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अफसरों को गुमराह कर झोलाछाप को बचाने वाले बाबू पर गिरी गाज
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बदायूं। अफसरों को गुमराह कर झोलाछाप को कार्रवाई से बचाने के मामले में आरोपी बाबू संजीव कुमार को एडी हेल्थ डॉ. राकेश दुबे के निर्देश पर सीएमओ डॉ. मंजीत कुमार ने पटल से हटा दिया है। निदेशक चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाओं के निर्देश पर मामले में जांच खुद एडी हेल्थ ने की थी। उन्होंने प्रथम दृष्टया बाबू को दोषी पाया था।
पिछले दिनों स्वास्थ्य विभाग ने जिले में झोलाछाप के खिलाफ बड़े स्तर पर कार्रवाई की थी। एक हजार से ज्यादा झोलाछाप के खिलाफ अलग-अलग थानों में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। जनपदीय पंजीकरण और झोलाछाप नियंत्रण सेल में तैनात संजीव नाम का बाबू झोलाछापों को बचाने के लिए अफसरों को गुमराह कर रहा था। बाबू ने वागीश नाम के झोलाछाप का नाम और पता उसने गलत लिखकर दिया। इससे झोलाछाप पर कार्रवाई नहीं हो सकी। नवंबर में इसकी शिकायत निदेशक चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाओं से की गई। निदेशक ने मामले में एडी हेल्थ डॉ. राकेश दुबे को जांच के निर्देश दिए थे। एडी हेल्थ ने जांच में संजीव कुमार पर आरोपों को सही पाया। उन्होंने 23 दिसंबर को पत्र जारी कर सीएमओ बदायूं को संजीव को पटल से हटाने के निर्देश दिए, जिस पर सीएमओ डॉ. मंजीत कुमार ने बृहस्पतिवार को उसे पटल से हटा दिया। संजीव के स्थान पर सुरेश चंद्र को जिम्मेेदारी दी गई है। हालांकि, शुक्रवार को भी संजीव अपने पटल पर ही काम करता दिखा। सीएमओ ने बताया कि बाबू संजीव को हटा दिया गया है। रही बात शुकवार को उसके काम करने की तो चार्ज बदलने की प्रक्रिया के चलते ऐसा हुआ है।
झोलाछाप कर रहे है मरीजों का इलाज
बिल्सी। तहसील क्षेत्र के गांव मिर्जापुर शोहरा समेत अहमदनगर असौली, अफजलपुर-छगनपुर, तरैंचा, बीबीगंज, रिसौली, सिरासोल, निजामपुर, खैरी, पिंडौल, निजामपुर, सतेती, सुंदरनगर, पहाड़पुर, नगलाडल्लू, सिमर्राभोजपुर, बांस बरोलिया आदि गांव में इन दिनों स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की अनदेखी के कारण दर्जनों झोलाछाप मरीजों का इलाज करने में लगे हुए हैं। जिससे लोगों में रोष है। बताया जाता है कि इन गांवों में स्वास्थ्य विभाग की टीम बहुत कम जाती है। जिस कारण झोलाछाप मरीजों का इलाज कर लोगों को ठग रहे हैं। कभी-कभी इनके द्वारा गलत दवाओं के सेवन से मरीजों की हालत बिगड़ जाती है। लोगों ने इसको लेकर कई बार शिकायत की है। मगर किसी ने कोई ध्यान नहीं दिया है। जिससे इन लोगों के हौसले बुलंद बने हुए हैं।
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पिछले दिनों स्वास्थ्य विभाग ने जिले में झोलाछाप के खिलाफ बड़े स्तर पर कार्रवाई की थी। एक हजार से ज्यादा झोलाछाप के खिलाफ अलग-अलग थानों में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। जनपदीय पंजीकरण और झोलाछाप नियंत्रण सेल में तैनात संजीव नाम का बाबू झोलाछापों को बचाने के लिए अफसरों को गुमराह कर रहा था। बाबू ने वागीश नाम के झोलाछाप का नाम और पता उसने गलत लिखकर दिया। इससे झोलाछाप पर कार्रवाई नहीं हो सकी। नवंबर में इसकी शिकायत निदेशक चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाओं से की गई। निदेशक ने मामले में एडी हेल्थ डॉ. राकेश दुबे को जांच के निर्देश दिए थे। एडी हेल्थ ने जांच में संजीव कुमार पर आरोपों को सही पाया। उन्होंने 23 दिसंबर को पत्र जारी कर सीएमओ बदायूं को संजीव को पटल से हटाने के निर्देश दिए, जिस पर सीएमओ डॉ. मंजीत कुमार ने बृहस्पतिवार को उसे पटल से हटा दिया। संजीव के स्थान पर सुरेश चंद्र को जिम्मेेदारी दी गई है। हालांकि, शुक्रवार को भी संजीव अपने पटल पर ही काम करता दिखा। सीएमओ ने बताया कि बाबू संजीव को हटा दिया गया है। रही बात शुकवार को उसके काम करने की तो चार्ज बदलने की प्रक्रिया के चलते ऐसा हुआ है।
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झोलाछाप कर रहे है मरीजों का इलाज
बिल्सी। तहसील क्षेत्र के गांव मिर्जापुर शोहरा समेत अहमदनगर असौली, अफजलपुर-छगनपुर, तरैंचा, बीबीगंज, रिसौली, सिरासोल, निजामपुर, खैरी, पिंडौल, निजामपुर, सतेती, सुंदरनगर, पहाड़पुर, नगलाडल्लू, सिमर्राभोजपुर, बांस बरोलिया आदि गांव में इन दिनों स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की अनदेखी के कारण दर्जनों झोलाछाप मरीजों का इलाज करने में लगे हुए हैं। जिससे लोगों में रोष है। बताया जाता है कि इन गांवों में स्वास्थ्य विभाग की टीम बहुत कम जाती है। जिस कारण झोलाछाप मरीजों का इलाज कर लोगों को ठग रहे हैं। कभी-कभी इनके द्वारा गलत दवाओं के सेवन से मरीजों की हालत बिगड़ जाती है। लोगों ने इसको लेकर कई बार शिकायत की है। मगर किसी ने कोई ध्यान नहीं दिया है। जिससे इन लोगों के हौसले बुलंद बने हुए हैं।
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