{"_id":"5e404bba8ebc3ee6040ab7d5","slug":"gas-refilling-badaun-news-bly3952489178","type":"story","status":"publish","title_hn":"एक कॉल पर पहुंचते थे माफिया के गैस सिलिंडर, ऐसे चलता था नेटवर्क","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एक कॉल पर पहुंचते थे माफिया के गैस सिलिंडर, ऐसे चलता था नेटवर्क
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बदायूं। शहर में जिन दो गोदामों से भारी मात्रा में सिलिंडर बरामद हुए थे, उनका संचालक माफिया सिर्फ गैस रीफिलिंग के काले धंधे तक सीमित नहीं था, बल्कि उसका नेटवर्क पूरे शहर में फैला था। उसके गोदामों से हलवाइयों, मिठाई की दुकानों, शादी हॉल और वैवाहिक समारोह में रसोई गैस भरे सिलिंडर सप्लाई किए जाते थे। नेटवर्क से जुड़े लोगों के एक फोन करते और माफिया के कारिंदे तुरंत सिलिंडर पहुंचा देते थे। माफिया के पास ऐसे ग्राहकों की बाकायदा सूची मौजूद थी। किसके यहां कब सिलिंडर जाना है, ये भी उन्हें पता रहता था।
लौड़ा बहेड़ी का गैस माफिया इस धंधे में सबसे आगे था। वह जिस तरह रसोई गैस की कालाबाजारी कर रहा था, उसे देखकर ही दो अन्य लोगों ने यह काला धंधा शुरू कर दिया था। एक ने बड़ी ज्यारत के पास और दूसरे ने लालपुल के पास गैस रीफिलिंग का धंधा शुरू किया था। पता लगने पर उन दोनों से माफिया की नोकझोंक भी हुई थी। हालांकि माफिया के सामने वे ज्यादा दिनों तक टिक नहीं पाए थे। 10 जनवरी को माफिया के गोदाम में छापा पड़ा। यहां से 240 रसोई सिलिंडर बरामद हुए। उसके बाद नए दोनों धंधेबाजों नेकाम बंद कर दिया। उनके सिलिंडर कहां गए। अभी पुलिस और प्रशासन इसका पता नहीं लगा सका है। इधर, दातागंज रेलवे क्रासिंग के पास गैस रीफिलिंग करने वाला कैलाश उर्फ बंटू भी किसी से कम नहीं था। शुरूआत में उसने अकेले काम शुरू किया। ज्यादा काम बढ़ा तो उसने दो नौकर रख लिए। सूत्रों के मुताबिक बंटू के शादी समारोह में काम करने वाले हलवाई, मिठाई विक्रेताओं, होटल, ढाबा और यहां तक की लॉन, मैरिज हॉल के मालिकों से तक अच्छे संबंध थे। किसी को सिलिंडर की जरूरत होती थी तो वे एक कॉल करते और बंटू के कर्मचारी उन तक सिलिंडर पहुंचा देते थे। इसके साथ ही उसका गैस रीफिलिंग का धंधा जोरों पर चल रहा था। इस धंधे से ही बंटू लाखों का आदमी बन गया। अभी तक उसकी गिरफ्तारी नहीं हुई है।
माफिया का ध्यान पूरा रखते थे गैस एजेंसी मालिक
शहर में इतना बड़ा गोरखधंधा करने वाले माफिया का गैस एजेंसी मालिक पूरा ध्यान रखते थे। एक गैस एजेंसी मालिक ने तो अपनी गाड़ी तक दे दी थी। उसी से सिलिंडर इधर-उधर ढोये जा रहे थे। वो गाड़ी और उसका ड्राइवर जब टीम ने छापा मारा था। तब मौके से ही पकड़ा गया था।
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... तो बंटू भी पहुंचा माननीय की शरण में
छह फरवरी को बंटू के खिलाफ सिविल लाइंस थाने में एफआईआर दर्ज हुई थी। तब से बंटू पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ा है। जबकि बंटू के दो नौकर और गैस एजेंसी का ड्राइवर जेल जा चुका है। बंटू की गिरफ्तारी न होने से माना जा रहा है, वह भी एक माननीय की शरण में पहुंच चुका है।
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लौड़ा बहेड़ी का गैस माफिया इस धंधे में सबसे आगे था। वह जिस तरह रसोई गैस की कालाबाजारी कर रहा था, उसे देखकर ही दो अन्य लोगों ने यह काला धंधा शुरू कर दिया था। एक ने बड़ी ज्यारत के पास और दूसरे ने लालपुल के पास गैस रीफिलिंग का धंधा शुरू किया था। पता लगने पर उन दोनों से माफिया की नोकझोंक भी हुई थी। हालांकि माफिया के सामने वे ज्यादा दिनों तक टिक नहीं पाए थे। 10 जनवरी को माफिया के गोदाम में छापा पड़ा। यहां से 240 रसोई सिलिंडर बरामद हुए। उसके बाद नए दोनों धंधेबाजों नेकाम बंद कर दिया। उनके सिलिंडर कहां गए। अभी पुलिस और प्रशासन इसका पता नहीं लगा सका है। इधर, दातागंज रेलवे क्रासिंग के पास गैस रीफिलिंग करने वाला कैलाश उर्फ बंटू भी किसी से कम नहीं था। शुरूआत में उसने अकेले काम शुरू किया। ज्यादा काम बढ़ा तो उसने दो नौकर रख लिए। सूत्रों के मुताबिक बंटू के शादी समारोह में काम करने वाले हलवाई, मिठाई विक्रेताओं, होटल, ढाबा और यहां तक की लॉन, मैरिज हॉल के मालिकों से तक अच्छे संबंध थे। किसी को सिलिंडर की जरूरत होती थी तो वे एक कॉल करते और बंटू के कर्मचारी उन तक सिलिंडर पहुंचा देते थे। इसके साथ ही उसका गैस रीफिलिंग का धंधा जोरों पर चल रहा था। इस धंधे से ही बंटू लाखों का आदमी बन गया। अभी तक उसकी गिरफ्तारी नहीं हुई है।
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माफिया का ध्यान पूरा रखते थे गैस एजेंसी मालिक
शहर में इतना बड़ा गोरखधंधा करने वाले माफिया का गैस एजेंसी मालिक पूरा ध्यान रखते थे। एक गैस एजेंसी मालिक ने तो अपनी गाड़ी तक दे दी थी। उसी से सिलिंडर इधर-उधर ढोये जा रहे थे। वो गाड़ी और उसका ड्राइवर जब टीम ने छापा मारा था। तब मौके से ही पकड़ा गया था।
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... तो बंटू भी पहुंचा माननीय की शरण में
छह फरवरी को बंटू के खिलाफ सिविल लाइंस थाने में एफआईआर दर्ज हुई थी। तब से बंटू पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ा है। जबकि बंटू के दो नौकर और गैस एजेंसी का ड्राइवर जेल जा चुका है। बंटू की गिरफ्तारी न होने से माना जा रहा है, वह भी एक माननीय की शरण में पहुंच चुका है।