{"_id":"5177d201c3a988a698bdfec8fb373d18","slug":"kuposhan-hindi-news-2","type":"story","status":"publish","title_hn":"सैजनी में तीन माह में 15 बच्चों का कुपोषण हुआ दूर! ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सैजनी में तीन माह में 15 बच्चों का कुपोषण हुआ दूर!
बदायूं।
Updated Wed, 04 Feb 2015 11:59 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिले में कुपोषण दूर करने के चल रहे अभियान के तहत सीडीओ द्वारा गोद लिए गए दो गांवों में से एक सैंजनी का निरीक्षण किया। इसमें कुल 20 कुपोषित बच्चों में से मात्र पांच बच्चे ही कुपोषित मिले। तीन माह में 15 बच्चे कुपोषण से मुक्त हो गए। सीडीओ ने बाल विकास विभाग और सवास्थ्य विभाग के रिकार्ड पर आशंका जताई। उन्होंने विभाग की सुपरवाइजर और स्वास्थ्य विभाग की एएनएम को प्रतिकूल प्रविष्टि दी है। सीडीपीओ को भी चेतावनी दी।
जिले में कुपोषण दूर करने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत नवंबर-14 में सीडीओ देवेंद्र सिंह कुशवाहा ने सैंजनी और चितौरा दो गांव गोद लिए थे। उस समय सैंजनी गांव में आठ अति कुपोषित और 12 कुपोषित बच्चों की संख्या थी। तीन महीने बाद गांव का सीडीओ ने निरीक्षण किया तो पता लगा कि गांव से आठ अति कुपोषित और सात कुपोषित बच्चों को पोषित की श्रेणी में ला दिया गया है। केवल पांच बच्चे कुपोषित बच्चों में रह गए हैं। इन्हें भी कृुपोषण के दायरे से बाहर निकाले जाने का प्रयास किया जा रहा है।
सीडीओ ने सर्वे रजिस्टर अन्य योजना के तहत ब्योरा आदि का रखरखाव में ढिलाई और योजना के संबंध में पूछे गए सवालों का जवाब न दिए जाने पर नाराजगी जताई। ग्राम स्वास्थ्य समिति को मिलने वाली 10,000 रुपये की रकम खर्च न किए जाने, स्वास्थ्य परीक्षण संबंधी रजिस्टर न होने पर बाल विकास विभाग की मुख्य सेविका सिद्धा कटियार और एएनएम मुन्नी को प्रतिकूल प्रविष्टि दी। सीडीपीओ को चेताया कि वह निरंतर निरीक्षण कर सुधार के प्रयास करें। सीडीओ ने यहां बैठक में कहा कि कार्यवाही रजिस्टर में प्रधान और संबंधित के हस्ताक्षर होना भी जरूरी हैं। बाद में गर्भवती महिलाओं को पुष्टाहार का वितरण कराया।
विज्ञापन
विज्ञापन
जिले में कुपोषण दूर करने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत नवंबर-14 में सीडीओ देवेंद्र सिंह कुशवाहा ने सैंजनी और चितौरा दो गांव गोद लिए थे। उस समय सैंजनी गांव में आठ अति कुपोषित और 12 कुपोषित बच्चों की संख्या थी। तीन महीने बाद गांव का सीडीओ ने निरीक्षण किया तो पता लगा कि गांव से आठ अति कुपोषित और सात कुपोषित बच्चों को पोषित की श्रेणी में ला दिया गया है। केवल पांच बच्चे कुपोषित बच्चों में रह गए हैं। इन्हें भी कृुपोषण के दायरे से बाहर निकाले जाने का प्रयास किया जा रहा है।
विज्ञापन
सीडीओ ने सर्वे रजिस्टर अन्य योजना के तहत ब्योरा आदि का रखरखाव में ढिलाई और योजना के संबंध में पूछे गए सवालों का जवाब न दिए जाने पर नाराजगी जताई। ग्राम स्वास्थ्य समिति को मिलने वाली 10,000 रुपये की रकम खर्च न किए जाने, स्वास्थ्य परीक्षण संबंधी रजिस्टर न होने पर बाल विकास विभाग की मुख्य सेविका सिद्धा कटियार और एएनएम मुन्नी को प्रतिकूल प्रविष्टि दी। सीडीपीओ को चेताया कि वह निरंतर निरीक्षण कर सुधार के प्रयास करें। सीडीओ ने यहां बैठक में कहा कि कार्यवाही रजिस्टर में प्रधान और संबंधित के हस्ताक्षर होना भी जरूरी हैं। बाद में गर्भवती महिलाओं को पुष्टाहार का वितरण कराया।
विज्ञापन