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मलेरिया के मरीजों की संख्या नौ हजार के पार
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गांव सलेमपुर में लगा स्वास्थ्य परीक्षण शिविर। संवाद
- फोटो : BADAUN
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बदायूं। वायरल फीवर और टायफाइड के साथ जिले में मलेरिया का प्रकोप भी बना हुआ है। अब तक जिले में बुखार के एक लाख से ज्यादा मरीज मिल चुके हैं। इधर, 15 सितंबर तक जिले में मलेरिया रोगियों की संख्या नौ हजार के पार हो गई है। मलेरिया के हर सौ रोगियों में फैल्सीपेरम मलेरिया के औसतन 10 से ज्यादा रोगी मिल रहे हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि पिछले साल के मुकाबले इस साल हालात ज्यादा सामान्य हैं।
बदायूं में पिछले साल मलेरिया का भयंकर प्रकोप था। मलेरिया विभाग के आंकड़ों के अनुसार 20 सितंबर 2019 तक जिले में मलेरिया के 16824 केस सामने आए थे। इनमें जानलेवा फैल्सीपेरम मलेरिया के 1551 रोगी मिले थे। मलेरिया के प्रकोप के लिहाज से सालारपुर, जगत, दातागंज और समरेर के करीब 100 गांवों को हाईरिस्क श्रेणी में रखा गया। फिर से हालात बेकाबू न हों इसके लिए मलेरिया का सीजन शुरू होने के साथ ही शासन स्तर से मॉनीटरिंग शुरू कर दी गई। पिछले सप्ताह ही शासन स्तर की टीम ने बदायूं पहुंच कर जमीनी हकीकत की पड़ताल की थी। संचारी रोग निदेशक को भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार इस साल एक जनवरी से 15 सितंबर तक जिले में संदिग्ध 1.12 लाख बुखार रोगियों की जांच की गई। इनमें 9140 मलेरिया रोगी मिले हैं। इनमें पीएफ (प्लाजमोडियम फैल्सीपेरम) कैटेगरी के 1035 रोगी सामने आए हैं। फिर भी अधिकारियों का कहना है कि पिछले साल के मुकाबले स्थिति बेहतर है।
गम्बूजिया मछलियां छोड़ने को कई और तालाब चिह्नित
मलेरिया पर काबू के लिए इस साल हाईरिस्क गांवों के 77 से ज्यादा तालाबों में विशेष प्रजाति की गम्बूजिया मछलियां छुड़वा चुका है। यह मछली तालाब में मच्छरों का लार्वा नहीं पनपने देती। एसीएमओ डॉ. अनिल शर्मा का कहना है कि इससे मलेरिया पर काबू में काफी सहायता मिली है। कुछ और तालाबों को भी मछलियां छुड़वाने के लिए चिह्नित किया गया है। इन तालाबों में जल्द मछलियां छुड़वा दी जाएंगी।
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2019 के मुकाबले कम लोगों की हुई जांच
स्वास्थ्य और मलेरिया विभाग ने पिछले साल एक जनवरी से 20 सितंबर तक जिले में कुल 119618 लोगों की जांच कराई थी, जबकि इस साल 15 सितंबर तक 112702 लोगों की ही जांच हो सकी है। ऐसे में जांच के मामले में पिछले साल का आंकड़ा छूने के लिए 20 सितंबर तक 6916 और लोगों की जांच करानी होगी। जाहिर है कि ऐसे में 20 सितंबर तक रोगियों का आंकड़ा और बढ़ जाएगा।
विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने इस साल मलेरिया पर काबू पाने को काफी मेहनत की है। पिछले साल के मुकाबले इस साल स्थिति ज्यादा सामान्य है। हाईरिस्क इलाकों में दवाओं की छिड़काव लगातार किया जा रहा है। लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है।
- डॉ. हरिदत्त कुमार, जिला मलेरिया अधिकारी
राहत : दो गांव में किसी में नहीं हुई मलेरिया की पुष्टि
मूसाझाग ब्लॉक जगत के गांवों में अगस्त के शुरुआत में फैला मलेरिया अब काबू में आने लगा है। बृहस्पतिवार को ब्लॉक के गांव महोरा और सलेमपुर में स्वास्थ्य कैंप लगाकर ग्रामीणों की जांच की गई। बुखार पीड़ितों को दवाओं का वितरण किया गया। हालांकि, इस दौरान मलेरिया का एक भी रोगी नहीं मिला। ब्लॉक जगत के दो दर्जन से ज्यादा गांवों में मलेरिया का प्रकोप था। पिछले वर्ष यहां स्थिति काफी खराब थी। बृहस्पतिवार को बुखार प्रभावित महोरा और सलेमपुर गांव में एमओआईसी डॉ. जितेंद्र कुमार के निर्देशन में बुखार पीड़ित 38 लोगों की स्वास्थ्य जांच की गई। इनमें किसी को मलेरिया की पुष्टि नहीं हुई। बुखार पीड़ितों को दवाओं का वितरण किया गया।
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बदायूं में पिछले साल मलेरिया का भयंकर प्रकोप था। मलेरिया विभाग के आंकड़ों के अनुसार 20 सितंबर 2019 तक जिले में मलेरिया के 16824 केस सामने आए थे। इनमें जानलेवा फैल्सीपेरम मलेरिया के 1551 रोगी मिले थे। मलेरिया के प्रकोप के लिहाज से सालारपुर, जगत, दातागंज और समरेर के करीब 100 गांवों को हाईरिस्क श्रेणी में रखा गया। फिर से हालात बेकाबू न हों इसके लिए मलेरिया का सीजन शुरू होने के साथ ही शासन स्तर से मॉनीटरिंग शुरू कर दी गई। पिछले सप्ताह ही शासन स्तर की टीम ने बदायूं पहुंच कर जमीनी हकीकत की पड़ताल की थी। संचारी रोग निदेशक को भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार इस साल एक जनवरी से 15 सितंबर तक जिले में संदिग्ध 1.12 लाख बुखार रोगियों की जांच की गई। इनमें 9140 मलेरिया रोगी मिले हैं। इनमें पीएफ (प्लाजमोडियम फैल्सीपेरम) कैटेगरी के 1035 रोगी सामने आए हैं। फिर भी अधिकारियों का कहना है कि पिछले साल के मुकाबले स्थिति बेहतर है।
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गम्बूजिया मछलियां छोड़ने को कई और तालाब चिह्नित
मलेरिया पर काबू के लिए इस साल हाईरिस्क गांवों के 77 से ज्यादा तालाबों में विशेष प्रजाति की गम्बूजिया मछलियां छुड़वा चुका है। यह मछली तालाब में मच्छरों का लार्वा नहीं पनपने देती। एसीएमओ डॉ. अनिल शर्मा का कहना है कि इससे मलेरिया पर काबू में काफी सहायता मिली है। कुछ और तालाबों को भी मछलियां छुड़वाने के लिए चिह्नित किया गया है। इन तालाबों में जल्द मछलियां छुड़वा दी जाएंगी।
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2019 के मुकाबले कम लोगों की हुई जांच
स्वास्थ्य और मलेरिया विभाग ने पिछले साल एक जनवरी से 20 सितंबर तक जिले में कुल 119618 लोगों की जांच कराई थी, जबकि इस साल 15 सितंबर तक 112702 लोगों की ही जांच हो सकी है। ऐसे में जांच के मामले में पिछले साल का आंकड़ा छूने के लिए 20 सितंबर तक 6916 और लोगों की जांच करानी होगी। जाहिर है कि ऐसे में 20 सितंबर तक रोगियों का आंकड़ा और बढ़ जाएगा।
विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने इस साल मलेरिया पर काबू पाने को काफी मेहनत की है। पिछले साल के मुकाबले इस साल स्थिति ज्यादा सामान्य है। हाईरिस्क इलाकों में दवाओं की छिड़काव लगातार किया जा रहा है। लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है।
- डॉ. हरिदत्त कुमार, जिला मलेरिया अधिकारी
राहत : दो गांव में किसी में नहीं हुई मलेरिया की पुष्टि
मूसाझाग ब्लॉक जगत के गांवों में अगस्त के शुरुआत में फैला मलेरिया अब काबू में आने लगा है। बृहस्पतिवार को ब्लॉक के गांव महोरा और सलेमपुर में स्वास्थ्य कैंप लगाकर ग्रामीणों की जांच की गई। बुखार पीड़ितों को दवाओं का वितरण किया गया। हालांकि, इस दौरान मलेरिया का एक भी रोगी नहीं मिला। ब्लॉक जगत के दो दर्जन से ज्यादा गांवों में मलेरिया का प्रकोप था। पिछले वर्ष यहां स्थिति काफी खराब थी। बृहस्पतिवार को बुखार प्रभावित महोरा और सलेमपुर गांव में एमओआईसी डॉ. जितेंद्र कुमार के निर्देशन में बुखार पीड़ित 38 लोगों की स्वास्थ्य जांच की गई। इनमें किसी को मलेरिया की पुष्टि नहीं हुई। बुखार पीड़ितों को दवाओं का वितरण किया गया।