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जिला योजना: अनुमोदन के बाद भी कई विभागों को नहीं मिला बजट
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बदायूं। कई ऐसे विभाग हैं, जिनको वित्तीय वर्ष बीत जाने के बाद भी बजट नहीं मिला। ऐसे में तमाम विकास कार्य भी लटक गए हैं। जिला योजना की मासिक प्रगति रिपोर्ट पर गौर करें तो फरवरी के अंत तक 20 विभागों को जिला योजना के तहत बजट अवमुक्त नहीं किया गया। इनमें कई महत्वपूर्ण विभाग भी शामिल हैं।
जिला योजना में लघु एवं सीमांत कृषकों की सहायता को 457 लाख का अनुमोदन किया गया था। फरवरी के अंत तक इस मद में बजट आवंटित ही नहीं हो सका। निजी लघु सिंचाई के लिए 1383.28 लाख का अनुमोदन हुआ था। यहां भी बजट अवमुक्त नहीं हो सका। इसके साथ ही राजकीय नलकूपों को 561.55 लाख, अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत के लिए 50 लाख, खादी ग्रामोद्योग के लिए 2.50 लाख, सड़क एवं पुल के लिए 12694.08 लाख, पर्यटन को 50, पर्यावरण को चार लाख के बजट का अनुमोदन किया गया था। इन कार्यों के लिए भी फरवरी के अंत तक बजट जारी नहीं हो सका।
उच्च शिक्षा के लिए कोई अनुमोदन नहीं किया गया था, जबकि प्राविधिक शिक्षा के लिए जिला योजना में 353.65 लाख का अनुमोदन किया गया था। इस मद में भी फरवरी के अंत तक बजट जारी नहीं हो सका। खेलकूद विभाग को 31.50 लाख, प्रादेशिक विकास दल को चार लाख, होम्योपैथिक चिकित्सा को 51.08 लाख, आयुर्वेदिक और यूनानी चिकित्सा को 15 लाख के अनुमोदन के बाद भी बिल्कुल बजट नहीं मिल सका। समाज कल्याण सामान्य जाति के लिए 353.80 लाख और अल्पसंख्यक कल्याण के लिए 11 लाख का अनुमोदन हुआ था। शिल्पकार प्रशिक्षण के लिए 449 लाख और सेवायोजन के लिए 1.21 लाख के सापेक्ष भी फरवरी के अंत तक बजट के अवमुक्त होने का प्रतिशत शून्य रहा। ऐसे में इन विभागों के काम लटक गए हैं।
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कई विभागों ने शत-प्रतिशत बजट खर्च किया
बदायूं। कई ऐसे विभाग भी हैं, जिन्होंने शत प्रतिशत बजट समय रहते खर्च कर लिया है। इनमें राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका अभियान, मनरेगा, पंचायती राज, अनुसूचित जाति कल्याण और समाज कल्याण पेंशन शामिल हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका अभियान के लिए 5227.50 के अनुमोदन में 2552 लाख अवमुक्त किए गए थे। यहां शत प्रतिशत बजट खर्च हो चुका है। इसी तरह रोजगार कार्य मनरेगा के लिए जिला योजना में 950.78 लाख का अनुमोदन हुआ और 8936.95 लाख अवमुक्त किए गए। मनरेगा के तहत शत प्रतिशत बजट वित्तीय वर्ष में खर्च हो गया है। पंचायती राज विभाग के लिए 214.05 लाख के अनुमोदन में 34.92 लाख अवमुक्त किए गए। पंचायती राज विभाग ने भी शत प्रतिशत बजट खर्च किया है।
हर साल जिला योजना के तहत प्रस्ताव भेजने के साथ ही शासन से बजट की मांग की जाती है। इस बार भी मांग की गई थी। शासन स्थिति व जरूरत के आधार पर बजट जारी करता है। जरूरी नहीं कि हर योजना को धन जारी किया जाए। - दीपा रंजन, डीएम
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जिला योजना में लघु एवं सीमांत कृषकों की सहायता को 457 लाख का अनुमोदन किया गया था। फरवरी के अंत तक इस मद में बजट आवंटित ही नहीं हो सका। निजी लघु सिंचाई के लिए 1383.28 लाख का अनुमोदन हुआ था। यहां भी बजट अवमुक्त नहीं हो सका। इसके साथ ही राजकीय नलकूपों को 561.55 लाख, अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत के लिए 50 लाख, खादी ग्रामोद्योग के लिए 2.50 लाख, सड़क एवं पुल के लिए 12694.08 लाख, पर्यटन को 50, पर्यावरण को चार लाख के बजट का अनुमोदन किया गया था। इन कार्यों के लिए भी फरवरी के अंत तक बजट जारी नहीं हो सका।
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उच्च शिक्षा के लिए कोई अनुमोदन नहीं किया गया था, जबकि प्राविधिक शिक्षा के लिए जिला योजना में 353.65 लाख का अनुमोदन किया गया था। इस मद में भी फरवरी के अंत तक बजट जारी नहीं हो सका। खेलकूद विभाग को 31.50 लाख, प्रादेशिक विकास दल को चार लाख, होम्योपैथिक चिकित्सा को 51.08 लाख, आयुर्वेदिक और यूनानी चिकित्सा को 15 लाख के अनुमोदन के बाद भी बिल्कुल बजट नहीं मिल सका। समाज कल्याण सामान्य जाति के लिए 353.80 लाख और अल्पसंख्यक कल्याण के लिए 11 लाख का अनुमोदन हुआ था। शिल्पकार प्रशिक्षण के लिए 449 लाख और सेवायोजन के लिए 1.21 लाख के सापेक्ष भी फरवरी के अंत तक बजट के अवमुक्त होने का प्रतिशत शून्य रहा। ऐसे में इन विभागों के काम लटक गए हैं।
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कई विभागों ने शत-प्रतिशत बजट खर्च किया
बदायूं। कई ऐसे विभाग भी हैं, जिन्होंने शत प्रतिशत बजट समय रहते खर्च कर लिया है। इनमें राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका अभियान, मनरेगा, पंचायती राज, अनुसूचित जाति कल्याण और समाज कल्याण पेंशन शामिल हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका अभियान के लिए 5227.50 के अनुमोदन में 2552 लाख अवमुक्त किए गए थे। यहां शत प्रतिशत बजट खर्च हो चुका है। इसी तरह रोजगार कार्य मनरेगा के लिए जिला योजना में 950.78 लाख का अनुमोदन हुआ और 8936.95 लाख अवमुक्त किए गए। मनरेगा के तहत शत प्रतिशत बजट वित्तीय वर्ष में खर्च हो गया है। पंचायती राज विभाग के लिए 214.05 लाख के अनुमोदन में 34.92 लाख अवमुक्त किए गए। पंचायती राज विभाग ने भी शत प्रतिशत बजट खर्च किया है।
हर साल जिला योजना के तहत प्रस्ताव भेजने के साथ ही शासन से बजट की मांग की जाती है। इस बार भी मांग की गई थी। शासन स्थिति व जरूरत के आधार पर बजट जारी करता है। जरूरी नहीं कि हर योजना को धन जारी किया जाए। - दीपा रंजन, डीएम