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आधुनिक होंगे सरकारी अस्पतालों के लेबर रूम
बदायूं।
Updated Sun, 10 Dec 2017 12:11 AM IST
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डेमो
- फोटो : डेमो
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आधुनिक होंगे सरकारी अस्पतालों के लेबर रूम
अमर उजाला एक्सक्लूसिव
नए प्रसव कक्ष में विशेषज्ञ डॉक्टर और अनुभवी कर्मचारी होंगे तैनात
संजय श्रीवास्तव
बदायूं। प्रदेश में जच्चा-बच्चा की मृत्यु दर कम करने को सभी सरकारी अस्पतालों के लेबर रूम (प्रसव कक्ष) को आधुनिक बनाया जाएगा। इनमें आधुनिक उपकरण, सभी तरह की सुविधाएं और श्रेणी के हिसाब से विशेषज्ञ डॉक्टर और कर्मचारी तैनात होंगे। यदि कोई बच्चा जन्म के तुरंत बाद रोता नहीं और सांस लेता है तब उसे हायर चिकित्सीय संस्थान भेजा जाएगा। इस संबंध में सभी जिलों के डीएम और सीएमओ को पत्र भेजा जा चुका है। बदायूं में इस योजना पर काम भी शुरू कर दिया गया है।
सरकारी अस्पतालों में अक्सर प्रसव के दौरान जच्चा या बच्चा की मौत हो जाने पर बवाल होता है। इसके पीछे माना जाता है कि सरकारी अस्पताल के प्रसव कक्ष (लेबर रूम) में सुविधाओं की खासी कमी होती है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों के प्रसव कक्ष आधुनिक सुविधाएं से युक्त किए जाएंगे। जहां जच्चा-बच्चा दोनों की जान की सुरक्षा की पूर्ण गारंटी रहेगी। आधुनिक लेबर रूम में बच्चे के लिए रेडियम वार्मर, ऑक्सीजन की सप्लाई, इमरजेंसी दवाएं, बच्चे को सघन चिकित्सा की किट आदि सुविधाएं होंगी। लेबर रूम में जच्चा की सुविधा को आकर्षक फोटो लगाए जाएंगे। यहां बाल रोग, स्त्री रोग विशेषज्ञ और बेहोशी के डॉक्टर तैनात किए जाएंगे। इस संबंध में एनएचएम निदेशक की ओर से सभी जिलों के डीएम, सीएमओ और अन्य अफसरों को पत्र भेजा जा चुका है। कई जिलों में इस पर कार्य भी शुरू कर दिया गया है।
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जिले में हैं 43 प्रसव कक्ष
जिले में स्थित सरकारी अस्पतालों में कुल 43 प्रसव कक्ष हैं। इनमें 18 एल वन, 22 एल-टू और तीन एल-थ्री श्रेणी के हैं। एल थ्री श्रेणी के प्रसव कक्ष जिला महिला अस्पताल, उझानी और बिसौली अस्पताल में हैं। इन सभी को आधुनिक बनाया जाएगा।
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जिले में जल्द आएगा बजट
एनएचएम निदेशक का आदेश आने के बाद विभागीय अवर अभियंता ने सभी 43 प्रसव कक्षों का निरक्षण किया। इसकी रिपोर्ट एनएचएम को भेज दी गई है। कहां कितना काम होना है इसका पूरा एस्टीमेट बनाकर भेजा गया है। इसी के अनुसार बजट आएगा।
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निदेशक का पत्र मिलने के बाद प्रसव कक्षों को आधुनिक बनाने का काम शुरू कर दिया गया है। प्रसव कक्षों के आधुनिक होने से निश्चित तौर पर जच्चा-बच्चा की मृत्यु दर में खासी कमी आएगी। जेई ने जिले के सभी अस्पतालों के लेबर रूम का निरीक्षण करने के बाद पूरी रिपोर्ट डीएम भी भेज दी है, जो शासन को जाएगी।
- डॉ. नेमी चंद्रा, सीएमओ
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नए प्रसव कक्ष में विशेषज्ञ डॉक्टर और अनुभवी कर्मचारी होंगे तैनात
संजय श्रीवास्तव
बदायूं। प्रदेश में जच्चा-बच्चा की मृत्यु दर कम करने को सभी सरकारी अस्पतालों के लेबर रूम (प्रसव कक्ष) को आधुनिक बनाया जाएगा। इनमें आधुनिक उपकरण, सभी तरह की सुविधाएं और श्रेणी के हिसाब से विशेषज्ञ डॉक्टर और कर्मचारी तैनात होंगे। यदि कोई बच्चा जन्म के तुरंत बाद रोता नहीं और सांस लेता है तब उसे हायर चिकित्सीय संस्थान भेजा जाएगा। इस संबंध में सभी जिलों के डीएम और सीएमओ को पत्र भेजा जा चुका है। बदायूं में इस योजना पर काम भी शुरू कर दिया गया है।
सरकारी अस्पतालों में अक्सर प्रसव के दौरान जच्चा या बच्चा की मौत हो जाने पर बवाल होता है। इसके पीछे माना जाता है कि सरकारी अस्पताल के प्रसव कक्ष (लेबर रूम) में सुविधाओं की खासी कमी होती है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों के प्रसव कक्ष आधुनिक सुविधाएं से युक्त किए जाएंगे। जहां जच्चा-बच्चा दोनों की जान की सुरक्षा की पूर्ण गारंटी रहेगी। आधुनिक लेबर रूम में बच्चे के लिए रेडियम वार्मर, ऑक्सीजन की सप्लाई, इमरजेंसी दवाएं, बच्चे को सघन चिकित्सा की किट आदि सुविधाएं होंगी। लेबर रूम में जच्चा की सुविधा को आकर्षक फोटो लगाए जाएंगे। यहां बाल रोग, स्त्री रोग विशेषज्ञ और बेहोशी के डॉक्टर तैनात किए जाएंगे। इस संबंध में एनएचएम निदेशक की ओर से सभी जिलों के डीएम, सीएमओ और अन्य अफसरों को पत्र भेजा जा चुका है। कई जिलों में इस पर कार्य भी शुरू कर दिया गया है।
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जिले में हैं 43 प्रसव कक्ष
जिले में स्थित सरकारी अस्पतालों में कुल 43 प्रसव कक्ष हैं। इनमें 18 एल वन, 22 एल-टू और तीन एल-थ्री श्रेणी के हैं। एल थ्री श्रेणी के प्रसव कक्ष जिला महिला अस्पताल, उझानी और बिसौली अस्पताल में हैं। इन सभी को आधुनिक बनाया जाएगा।
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जिले में जल्द आएगा बजट
एनएचएम निदेशक का आदेश आने के बाद विभागीय अवर अभियंता ने सभी 43 प्रसव कक्षों का निरक्षण किया। इसकी रिपोर्ट एनएचएम को भेज दी गई है। कहां कितना काम होना है इसका पूरा एस्टीमेट बनाकर भेजा गया है। इसी के अनुसार बजट आएगा।
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निदेशक का पत्र मिलने के बाद प्रसव कक्षों को आधुनिक बनाने का काम शुरू कर दिया गया है। प्रसव कक्षों के आधुनिक होने से निश्चित तौर पर जच्चा-बच्चा की मृत्यु दर में खासी कमी आएगी। जेई ने जिले के सभी अस्पतालों के लेबर रूम का निरीक्षण करने के बाद पूरी रिपोर्ट डीएम भी भेज दी है, जो शासन को जाएगी।
- डॉ. नेमी चंद्रा, सीएमओ