Eid Ul Adha 2024: बकरीद पर क्यों दी जाती है कुर्बानी? जानिए क्या है इसकी पूरी कहानी
बदायूं में ईद-उल-अजहा का त्योहार सोमवार को परंपरागत तरीके से मनाया गया। ईदगाह व मस्जिदों में नमाज अदा की गई। इसके बाद जानवरों की कुर्बानी का सिलसिला शुरू हुआ। बकरीद पर कुर्बानी क्यों दी जाती है... जानते हैं इसके पीछे की कहानी
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इस्लामी कैलेंडर के आखिरी महीने जिल हज्जा की दस तारीख को ईद-उल-अजहा मनाई जाती है। इसी महीने की 8 से 12 तारीख तक पांच दिन पवित्र हज अदा किया जाता है। इस्लाम मानने वाले हज यात्रा पर सऊदी अरब के मक्का जाते हैं।
बदायूं के पेशे इमाम मुफ्ती सय्यद वाक़िफ अली अशरफी ने बताया कि ईद-उल-अजहा, जीवन में कठिन परीक्षा के लिए तैयार रहने और जन कल्याण के लिए खुदा की राह में अपना सर्वस्व न्यौछावर करने की शिक्षा देता है। इस्लाम के मतानुसार कुर्बानी आज से पांच हजार वर्ष पहले मुसलमानों के लिए फर्ज़ हुई थी, लेकिन ईद-उल-अजहा, जीवन में कठिन परीक्षा के लिए तैयार रहने और जन कल्याण के लिए खुदा की राह में अपना सर्वस्व न्यौछावर करने की शिक्षा देता है। ईद उल अजहा सन दो हिजरी से आज तक प्रतिवर्ष मुसलमान परंपरागत रूप से मनाते चले आ रहे हैं।
अल्लाह ने पैगंबर इब्राहीम को दिया था कुर्बानी का हुक्म
ईदगाह के पूर्व पेश इमाम शाने आलम खान ने इस्लामी मज़हब के अकीदे के हवाले से बताया कि पैगंबर हजरत इब्राहीम अलैहिस्सलाम को अल्लाह ने ख्वाब में अपनी राह में कुर्बानी पेश करने का हुक्म दिया था। पैगंबर इब्राहीम ने सुबह में सौ ऊंट कुर्बान कर दिए। दूसरी रात फिर ख्वाब में कुर्बानी का आदेश मिला। तीसरी रात जब कुर्बानी का हुक्म मिला तो पूछा परवर दिगार क्या चीज कुर्बान करूं।
अल्लाह ने कहा कि जो चीज तुमको सबसे अधिक प्रिय हो उसको मेरी राह में कुर्बान करो। पैगंबर इब्राहीम को उनके पुत्र इस्माईल सबसे अधिक प्रिय थे। इब्राहीम ने अपने बेटे को ख्वाब का माजरा बताया और उनको कुर्बान करने के लिए ले गए। जब इब्राहीम अपने बेटे को कुर्बान करने लगे तो जिब्राइल फरिश्ते ने जन्नत से एक दुम्बा उनके बेटे स्थान पर लाकर रख दिया।
जब उन्होंने अपनी आंखों की पट्टी खोली तो देखा उनके बेटे के स्थान पर एक दुम्बा पाया जबकि पैगंबर इब्राहीम बेटे को समझ कर कुर्बानी कर रहे थे। अल्लाह ताला की तरफ से पैगंबर इब्राहीम को विशारत हुई कि हमने अपनी बारगाह में आपकी कुर्बानी क़ुबूल फरमाई। तभी से कुर्बानी की शुरुआत हुई। प्रति वर्ष मुस्लिम समुदाय द्वारा ईद उल अजहा पर कुर्बानी पेश की जाती है।