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जब गुरु ही चकराएं तो शिष्य कैसे करें हल
अमर उजाला, बदायूं
Updated Thu, 19 Nov 2015 11:43 PM IST
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इस बारे में जब कुछ शिक्षकों ने जगत ब्लाक के एबीएसए से संपर्क किया, तो उन्होंने समस्या का समाधान करने के बजाय उनको कुछ भी प्रश्न पूछ लेने की कहकर चलता किया। दरअसल, सामाजिक विषय हमारा परिवेश की परीक्षा में जो पेपर चौथी क्लास के बच्चों को दिया गया, उसमें सवाल के बजाय बगैर तारतम्य के वाक्य लिखे हुए थे। मसलन, इतिहास, भूगोल और मौजूदा राजनीति के बारे में कुछ बेतरतीब वाक्य गढ़ दिए गए थे, ऐसे में बच्चे क्या उत्तर दें? ये अपने आप में एक सवाल था। बच्चों ने गुरुओं से बात की तो वे भी चकरा गए। मामला एबीएसए के दरबार में पहुंचा तो टका सा जवाब मिला। अब शिक्षकों ने भी बिना किसी आपत्ति के गलत पेपर से ही बच्चों की परीक्षा लेनी शुरू कर दी है। अब ऐसी परीक्षा होगी, तो उसका क्या मतलब?
इस बारे में बीएसए आनंद प्रकाश शर्मा से बात की गई तो उनका कहना था कि इस बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। यदि इस तरह की कोई भी गलती हुई है, तो पेपर को तैयार करने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाएगी। पेपर को तैयार करने में हुए इस तरह की उदासीनता गंभीर चूक है, जिससे पूरे विभाग की छवि खराब होती है।
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इस बारे में बीएसए आनंद प्रकाश शर्मा से बात की गई तो उनका कहना था कि इस बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। यदि इस तरह की कोई भी गलती हुई है, तो पेपर को तैयार करने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाएगी। पेपर को तैयार करने में हुए इस तरह की उदासीनता गंभीर चूक है, जिससे पूरे विभाग की छवि खराब होती है।
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