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तापमान में गिरावट के साथ बढ़ने लगा डेंगू का खतरा
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बदायूं। मच्छरों के प्रकोप से जहां एक ओर जिले में मलेरिया और फैल्सीपेरम का भयंकर प्रकोप है, वहीं दूसरी ओर तापमान में गिरावट आने के साथ डेंगू का खतरा भी गहराने लगा है। जिले में अब तक बुखार से मौतों का आंकड़ा सौ के पार हो गया है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग एक भी मौत न होने का दावा अब भी कर रहा है।
आमतौर पर मलेरिया, फैल्सीपेरम का प्रकोप जुलाई से अक्तूबर तक रहता है। अक्तूबर आने के साथ रात के तापमान में कमी आने से डेेंगू का वाहक एडीज मादा मच्छर भी सक्रिय होने लगता है। अब तक जिले में डेंगू के 40 से ज्यादा संदिग्ध मरीज मिल चुके हैं। हालांकि, किसी को एलाइजा जांच में डेंगू की पुष्टि नहीं हुई। इधर, मलेरिया और फैल्सीपेरम का प्रकोप अब भी बना हुआ है। जगत, समरेर, बिनावर ब्लॉक सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। स्वास्थ्य विभाग के साथ मलेरिया विभाग भी दवाओं के छिड़काव की बात कह रहा है। स्थानीय निकाय भी फॉगिंग पर मोटा बजट खर्च कर रहे हैं, इसके बावजूद मच्छर जनित बीमारियां तेजी से लोगों को चपेट में ले रही हैं। जिला मलेरिया अधिकारी वीके शर्मा का कहना है कि विभाग की टीमें लगातार दवाओं का छिड़काव कर रही हैं। जहां से भी मलेरिया का ज्यादा प्रकोप होने की सूचना आती है वहां अतिरिक्त टीमों को लगाया जा रहा है।
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आमतौर पर मलेरिया, फैल्सीपेरम का प्रकोप जुलाई से अक्तूबर तक रहता है। अक्तूबर आने के साथ रात के तापमान में कमी आने से डेेंगू का वाहक एडीज मादा मच्छर भी सक्रिय होने लगता है। अब तक जिले में डेंगू के 40 से ज्यादा संदिग्ध मरीज मिल चुके हैं। हालांकि, किसी को एलाइजा जांच में डेंगू की पुष्टि नहीं हुई। इधर, मलेरिया और फैल्सीपेरम का प्रकोप अब भी बना हुआ है। जगत, समरेर, बिनावर ब्लॉक सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। स्वास्थ्य विभाग के साथ मलेरिया विभाग भी दवाओं के छिड़काव की बात कह रहा है। स्थानीय निकाय भी फॉगिंग पर मोटा बजट खर्च कर रहे हैं, इसके बावजूद मच्छर जनित बीमारियां तेजी से लोगों को चपेट में ले रही हैं। जिला मलेरिया अधिकारी वीके शर्मा का कहना है कि विभाग की टीमें लगातार दवाओं का छिड़काव कर रही हैं। जहां से भी मलेरिया का ज्यादा प्रकोप होने की सूचना आती है वहां अतिरिक्त टीमों को लगाया जा रहा है।
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