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‘...सारे आलम में महकती है वफा की खुश्बू’
Bisuli
Updated Tue, 09 Jun 2015 11:50 PM IST
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हजरत मलंग शाह बाबा के सालाना दो रोजा उर्स में मुशायरे का आगाज कुरान ए पाक की तिलावत से किया गया। नात ए पाक सूफी सरमद ने पेश की। मुशायरे में शायरों ने अपने कलाम पेश कर श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी।
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फहमी बदायूंनी ने फरमाया-
सितारे लब्ज बनते जा रहे हैं
खुदा तेरा कसीदा लिख रहा है।
बाबर खां आसी ने सुनाया-
कयाम ए दीने मुहम्मद दो सुतूनों पर,
इधर है जाते ए खदीजा, इधर अबूतालिब।
कवि अभीक्ष पाठक आहत ने सुुनाया-
तब कहेंगे हम कि लो हम भी सिकंदर हो गए
उनकी पंगधूली के जो जर्रे मयस्सर हो गए।
यूसुफ सहसवानी ने कहा-
सारे आलम में महकती है वफा की खुशबू,
जिस अदा से किया सजदा उस अदा की खुशबू।
शायर राहिल अनवर, अहमद अजीम, मशकूर अहमद नज्मी, कासिम खैरवी ने अपने अंदाज में शायरी पेश की। इस मौके पर किश्वर अली, शाकिर अली, जाकिर अली, मुस्तफा अली, कल्लू ठेकेदार, जाफर बेग, बाबू बेग मौजूद रहे।
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