{"_id":"667a0815f31e5c4ffa00ef37","slug":"illegal-recovery-in-womens-hospital-newborn-lost-his-life-badaun-news-c-123-1-sbly1018-121102-2024-06-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Budaun News: महिला अस्पताल में अवैध वसूली, नवजात की चली गई जान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Budaun News: महिला अस्पताल में अवैध वसूली, नवजात की चली गई जान
Tue, 25 Jun 2024 05:28 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
Updated Tue, 25 Jun 2024 05:28 AM IST
विज्ञापन
महिला अस्पताल के पीएनसी वार्ड में भर्ती प्रसूता। संवाद
बदायूं। महिला अस्पताल में प्रसव के नाम पर अवैध वसूली रुकने का नाम नहीं ले रही है। आरोप है कि रविवार को वसूली न देने पर जच्चा-बच्चा का इलाज नहीं किया गया तो देर शाम नवजात ने दम तोड़ दिया। चार दिन से लगातार चार गर्भवती महिलाओं को रुपये न देने पर रेफर करने के मामले सामने आए हैं। उनका कुसूर सिर्फ इतना था कि उनके पास रिश्वत देने को रुपये नहीं थे।
थाना क्षेत्र अलापुर क्षेत्र के गांव मुगर्रा जरासी निवासी हेमसिंह रविवार को पत्नी अर्चना को महिला अस्पताल लेकर आए थे। उस वक्त रचना प्रसव पीड़ा से तड़प रहीं थीं, कोई डॉक्टर अस्पताल में नहीं थी। उसे तड़पता देख तीमारदारों ने ड्यूटी पर तैनात नर्सों से देखने को कहा। तैनात कर्मचारी ने छह हजार रुपये की मांग कर दी।
रुपये न होने की बात कही तो बहाना बनाकर टालते रहे। कर्मचारियों ने जच्चा-बच्चा दोनों को खतरा बताया। इधर, कर्मचारी रुपये लेने की जुगत में लगे थे कि तड़पती महिला ने बेटे को जन्म दे दिया। बच्चा होने के बाद परिजन शांत हो गए। डॉक्टर और कर्मचारियों की लापरवाही से ठीक से इलाज नहीं किया गया, जिससे नवजात की देर शाम मौत हो गई। परिजनों ने जिला महिला अस्पताल में लूटमार करने का आरोप लगाया है। कहा कि रुपये न देने पर इलाज में लापरवाही की गई, इसके चलते नवजात की जान चली गई।
विज्ञापन
-- -- -
ऑपरेशन कहकर डरा देते हैं डॉक्टर, कर्मचारी
आरोप है कि जिला महिला अस्पताल के चिकित्सक अपने काम से बचने के लिए प्रसूता के परिवार वालों को ऑपरेशन की बात कहकर डरा देते हैं। महिला अस्पताल में जब कोई प्रसूता पहुंचती है तो चिकित्सक उसका परीक्षण कर सबसे पहले ऑपरेशन की बात कहते हैं। इससे परिवार वाले प्रसूता को किसी प्राइवेट अस्पताल में ले जाएं। रविवार शाम को भी जिला महिला अस्पताल की डॉक्टर ने एक प्रसूता का परीक्षण करने के बाद उसके पति से कहा ऑपरेशन करना पड़ सकता है, इससे घरवाले डर गए।
--
डॉक्टर के सामने महिला बोली- नर्स से रुपये वापस कराओ
रविवार रात करीब दस बजे महिला डॉक्टर प्रसूताओं को देख रहीं थीं। इसी दौरान एक महिला पहुंची और बोली- डॉक्टर साहब नर्स ने दवाई के नाम पर पांच सौ रुपये लिए हैं। उसके बाद भी उसकी देखरेख नहीं की जा रही है। मेरे पैसे वापस करा दो। महिला की बात सुनने के बाद डॉक्टर ने कहा कि आप लोग खुद ही नर्सों को पैसा देकर उनकी आदत खराब करते हो, बाद में शिकायत करते हो।
केस-1
रविवार शाम सात बजे प्रसव पीड़ा होने पर जरीफनगर निवासी रेनू के परिजन महिला अस्पताल पहुंचे। नर्स ने देखने के बाद कहा कि ऑपरेशन होगा, अगर सात हजार खर्च कर सकते हो तो बताओ नहीं तो कहीं प्राइवेट में ले जाओ। परिजन काफी समय तक मिन्नतें करते रहे लेकिन रुपये के अभाव में भर्ती नहीं किया। हारकर उसके परिजन शहर के निजी अस्पताल ले गए जहां उसने सामान्य प्रसव से बच्ची को जन्म दिया।
केस-2
हजरजतपुर के राजकुमार ने प्रसव पीड़ा होने पर शनिवार को पत्नी सुनीता को महिला अस्पताल में भर्ती कराया था। उस वक्त अस्पताल में कोई महिला डॉक्टर नहीं थी। सुनीता भी प्रसव पीड़ा से कराह रही थीं। नर्स ने उन्हें देखा और कहां की तुम्हारी पत्नी की हालत सीरियस है, तत्काल ऑपरेशन करना होगा। इसके लिए छह हजार रुपये की मांग की गई। परिजन सुनीता को लेकर निजी अस्पताल चले गए।
प्रसूताओं से पैसे लेने की बात उनके संज्ञान में नहीं है। रविवार रात अस्पताल में महिला डॉक्टर के न होने की शिकायत मिली थी। तुरंत डॉक्टर को भेजा गया। स्टाफ नर्स और डॉक्टर की वसूली की शिकायत मिलती है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. इंदुकांत वर्मा, सीएमएस
विज्ञापन
थाना क्षेत्र अलापुर क्षेत्र के गांव मुगर्रा जरासी निवासी हेमसिंह रविवार को पत्नी अर्चना को महिला अस्पताल लेकर आए थे। उस वक्त रचना प्रसव पीड़ा से तड़प रहीं थीं, कोई डॉक्टर अस्पताल में नहीं थी। उसे तड़पता देख तीमारदारों ने ड्यूटी पर तैनात नर्सों से देखने को कहा। तैनात कर्मचारी ने छह हजार रुपये की मांग कर दी।
विज्ञापन
रुपये न होने की बात कही तो बहाना बनाकर टालते रहे। कर्मचारियों ने जच्चा-बच्चा दोनों को खतरा बताया। इधर, कर्मचारी रुपये लेने की जुगत में लगे थे कि तड़पती महिला ने बेटे को जन्म दे दिया। बच्चा होने के बाद परिजन शांत हो गए। डॉक्टर और कर्मचारियों की लापरवाही से ठीक से इलाज नहीं किया गया, जिससे नवजात की देर शाम मौत हो गई। परिजनों ने जिला महिला अस्पताल में लूटमार करने का आरोप लगाया है। कहा कि रुपये न देने पर इलाज में लापरवाही की गई, इसके चलते नवजात की जान चली गई।
विज्ञापन
ऑपरेशन कहकर डरा देते हैं डॉक्टर, कर्मचारी
आरोप है कि जिला महिला अस्पताल के चिकित्सक अपने काम से बचने के लिए प्रसूता के परिवार वालों को ऑपरेशन की बात कहकर डरा देते हैं। महिला अस्पताल में जब कोई प्रसूता पहुंचती है तो चिकित्सक उसका परीक्षण कर सबसे पहले ऑपरेशन की बात कहते हैं। इससे परिवार वाले प्रसूता को किसी प्राइवेट अस्पताल में ले जाएं। रविवार शाम को भी जिला महिला अस्पताल की डॉक्टर ने एक प्रसूता का परीक्षण करने के बाद उसके पति से कहा ऑपरेशन करना पड़ सकता है, इससे घरवाले डर गए।
डॉक्टर के सामने महिला बोली- नर्स से रुपये वापस कराओ
रविवार रात करीब दस बजे महिला डॉक्टर प्रसूताओं को देख रहीं थीं। इसी दौरान एक महिला पहुंची और बोली- डॉक्टर साहब नर्स ने दवाई के नाम पर पांच सौ रुपये लिए हैं। उसके बाद भी उसकी देखरेख नहीं की जा रही है। मेरे पैसे वापस करा दो। महिला की बात सुनने के बाद डॉक्टर ने कहा कि आप लोग खुद ही नर्सों को पैसा देकर उनकी आदत खराब करते हो, बाद में शिकायत करते हो।
केस-1
रविवार शाम सात बजे प्रसव पीड़ा होने पर जरीफनगर निवासी रेनू के परिजन महिला अस्पताल पहुंचे। नर्स ने देखने के बाद कहा कि ऑपरेशन होगा, अगर सात हजार खर्च कर सकते हो तो बताओ नहीं तो कहीं प्राइवेट में ले जाओ। परिजन काफी समय तक मिन्नतें करते रहे लेकिन रुपये के अभाव में भर्ती नहीं किया। हारकर उसके परिजन शहर के निजी अस्पताल ले गए जहां उसने सामान्य प्रसव से बच्ची को जन्म दिया।
केस-2
हजरजतपुर के राजकुमार ने प्रसव पीड़ा होने पर शनिवार को पत्नी सुनीता को महिला अस्पताल में भर्ती कराया था। उस वक्त अस्पताल में कोई महिला डॉक्टर नहीं थी। सुनीता भी प्रसव पीड़ा से कराह रही थीं। नर्स ने उन्हें देखा और कहां की तुम्हारी पत्नी की हालत सीरियस है, तत्काल ऑपरेशन करना होगा। इसके लिए छह हजार रुपये की मांग की गई। परिजन सुनीता को लेकर निजी अस्पताल चले गए।
प्रसूताओं से पैसे लेने की बात उनके संज्ञान में नहीं है। रविवार रात अस्पताल में महिला डॉक्टर के न होने की शिकायत मिली थी। तुरंत डॉक्टर को भेजा गया। स्टाफ नर्स और डॉक्टर की वसूली की शिकायत मिलती है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. इंदुकांत वर्मा, सीएमएस

महिला अस्पताल के पीएनसी वार्ड में भर्ती प्रसूता। संवाद