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Budaun News: रूपन पांडेय मंदिर में हिंदू कर रहे पूजा और मुस्लिम इबादत

Tue, 02 Sep 2025 01:35 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 02 Sep 2025 01:35 AM IST
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Hindus are worshiping and Muslims are praying in Rupan Pandey temple
साधूराम पुजारी।
कादरचौक। नूरपुर गांव के पास झील और रेत के टीले के बीच रूपन पांडेय मंदिर हिंदू और मुसलमानों के लिए आस्था का केंद्र है। रविवार को यहां मेला शुरू हो गया है। बारिश के कारण मेला अस्त-व्यस्त रहा। फिर भीहिंदू समुदाय के लोग अपनी बारी पर यहां पूजा पाठ करने पहुंचे। उसके बाद मुस्लिम लोग इबादत करने पहुंचेंगे।
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ग्रामीणों ने बताया कि 200 साल पहले नूरपुर झील के पास संत रूपन पांडेय ठहरे थे। उनके चमत्कारों से हिंदू और मुसलमान सभी प्रभावित थे। एक दिन वह भक्तों के सामने सशरीर अदृश्य हो गए थे। जहां पर संत अदृश्य हुए थे, वहीं पर पीपल का एक पेड़ है। हिंदू और मुसलमान दोनों ही इस पर अपनी दावेदारी करने लगे। कुछ वर्ष पहले दोनों पक्ष अपनी-अपनी दावेदारी के लिए कोर्ट गए। कोर्ट का फैसला आया कि पंचमी और छठ को हिंदू पक्ष पूजा करेंगे और सप्तमी व अष्टमी को मुस्लिम पक्ष इबादत करेंगे। इसकी जिम्मेदारी अब नूरपुर के मुख्त्यार खां और मामूरगंज के ओमपाल सिंह संभाले हुए हैं।
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मेला प्रबंधक मुख्तयार ने बताया कि संत रूपन पांडेय नाम ने अपने तपोबल से आसपास के लोगों की तकलीफें दूर की। वह पीपल के पेड़ के नीचे तपस्या में लीन रहते थे। हिंदू और मुस्लिम दोनों उनके मुरीद थे। करीब डेढ़ सौ साल पहले भक्तों के सामने ही वह अंतर्धान हो गए थे। बाद में इसी स्थल पर मेला लगने लगा। पीपल के वृक्ष के पास संत रूपन पांडेय की समाधि और भगवान शिव का मंदिर है। यहां पूजा होती है। रविवार को यहां मेला शुरू हो गया है। दोनों अपनी-अपनी बारी पर पूजा और इबादत करेंगे।
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दोनों समुदाय के बच्चों का होता है मुंडन संस्कार
रूपन पांडेय मंदिर परिसर में चल रहे मेले में दोनों समुदायों के लोग अपने-अपने बच्चों का मुंडन करवाते हैं। परंपरागत पूजा और इबादत भी कर रहे हैं। मंदिर पर पूजा अर्चना चल रही है। सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस तैनात है।

मुस्लिम समुदाय के लोगों ने इस मंदिर के लिए जमीन दान की थी। मंदिर पर दोनों समुदाय के लोगों का हक है। दोनों पक्षों के प्रयास से कई वर्षों से यहां मेला लगता आ रहा है। - साधूराम, मंदिर के पुजारी।


यह स्थल चमत्कारिक है। यहां के चमत्कारों को अनुभव करके ही राम दरबार की स्थापना कराई गई है। सभी लोग यहां श्रद्धा से आते हैं और पुण्य लाभ प्राप्त करते हैं। - -ओमपाल सिंह, निवासी मामूरगंज।



वर्षों से पूरा गांव रूपन पांडेय मंदिर में इबादत को जाते हैं। लोगों को यहां आने पर दुख और परेशानियों से निजात मिलती है। हिंदू और मुसलमान दोनों यहां श्रद्धा रखते हैं। - शाने अली, निवासी नूरपुर।

साधूराम पुजारी।

साधूराम पुजारी।

साधूराम पुजारी।

साधूराम पुजारी।

साधूराम पुजारी।

साधूराम पुजारी।

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