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खाद संकट से अभी मुक्ति नहीं मिलने वाली
बदायूं।
Updated Mon, 09 Feb 2015 12:38 AM IST
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अफसरों की व्यवस्था इतनी ढीलीढाली है कि जिले में आसानी से किसानों तक खाद नहीं पहुंच पा रही है। खाद का पर्याप्त स्टाक होने के बावजूद समितियों पर काफी हाथ खींचकर आपूर्ति की जा रही है। नतीजा यह है कि समितियों पर किसानों को खाद मिलने से पहले ही स्टाक खत्म हो जाता है।
किसानों की खाद की जरूरत समय रहते पूरी नहीं हो पा रही है फिर भी अफसर बेपरवाह हैं। हालात यह हैं कि अगर किसी समिति की जरूरत एक हजार कट्टे की है तो उस पर एक बार में महज चार-पांच सौ कट्टे ही खाद भेजी जा रही है। जाहिर है कि यह स्टाक सारे किसानों की जरूरत पूरी होने से पहले ही खत्म हो जाता है। फिर समितियों पर दोबारा कम से कम दस दिन बाद खाद भेजी जाती है। तब तक किसानों को इंतजार करना पड़ता है।
बता दें कि जिले में 132 सहकारी समितियां हैं। इनमें 10 समितियां बंद चल रही हैं। लगभग 122 समितियों को खाद जा रही है। इन समितियों पर शुरू से अबतक 2200 मीट्रिक टन खाद ही भेजी गई है। जबकि माना जा रहा है कि इन समितियों पर कम से कम 10000 मीट्रिक टन खाद भेजी जानी चाहिए थी।
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बारिश ने भी बढ़ा दी मांग
इस माह दो बार बारिश हो जाने से भी खाद की मांग एकाएक बढ़ी है। इससे स्थिति और बिगड़ गई लेकिन अब मांग में कुछ कमी आई है। अगर 15 फरवरी तक हालात में सुधार नहीं आया तो किसानों का आक्रोश फूट सकता है।
जिले में रेलवे की रैक न होना मुसीबत
जिले में रेलवे की रैक न होना भी बड़ी समस्या है। जहां रैक लगती है वहां कई स्थानों को खाद चली जाती है। बड़ी रेल लाइन का काम जिले में चल रहा है। माना जा रहा है कि अगले वर्ष तक जिले में रैक लगेगी तो यह समस्या कम हो जाएगी। उझानी में रैक के लिए स्थान तय हो चुका है।
खाद का निर्धारित मूल्य
यूरिया- 334.00 रुपये
नीम कोडिड- 348.00 रुपये
निरीक्षण जारी
जिला कृषि अधिकारी आरके सिंह ने कहा है कि रविवार को 800 मीट्रिक टन खाद की आमद हुई है। सोमवार को यूपी एग्रो के बिल्सी, इस्लामनगर इफ्को के बदायूं, बिसौली और उझानी सेंटर और 16 समितियों पर खाद पहुंच जाएगी। इनका वितरण भी सोमवार को होगा। वह वितरण के समय निरीक्षण उसी प्रकार जारी रखेंगे, जैसे अब तक किया जा रहा था।
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किसानों की खाद की जरूरत समय रहते पूरी नहीं हो पा रही है फिर भी अफसर बेपरवाह हैं। हालात यह हैं कि अगर किसी समिति की जरूरत एक हजार कट्टे की है तो उस पर एक बार में महज चार-पांच सौ कट्टे ही खाद भेजी जा रही है। जाहिर है कि यह स्टाक सारे किसानों की जरूरत पूरी होने से पहले ही खत्म हो जाता है। फिर समितियों पर दोबारा कम से कम दस दिन बाद खाद भेजी जाती है। तब तक किसानों को इंतजार करना पड़ता है।
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बता दें कि जिले में 132 सहकारी समितियां हैं। इनमें 10 समितियां बंद चल रही हैं। लगभग 122 समितियों को खाद जा रही है। इन समितियों पर शुरू से अबतक 2200 मीट्रिक टन खाद ही भेजी गई है। जबकि माना जा रहा है कि इन समितियों पर कम से कम 10000 मीट्रिक टन खाद भेजी जानी चाहिए थी।
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बारिश ने भी बढ़ा दी मांग
इस माह दो बार बारिश हो जाने से भी खाद की मांग एकाएक बढ़ी है। इससे स्थिति और बिगड़ गई लेकिन अब मांग में कुछ कमी आई है। अगर 15 फरवरी तक हालात में सुधार नहीं आया तो किसानों का आक्रोश फूट सकता है।
जिले में रेलवे की रैक न होना मुसीबत
जिले में रेलवे की रैक न होना भी बड़ी समस्या है। जहां रैक लगती है वहां कई स्थानों को खाद चली जाती है। बड़ी रेल लाइन का काम जिले में चल रहा है। माना जा रहा है कि अगले वर्ष तक जिले में रैक लगेगी तो यह समस्या कम हो जाएगी। उझानी में रैक के लिए स्थान तय हो चुका है।
खाद का निर्धारित मूल्य
यूरिया- 334.00 रुपये
नीम कोडिड- 348.00 रुपये
निरीक्षण जारी
जिला कृषि अधिकारी आरके सिंह ने कहा है कि रविवार को 800 मीट्रिक टन खाद की आमद हुई है। सोमवार को यूपी एग्रो के बिल्सी, इस्लामनगर इफ्को के बदायूं, बिसौली और उझानी सेंटर और 16 समितियों पर खाद पहुंच जाएगी। इनका वितरण भी सोमवार को होगा। वह वितरण के समय निरीक्षण उसी प्रकार जारी रखेंगे, जैसे अब तक किया जा रहा था।