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Budaun News: हत्या के जुर्म में पिता-पुत्र को आजीवन कारावास की सजा
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बदायूं। करीब 16 साल पहले रास्ते के विवाद में हुई हत्या के मामले में नामजद पिता-पुत्र को स्पेशल जज डकैती कोर्ट अखिलेश कुमार ने दोषी ठहराया है। कोर्ट ने दोषसिद्ध पिता-पुत्र को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोनों मुजरिम पर 22 हजार रुपये का जुर्माना भी डाला है। जबकि एक आरोपी की पत्रावली किशोर न्याय बोर्ड को प्रेषित की गई।
विशेष लोक अभियोजक राजेश बाबू शर्मा के मुताबिक थाना सहसवान क्षेत्र के गांव भगता नगला निवासी सुरेश ने 25 अप्रैल 2007 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के मुताबिक गांव के चंद्रपाल और उसके दो पुत्रों मनोज और एक नाबालिग से उसके परिजनों की रास्ते को लेकर कहासुनी हो गई थी। शाम को वादी का भाई रमेश अपने बेटे मुनेश और भतीजे देवेंद्र के साथ दूसरे गांव से दावत खाकर लौट रहा था। जब तीनों चंद्रपाल घर के सामने से गुजरे तो चंद्रपाल ने अपने दोनों लड़कों से गोली मारने के लिए कहा। मनोज और उसके नाबालिग भाई ने तमंचे से फायर किए, जो रमेश और मुनेश को लगे।
मनोज की चलाई गोली से रमेश की मौके पर ही मौत हो गई और मुनेश गंभीर घायल हो गया। पुलिस ने चंद्रपाल, मनोज और एक नाबालिग के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना के बाद कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। स्पेशल जज डकैती कोर्ट अखिलेश कुमार ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन किया।
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कोर्ट ने अभियोजन और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की बहस को सुना। कोर्ट ने नामजद पिता-पुत्र चंद्रपाल और मनोज को हत्या और जानलेवा हमले के जुर्म में मुजरिम करार दिया। कोर्ट ने दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोनों पर 22 हजार रुपये का जुर्माना भी डाला है।
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विशेष लोक अभियोजक राजेश बाबू शर्मा के मुताबिक थाना सहसवान क्षेत्र के गांव भगता नगला निवासी सुरेश ने 25 अप्रैल 2007 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के मुताबिक गांव के चंद्रपाल और उसके दो पुत्रों मनोज और एक नाबालिग से उसके परिजनों की रास्ते को लेकर कहासुनी हो गई थी। शाम को वादी का भाई रमेश अपने बेटे मुनेश और भतीजे देवेंद्र के साथ दूसरे गांव से दावत खाकर लौट रहा था। जब तीनों चंद्रपाल घर के सामने से गुजरे तो चंद्रपाल ने अपने दोनों लड़कों से गोली मारने के लिए कहा। मनोज और उसके नाबालिग भाई ने तमंचे से फायर किए, जो रमेश और मुनेश को लगे।
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मनोज की चलाई गोली से रमेश की मौके पर ही मौत हो गई और मुनेश गंभीर घायल हो गया। पुलिस ने चंद्रपाल, मनोज और एक नाबालिग के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना के बाद कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। स्पेशल जज डकैती कोर्ट अखिलेश कुमार ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन किया।
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कोर्ट ने अभियोजन और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की बहस को सुना। कोर्ट ने नामजद पिता-पुत्र चंद्रपाल और मनोज को हत्या और जानलेवा हमले के जुर्म में मुजरिम करार दिया। कोर्ट ने दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोनों पर 22 हजार रुपये का जुर्माना भी डाला है।