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बचाव को चीख रहा था हर घायल, राहगीर बने मददगार

Tue, 25 Apr 2017 11:33 PM IST
उझानी/ अमर उजाला ब्यूरो
उझानी/ अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 25 Apr 2017 11:33 PM IST
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Everyone was injured, scared to help
हादसा - फोटो : अमर उजाला
बचाव को चीख रहा था हर घायल, राहगीर बने मददगार
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कैचवर्ड- सड़क हादसे में चार लोगों की मौत
- खून से लथपथ सवारियों को बसों से बाहर निकालने में लोगों ने की मशक्कत      
- हादसा स्थल से लेकर अस्पताल तक घंटों रहा अफरातफरी का माहौल      
- किसी को पुलिस वैन तो कोई खुद ही घायल को लेकर चल पड़ा अस्पताल      

मंगलवार का दिन रोडवेज की फाउंड्रीनगर और पीलीभीत डिपो की दो रोडवेज बसों में सवार महिला-पुरुष और बच्चों के लिए अमंगल साबित हुआ। दोनों बसें जब आमने-सामने भिड़ीं तो बचाव के लिए सवारियां चीख-पुकार मचाने लगीं। अपने हमसफर और सामान की परवाह के साथ सभी घायल बेइंतेहा दर्द से कराह रहा था। कोई सीट के बीच में फंसा था तो किसी के ऊपर ही सीट पड़ी थी। उनकी मदद के लिए हर कोई दौड़ पड़ा। मददगारों ने मानवता की मिसाल पेश कर घायलों को हर संभव मदद दी और बाहर निकालकर अस्पताल तक पहुंचाने में जुट गए।   
रोडवेज की दोनों बसों में घायल तो सभी यात्री थे लेकिन सर्वाधिक घायल फाउंड्रीनगर डिपो की मिनी बस में ही निकले। मिनी बस की हालत देखकर तो यही लग रहा था कि मामूली रूप से घायल लोगों पर जरूर कुदरत का रहम रहा जो मौत से सामना होने के बाद भी जिंदगी की जंग जीत गए। दोनों बस का अगला हिस्सा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था। हादसे के बाद घायलों की चीख-पुकार पर मदद के लिए आगे बढ़े लोगों में से दो-तीन ने तो 108 एंबुलेंस और यूपी-100 को कॉल कर दी। कराह रहे घायल बच्चों और महिलाओं की हालत देख मददगार भी भावुक हो गए। उन्हें बसों से बाहर निकालने के लिए लोगों ने मानवता की जिस तरह से मिसाल पेश की, उससे गंभीर रूप से घायल सवारियों में से कई को समय पर इलाज भी मिल गया।
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घायलों को अपने सामान की भी परवाह नहीं रही। सामान में कई घायलों के बैग, सूटकेस और थैला बसों में ही छूट गए। यही नहीं, घायलों को बसों से बाहर निकालते वक्त मददगारों के कपड़े भी खून से खराब हो गए। मददगारों ने घायलों को अपनी गोद में उठा कर पुलिस वैन और एंबुलेंस में पहुंचाया। कई राहगीर तो घायलों को गोद में उठाकर ही चल पड़े। अफरातफरी के माहौल के बीच अस्पताल में भी लोगों ने घायलों की मदद की। मददगारों में गद्दीटोला मोहल्ले के नरोत्तम सिंह और क्षत्रिय महासभा के नेता अमित प्रताप सिंह ने कई घायलों का सामान उन तक पहुंचाने में सहयोग किया।      
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...जब मददगार की गोद में टूटा महिला का दम      
उझानी। हादसे के बाद मदद के लिए मौके पर जुटे लोगों में पेंशनर पुलिस कर्मी छोटेलाल शंखधार के बेटे प्रतीक शंखधार की भूमिका की भी लोगों ने जमकर सराहना की। प्रतीक ने घायलों को बसों से बाहर निकालने के लिए कोई कसर न छोड़ी। वह गंभीर रूप से घायल महिला को गोद में उठाकर बस से बाहर लाए तो वह अंतिम सांस ले रही थी। एंबुुलेंस की ओर बढ़ते ही महिला ने प्रतीक की गोद में दम तोड़ दिया। यह देख उनकी आंखें भी छलछला उठीं।       

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एंबुलेंस और यूपी-100 कर्मी जुटे रहे      
उझानी। अमूमन लोग पुलिस और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर कर्मचारियों को कटघरे में खड़े करते रहे हैं लेकिन मंगलवार को दो बसों की भिड़ंत के दौरान यूपी-100 के सिपाहियों और एंबुलेंस-108 के स्वास्थ्य कर्मियों ने वाकई तत्परता दिखाई। यूपी-100 सबसे पहले मौके पर पहुंची थी। कोतवाली पुलिस को पहुंचने में इसलिए भी वक्त लगा कि सूचना ही देर से मिली। यूपी-100 के पुलिस कर्मियों में यदुवीर कुंतल का कहना है कि दिल तो पुलिस कर्मियों के सीने में भी होता है। ऐसे में कौन मदद करने से पीछे हट जाएगा।
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