{"_id":"40228b888ad67db20b3f916c3638247a","slug":"even-after-the-ban-took-victory-parades-in-many-places-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रतिबंध के बाद भी कई स्थानों पर निकले विजय जुलूस ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रतिबंध के बाद भी कई स्थानों पर निकले विजय जुलूस
बदायूं
Updated Sun, 01 Nov 2015 08:18 PM IST
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पंचायत चुनाव में जीतने वाले प्रत्याशी के विजयी जुलूस पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा था बावजूद इसके जिले में तमाम स्थानों पर जीते हुए प्रत्याशियों के समर्थकों ने जुलूस निकाला। जीत की खुशी में आतिशबाजी भी आकाश में दागी गई। लिहाजा, पुलिस मूक बनी देखती रही।
आयोग ने पंचायत चुनाव में मतगणना के बाद विजयी जुलूसों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया था। जिला प्रशासन के भी सभी अधिकारियों को इस बात के निर्देश थे कि वह अपने-अपने क्षेत्रों में विजयी जुलूस नहीं निकलने दें, लेकिन देर शाम जैसे ही मतगणना के बाद जो-जो प्रत्याशी जीतते गए उनके समर्थक खुशी में सड़क पर आ गए। विजयी उम्मीदवार अपने गांव तक जुलूस की शक्ल में फूल माला और जीत के नारे लगवाते हुए पहुंचे। घरों पर आतिशबाजी छोड़ी गई, मिठाइयां बांटी गईं। पता हो कि मतगणना स्थल के बाहर हर स्थान पर पुलिस फोर्स भी तैनात था, लेकिन जीत के जश्न में डूबे समर्थकों को पुलिस भी नहीं रोक सकी। पुलिस ने उनसे यह जरूर कहा कि वह शांतिपूर्वक अपने घरों को चले जाएं, रास्ते में न रुकें। मतगणना स्थलों पर फूल माला बेचने वाले भी खड़े रहे। आज उनकी खूब बिक्री हुई।
कहीं दीप जले...कहीं दिल
बदायूं। खेल का मैदान हो या फिर राजनीति का अखाड़ा। हार-जीत इसके दो पहलू हैं। पंचायत चुनाव में कई स्थानों पर ऐसा नजारा देखने को मिला। जो प्रत्याशी विजयी हुए, उनके यहां तो जश्न जैसा माहौल था और हारे हुए प्रत्याशी और उनके समर्थक निराशा के सागर में डूबे हुए थे।
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जिले में चार चरणों में पंचायत चुनाव के तहत जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत सदस्य पद के लिए मतदान हुआ। करीब सवा महीने से प्रत्याशी और उनके समर्थक चुनावी खेल में जुटे हुए थे। मतदान के बाद आज मतगणना का काम भी शुरु हुआ। इस चुनावी समर में हारे हुए प्रत्याशी या तो हार की आशंका को देख पहले ही मतगणना स्थल से खिसक गए थे यहां पर परिणाम घोषित होने से पहले चुपचाप ही समर्थकों संग चले गए। जो प्रत्याशी जीते उनके समर्थकों ने जश्न मनाया और जिन्हें हार मिली उनके समर्थक बात करने से भी कतरा रहे थे।
मतगणना शुरू होने के साथ चढ़ता-उतरता रहा पारा
बदायूं। जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत सदस्य के मतों की गिनती होते ही पारा चढ़ता-उतरता रहा। हालांकि कई घंटे तो वोटों की गड्डी बनाने में लग गए, लेकिन अफवाह इस तेजी से फैल रही थी जैसे वोटों की गड्डी बन रही उसके साथ परिणाम भी घोषित हो रहा हो।
जिले में कई स्थानों पर मतों की गिनती का काम नौ बजे से शुरु हो गया। हर प्रत्याशी के समर्थक भी भारी संख्या में मतगणना स्थल के बाहर खड़े रहे। दोपहर के बाद हार-जीत की अफवाहों का बाजार गर्म हो गया। हालांकि क्षेत्र पंचायत सदस्य पदों के परिणाम दोपहर बाद आने शुरु हो गए थे, लेकिन जिला पंचायत सदस्य के मतों की गड्डियां बनाने में ज्यादा वक्त लगा। यही नहीं उनका क्षेत्र कई गांवों में होने के कारण कई मतों की गिनती में भी समय लगा। जैसे-जैसे मतगणना का समय बढ़ता गया, त्यों-त्यों पारा भी उतरता-चढ़ता रहा। हर प्रत्याशी के समर्थक अपने-अपने प्रत्याशी की जीत का दावा कर रहे थे। जिला पंचायत के उम्मीदवारों में आगे-पीछे होने पर उनके समर्थकों में अधिक जोश और निराशा के भाव देखने को मिले।
कई बार मतगणना स्थलों से भीड़ को पुलिस ने खदेड़ा
बदायूं। मतगणना स्थल के आसपास किसी तरह की गड़बड़ी न हो इसके लिए पुलिस ने कई बार भीड़ को खदेड़ दिया। फिर भी परिणाम जानने के लिए देर शाम तक समर्थकों में उत्सुकता बनी रही।
अक्सर छोटे चुनावों में हार-जीत का रिजल्ट घोषित होने के बाद पक्ष-विपक्ष के समर्थकों में झगड़ा हो जाता है। इसलिए इस बात को ध्यान में रखते हुए जिला बप्रशासन ने सभी मतगणना स्थलों के आसपास पर्याप्त संख्या में पुलिस फोर्स को तैनात किया था। बावजूद इसके सभी स्थानों पर प्रत्याशियों के समर्थकों की भीड़ बनी रही। कई बार तो समर्थकों ने पुलिस को चकमा देकर अंदर जाने की कोशिश भी की लेकिन ऐसे समर्थकों को पुलिस ने खदेड़ दिया। प्रत्याशियों के समर्थकों परिणाम जानने को देर शाम तक रहे उत्सुक।
इंसेट-
प्रत्याशियों ने समर्थकों के भोजन की व्यवस्था की
बदायूं। जीत को लेकर आशावान कई प्रत्याशियों ने अपने समर्थकों के लिए दोपहर के भोजन की व्यवस्था भी मतगणना स्थल के पास ही भट्टियां लगवाकर की थी। कई बार चाय भी समर्थकों को पिलवाई गई।
आयोग ने पंचायत चुनाव में मतगणना के बाद विजयी जुलूसों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया था। जिला प्रशासन के भी सभी अधिकारियों को इस बात के निर्देश थे कि वह अपने-अपने क्षेत्रों में विजयी जुलूस नहीं निकलने दें, लेकिन देर शाम जैसे ही मतगणना के बाद जो-जो प्रत्याशी जीतते गए उनके समर्थक खुशी में सड़क पर आ गए। विजयी उम्मीदवार अपने गांव तक जुलूस की शक्ल में फूल माला और जीत के नारे लगवाते हुए पहुंचे। घरों पर आतिशबाजी छोड़ी गई, मिठाइयां बांटी गईं। पता हो कि मतगणना स्थल के बाहर हर स्थान पर पुलिस फोर्स भी तैनात था, लेकिन जीत के जश्न में डूबे समर्थकों को पुलिस भी नहीं रोक सकी। पुलिस ने उनसे यह जरूर कहा कि वह शांतिपूर्वक अपने घरों को चले जाएं, रास्ते में न रुकें। मतगणना स्थलों पर फूल माला बेचने वाले भी खड़े रहे। आज उनकी खूब बिक्री हुई।
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कहीं दीप जले...कहीं दिल
बदायूं। खेल का मैदान हो या फिर राजनीति का अखाड़ा। हार-जीत इसके दो पहलू हैं। पंचायत चुनाव में कई स्थानों पर ऐसा नजारा देखने को मिला। जो प्रत्याशी विजयी हुए, उनके यहां तो जश्न जैसा माहौल था और हारे हुए प्रत्याशी और उनके समर्थक निराशा के सागर में डूबे हुए थे।
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जिले में चार चरणों में पंचायत चुनाव के तहत जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत सदस्य पद के लिए मतदान हुआ। करीब सवा महीने से प्रत्याशी और उनके समर्थक चुनावी खेल में जुटे हुए थे। मतदान के बाद आज मतगणना का काम भी शुरु हुआ। इस चुनावी समर में हारे हुए प्रत्याशी या तो हार की आशंका को देख पहले ही मतगणना स्थल से खिसक गए थे यहां पर परिणाम घोषित होने से पहले चुपचाप ही समर्थकों संग चले गए। जो प्रत्याशी जीते उनके समर्थकों ने जश्न मनाया और जिन्हें हार मिली उनके समर्थक बात करने से भी कतरा रहे थे।
मतगणना शुरू होने के साथ चढ़ता-उतरता रहा पारा
बदायूं। जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत सदस्य के मतों की गिनती होते ही पारा चढ़ता-उतरता रहा। हालांकि कई घंटे तो वोटों की गड्डी बनाने में लग गए, लेकिन अफवाह इस तेजी से फैल रही थी जैसे वोटों की गड्डी बन रही उसके साथ परिणाम भी घोषित हो रहा हो।
जिले में कई स्थानों पर मतों की गिनती का काम नौ बजे से शुरु हो गया। हर प्रत्याशी के समर्थक भी भारी संख्या में मतगणना स्थल के बाहर खड़े रहे। दोपहर के बाद हार-जीत की अफवाहों का बाजार गर्म हो गया। हालांकि क्षेत्र पंचायत सदस्य पदों के परिणाम दोपहर बाद आने शुरु हो गए थे, लेकिन जिला पंचायत सदस्य के मतों की गड्डियां बनाने में ज्यादा वक्त लगा। यही नहीं उनका क्षेत्र कई गांवों में होने के कारण कई मतों की गिनती में भी समय लगा। जैसे-जैसे मतगणना का समय बढ़ता गया, त्यों-त्यों पारा भी उतरता-चढ़ता रहा। हर प्रत्याशी के समर्थक अपने-अपने प्रत्याशी की जीत का दावा कर रहे थे। जिला पंचायत के उम्मीदवारों में आगे-पीछे होने पर उनके समर्थकों में अधिक जोश और निराशा के भाव देखने को मिले।
कई बार मतगणना स्थलों से भीड़ को पुलिस ने खदेड़ा
बदायूं। मतगणना स्थल के आसपास किसी तरह की गड़बड़ी न हो इसके लिए पुलिस ने कई बार भीड़ को खदेड़ दिया। फिर भी परिणाम जानने के लिए देर शाम तक समर्थकों में उत्सुकता बनी रही।
अक्सर छोटे चुनावों में हार-जीत का रिजल्ट घोषित होने के बाद पक्ष-विपक्ष के समर्थकों में झगड़ा हो जाता है। इसलिए इस बात को ध्यान में रखते हुए जिला बप्रशासन ने सभी मतगणना स्थलों के आसपास पर्याप्त संख्या में पुलिस फोर्स को तैनात किया था। बावजूद इसके सभी स्थानों पर प्रत्याशियों के समर्थकों की भीड़ बनी रही। कई बार तो समर्थकों ने पुलिस को चकमा देकर अंदर जाने की कोशिश भी की लेकिन ऐसे समर्थकों को पुलिस ने खदेड़ दिया। प्रत्याशियों के समर्थकों परिणाम जानने को देर शाम तक रहे उत्सुक।
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प्रत्याशियों ने समर्थकों के भोजन की व्यवस्था की
बदायूं। जीत को लेकर आशावान कई प्रत्याशियों ने अपने समर्थकों के लिए दोपहर के भोजन की व्यवस्था भी मतगणना स्थल के पास ही भट्टियां लगवाकर की थी। कई बार चाय भी समर्थकों को पिलवाई गई।