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...खून के आंसू बहाने के लिए किसान मजबूर
उझानी।
Updated Mon, 25 Sep 2017 12:13 AM IST
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किसान
- फोटो : अमर उजाला
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बरसात से खेतों में खड़ी खरीफ की 40 फीसदी फसल चौपट
कई साल से किसान को उसकी उपज का वाजिब दाम नहीं मिल पा रहा है। इस साल सामान्य से ज्यादा मानसून रहने की घोषणा के बाद किसान के चेहरों पर कुछ दिनों तक खुशी रही। शुरू के दिनों में जिस तरह बादल बरसे उससे किसानों की फसलें भी खेतों में लहलहाने लगीं थीं। लेकिन बाद में काफी दिनों तक आकाश में छाने वाले बादल सिर्फ किसानों को धोखा देते रहे। पहले सूखे जैसे हालात पैदा हुए मगर तीन-चार दिन से जिस तरह रुक-रुक कर बरसात हो रही है। खेतों में लगभग तैयार सी खड़ी 40 फीसदी खरीफ की फसल चौपट हो गई है। सो किसानों के सामने रोने के अलावा कुछ नहीं बचा है।
कुछेक साल पहले तक जिले में सामान्य या फिर उससे अधिक बरसात होती थी, किंतु कुछ सालों से देखने में आ रहा है कि मानसून के दिनों में भी बादल नहीं बरसते। हालांकि काले-काले बादल छाए रहे मगर वह सिर्फ धोखा ही देते रहे। इस साल शुरू में ही मानसून की बरसात हुई। बाद में सूखा पड़ने लगा। किसानों ने धान, ईख, बाजरा के साथ ही दलहन में उड़द की फसल की। अपने साधनों से सिंचाई की तब कहीं जाकर फसल सही सलामत हुई। मगर इस समय हो रही बरसात ने लगभग पक कर तैयार खड़ी धान, बाजरा की फसल को गिरा दिया है। किसानों ने बताया कि उड़द की भी अच्छी पैदावार होती लेकिन अब आसार नहीं दिख रहे हैं। पता नहीं ईश्वर किसानों की किस-किस तरह से परीक्षा ले रहा है। किसानों ने कहा कि फसल के नष्ट होने से लागत का निकलना भी मुश्किल हो जाएगा। ज्यादातर किसान उधार से ही सिंचाई, खाद आदि लगाते हैं। समझ में नहीं आ रहा है कि अब वह कैसे उसे चुका पाएंगे।
उघैती। किसानों को कुदरत के कहर का सामना करना पड़ रहा है। वहीं लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली है। वहीं फसलों को काफी नुकसान हुआ है।
क्षेत्र में हो रही बरसात से फसलों को भारी नुकसान हो रहा है। किसान दिन रात खेतों में काम करके फसलों को उगाते हैं, लेकिन कुदरत की मार ने किसान को बेहाल कर दिया। तेज हवा के साथ हुई बरसात ने धान, बाजरा तथा गन्ने की फसल चौपट कर दी है। लोगों का कहना है कि पहले तो उड़द, बाजरा की फसलें बरसात न होने से सूखने की कगार पर थी और अब बरसात और तेज हवाओं ने उन्हें भारी नुकसान पहुंचाया है। वहीं लोगों को भीषण गर्मी से बरसात ने काफी राहत दी है।
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वर्जन
बरसात की वजह से किसानों को काफी नुकसान हुआ है। सबसे ज्यादा धान, बाजरा, उड़द और मूंग की फसल प्रभावित हुई है। किसानों को खेतों से बरसाती पानी के निकास के लिए सजग रहना होगा।
-डॉ. संजय कुमार, कृषि वैज्ञानिक
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कई साल से किसान को उसकी उपज का वाजिब दाम नहीं मिल पा रहा है। इस साल सामान्य से ज्यादा मानसून रहने की घोषणा के बाद किसान के चेहरों पर कुछ दिनों तक खुशी रही। शुरू के दिनों में जिस तरह बादल बरसे उससे किसानों की फसलें भी खेतों में लहलहाने लगीं थीं। लेकिन बाद में काफी दिनों तक आकाश में छाने वाले बादल सिर्फ किसानों को धोखा देते रहे। पहले सूखे जैसे हालात पैदा हुए मगर तीन-चार दिन से जिस तरह रुक-रुक कर बरसात हो रही है। खेतों में लगभग तैयार सी खड़ी 40 फीसदी खरीफ की फसल चौपट हो गई है। सो किसानों के सामने रोने के अलावा कुछ नहीं बचा है।
कुछेक साल पहले तक जिले में सामान्य या फिर उससे अधिक बरसात होती थी, किंतु कुछ सालों से देखने में आ रहा है कि मानसून के दिनों में भी बादल नहीं बरसते। हालांकि काले-काले बादल छाए रहे मगर वह सिर्फ धोखा ही देते रहे। इस साल शुरू में ही मानसून की बरसात हुई। बाद में सूखा पड़ने लगा। किसानों ने धान, ईख, बाजरा के साथ ही दलहन में उड़द की फसल की। अपने साधनों से सिंचाई की तब कहीं जाकर फसल सही सलामत हुई। मगर इस समय हो रही बरसात ने लगभग पक कर तैयार खड़ी धान, बाजरा की फसल को गिरा दिया है। किसानों ने बताया कि उड़द की भी अच्छी पैदावार होती लेकिन अब आसार नहीं दिख रहे हैं। पता नहीं ईश्वर किसानों की किस-किस तरह से परीक्षा ले रहा है। किसानों ने कहा कि फसल के नष्ट होने से लागत का निकलना भी मुश्किल हो जाएगा। ज्यादातर किसान उधार से ही सिंचाई, खाद आदि लगाते हैं। समझ में नहीं आ रहा है कि अब वह कैसे उसे चुका पाएंगे।
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उघैती। किसानों को कुदरत के कहर का सामना करना पड़ रहा है। वहीं लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली है। वहीं फसलों को काफी नुकसान हुआ है।
क्षेत्र में हो रही बरसात से फसलों को भारी नुकसान हो रहा है। किसान दिन रात खेतों में काम करके फसलों को उगाते हैं, लेकिन कुदरत की मार ने किसान को बेहाल कर दिया। तेज हवा के साथ हुई बरसात ने धान, बाजरा तथा गन्ने की फसल चौपट कर दी है। लोगों का कहना है कि पहले तो उड़द, बाजरा की फसलें बरसात न होने से सूखने की कगार पर थी और अब बरसात और तेज हवाओं ने उन्हें भारी नुकसान पहुंचाया है। वहीं लोगों को भीषण गर्मी से बरसात ने काफी राहत दी है।
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बरसात की वजह से किसानों को काफी नुकसान हुआ है। सबसे ज्यादा धान, बाजरा, उड़द और मूंग की फसल प्रभावित हुई है। किसानों को खेतों से बरसाती पानी के निकास के लिए सजग रहना होगा।
-डॉ. संजय कुमार, कृषि वैज्ञानिक