर पावर कॉरपोरेशन का बिजली बिल 90 लाख रुपये से अधिक का बकाया हो गया है।इतने ज्यादा बिल का भुगतान न होने के कारण अब पावर कॉरपोरशन भी बार-बार बिजली गुल होने की समस्या पर ध्यान नहीं दे रहा है।बिल भुगतान के लिए पत्राचार किया जा रहा है।
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बदायूं का राजकीय मेडिकल कॉलेज। संवाद
- फोटो : BADAUN
विस्तार
बदायूं। राजकीय मेडिकल कॉलेज पर पावर कॉरपोरेशन का बिजली बिल 90 लाख रुपये से अधिक का बकाया हो गया है। ऐसे में मेडिकल कॉलेज में बार-बार बिजली गुल होने की समस्या पर पावर कॉरपोरेशन भी ध्यान नहीं दे रहा है। इससे मरीजों और तीमारदारों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
राजकीय मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में रोजाना तीन से चार हजार मरीज आते हैं। बड़ी संख्या में इमरजेंसी मामले भी यहां आते हैं। यहां का बिजली कनेक्शन 1100 किलोवाट का है और हर माह करीब 18 लाख रुपये का बिल आता है। इसका फिक्स चार्ज 2.70 लाख रुपये महीने है। अगस्त में मेडिकल कॉलेज में 2.32 लाख से ज्यादा यूनिट बिजली खर्च की गई। ऐसे में एक माह का बिल 18 लाख रुपये से अधिक का आया है।
पिछले बिलों का भुगतान भी मेडिकल कॉलेज ने नहीं किया है। ऐसे में मेडिकल कॉलेज पर पावर कॉरपोरेशन का 90 लाख, 10 हजार, 287 रुपये बकाया हो गया है। अक्सर बिजली की आंख मिचौली के कारण मरीजों के साथ तीमारदारों और स्टाफ को भी दिक्कत होती है। चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित होती हैं। इतने ज्यादा बिल का भुगतान न होने के कारण अब पावर कॉरपोरशन भी बार-बार बिजली गुल होने की समस्या पर ध्यान नहीं दे रहा है।
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ऑक्सीजन प्लांट बंद थे, फिर भी बढ़ता रहा बिल
दो आक्सीजन प्लांट होने के बावजूद हर माह करीब दस लाख रुपये की ऑक्सीन बाहर से खरीदने को लेकर पिछले दिनों मेडिकल कॉलेज सुर्खियों में आया था। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने भी नाराजगी जताई थी। गौर करने की बात यह है कि ऑक्सीजन प्लांट बंद थे, तब भी बिजली का बिल बढ़ता रहा। हालांकि प्राचार्य डॉ. धर्मेंद्र पाठक सफाई दे रहे थे कि ऑक्सीजन प्लांट चलाने से ज्यादा बिल आता है, ऐसे में बाहर से ऑक्सीजन खरीदी गई।
दो माह से डॉक्टरों के वेतन का भुगतान भी नहीं
मेडिकल कॉलेज के कुछ डॉक्टरों की मानें तो उन्हें दो माह से वेतन का भी भुगतान नहीं किया है। कॉलेज प्रशासन के अधिकारी इस संबंध में बात करने पर गोल-मोल जवाब देते हैं। आठ सितंबर को डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक की समीक्षा बैठक में मेडिकल कॉलेज प्रबंधन निशाने पर रहा था। करीब एक माह बाद भी व्यवस्थाओं में सुुुधार नहीं हुआ है।
मेडिकल कॉलेज पर 90 लाख से ज्यादा का बिजली बिल बकाया है। बिल भुगतान के लिए पत्राचार किया जा रहा है। बकाया भुगतान में कनेक्शन काटने की बात है, तो मेडिकल कॉलेज में ऐसा नहीं किया जा सकता। शासन स्तर से भुगतान होना है। बिजली सप्लाई सही ढंग से चल रही है। -राजनाथ सिंह, एक्सईन विद्युत वितरण खंड चतुर्थ
बजट की उपलब्धता होने पर बिजली बिल का बकाया जमा करा दिया जाएगा। डॉक्टरों के वेतन का भी भुगतान कर दिया जाएगा। डॉक्टरों के वेतन का भुगतान समय पर होता है। कभी कुछ तकनीकी कारणों की वजह से वेतन में देरी होना स्वभाविक है। -डॉ. सीपी सिंह, सीएमएस, राजकीय मेडिकल कॉलेज
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राजकीय मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में रोजाना तीन से चार हजार मरीज आते हैं। बड़ी संख्या में इमरजेंसी मामले भी यहां आते हैं। यहां का बिजली कनेक्शन 1100 किलोवाट का है और हर माह करीब 18 लाख रुपये का बिल आता है। इसका फिक्स चार्ज 2.70 लाख रुपये महीने है। अगस्त में मेडिकल कॉलेज में 2.32 लाख से ज्यादा यूनिट बिजली खर्च की गई। ऐसे में एक माह का बिल 18 लाख रुपये से अधिक का आया है।
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पिछले बिलों का भुगतान भी मेडिकल कॉलेज ने नहीं किया है। ऐसे में मेडिकल कॉलेज पर पावर कॉरपोरेशन का 90 लाख, 10 हजार, 287 रुपये बकाया हो गया है। अक्सर बिजली की आंख मिचौली के कारण मरीजों के साथ तीमारदारों और स्टाफ को भी दिक्कत होती है। चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित होती हैं। इतने ज्यादा बिल का भुगतान न होने के कारण अब पावर कॉरपोरशन भी बार-बार बिजली गुल होने की समस्या पर ध्यान नहीं दे रहा है।
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ऑक्सीजन प्लांट बंद थे, फिर भी बढ़ता रहा बिल
दो आक्सीजन प्लांट होने के बावजूद हर माह करीब दस लाख रुपये की ऑक्सीन बाहर से खरीदने को लेकर पिछले दिनों मेडिकल कॉलेज सुर्खियों में आया था। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने भी नाराजगी जताई थी। गौर करने की बात यह है कि ऑक्सीजन प्लांट बंद थे, तब भी बिजली का बिल बढ़ता रहा। हालांकि प्राचार्य डॉ. धर्मेंद्र पाठक सफाई दे रहे थे कि ऑक्सीजन प्लांट चलाने से ज्यादा बिल आता है, ऐसे में बाहर से ऑक्सीजन खरीदी गई।
दो माह से डॉक्टरों के वेतन का भुगतान भी नहीं
मेडिकल कॉलेज के कुछ डॉक्टरों की मानें तो उन्हें दो माह से वेतन का भी भुगतान नहीं किया है। कॉलेज प्रशासन के अधिकारी इस संबंध में बात करने पर गोल-मोल जवाब देते हैं। आठ सितंबर को डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक की समीक्षा बैठक में मेडिकल कॉलेज प्रबंधन निशाने पर रहा था। करीब एक माह बाद भी व्यवस्थाओं में सुुुधार नहीं हुआ है।
मेडिकल कॉलेज पर 90 लाख से ज्यादा का बिजली बिल बकाया है। बिल भुगतान के लिए पत्राचार किया जा रहा है। बकाया भुगतान में कनेक्शन काटने की बात है, तो मेडिकल कॉलेज में ऐसा नहीं किया जा सकता। शासन स्तर से भुगतान होना है। बिजली सप्लाई सही ढंग से चल रही है। -राजनाथ सिंह, एक्सईन विद्युत वितरण खंड चतुर्थ
बजट की उपलब्धता होने पर बिजली बिल का बकाया जमा करा दिया जाएगा। डॉक्टरों के वेतन का भी भुगतान कर दिया जाएगा। डॉक्टरों के वेतन का भुगतान समय पर होता है। कभी कुछ तकनीकी कारणों की वजह से वेतन में देरी होना स्वभाविक है। -डॉ. सीपी सिंह, सीएमएस, राजकीय मेडिकल कॉलेज